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बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कितना सही? पेरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई में अच्छा करे और भविष्य में सफल बने। बच्चे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना अच्छी बात है, लेकिन जब उम्मीदें दबाव में बदल जाती हैं तो इसका असर बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। पढ़ाई, परीक्षा, रैंक और करियर को लेकर बच्चों पर पहले से ही काफी दबाव रहता है। ऐसे में पेरेंट्स का लगातार अच्छे नंबर और फर्स्ट आने के लिए दबाव बनाना बच्चे को तनाव और चिड़चिड़ेपन की ओर ले जा सकता है।

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पेरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान:

  • अच्छे नंबर का दबाव न बनाएं

बच्चे को बार-बार फर्स्ट आने या दूसरों से आगे निकलने के लिए कहना उसके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है। अगर मेहनत के बावजूद परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आता तो बच्चा खुद को असफल समझने लग सकता है। इसलिए नंबरों से ज्यादा उसकी मेहनत और सीखने की कोशिश पर ध्यान दें।

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  • दूसरे बच्चों से तुलना न करें

‘देखो, वह तुमसे ज्यादा नंबर लाता है’ जैसी बातें बच्चे के मन पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। हर बच्चे की क्षमता और सीखने की गति अलग होती है। बच्चे की तुलना किसी और से करने के बजाय उसकी अपनी पिछली प्रगति को देखें और उसे बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करें।

  • डांटने के बजाय समझाएं

कम नंबर आने या गलती करने पर बच्चे को डांटने के बजाय उसकी परेशानी समझें। उसके साथ बैठकर जानने की कोशिश करें कि उसे किस विषय या चीज में परेशानी हो रही है। उसे बताएं कि गलती और असफलता जिंदगी का हिस्सा हैं और अगली बार बेहतर करने का मौका हमेशा होता है।

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  • पढ़ाई के साथ अच्छे संस्कार भी जरूरी

बच्चे का विकास सिर्फ अच्छे नंबरों से नहीं होता। उसे ईमानदारी, सम्मान, जिम्मेदारी और अच्छे व्यवहार के बारे में भी सिखाना जरूरी है। पेरेंट्स खुद अपने व्यवहार से बच्चों के सामने अच्छा उदाहरण पेश कर सकते हैं।

  • बच्चे से खुलकर बात करें

रोज कुछ समय बच्चे के साथ सिर्फ बातचीत के लिए निकालें। उससे स्कूल, दोस्तों और उसकी पसंद-नापसंद के बारे में पूछें। अगर बच्चा लंबे समय तक उदास, चिड़चिड़ा रहता है, पढ़ाई या पसंदीदा गतिविधियों से दूर होने लगता है या उसके व्यवहार में बड़ा बदलाव दिखाई देता है, तो उसकी बात गंभीरता से सुनें और जरूरत पड़ने पर काउंसलर या विशेषज्ञ की मदद लें।

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