गणेशजी घर में विराज चुके हैं, अब इन 10 वास्तु बातों का रखें ध्यान

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना के बाद भक्त उनकी पूजा-अर्चना और सेवा में जुट जाते हैं। घर में बप्पा की मौजूदगी से उत्सव का माहौल बन जाता है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार, गणेशजी की मूर्ति या चित्र रखते समय कुछ बातों का ध्यान रखना शुभ माना जाता है। हालांकि, इन मान्यताओं का उद्देश्य आस्था और सकारात्मकता से जुड़ा है।
1. सूंड की दिशा का रखें ध्यान
मान्यता है कि घर में गणेशजी की मूर्ति या चित्र रखते समय उनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई होनी चाहिए। इसे गृहस्थ जीवन के लिए अनुकूल माना जाता है। दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति की पूजा में विशेष नियमों का पालन करने की मान्यता है।
2. घर और कार्यस्थल के लिए अलग मुद्रा
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर में बैठे हुए गणेशजी की मूर्ति रखना शुभ माना जाता है। वहीं, दुकान या कार्यालय में खड़े गणपति की मूर्ति या चित्र को कार्य में सक्रियता और उन्नति का प्रतीक माना जाता है।
3. दोनों पैर जमीन को छूते हों
गणेशजी की मूर्ति रखते समय ध्यान रखें कि उनके दोनों पैर जमीन का स्पर्श कर रहे हों। मान्यता है कि ऐसी मुद्रा घर और कार्यस्थल में स्थिरता, संतुलन और सफलता का प्रतीक होती है।
4. सिंदूरी रंग के गणपति
सिंदूरी रंग को भगवान गणेश से विशेष रूप से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सर्वमंगल और मनोकामना पूर्ति की इच्छा रखने वाले भक्त सिंदूरी रंग के गणपति की आराधना कर सकते हैं।
5. दक्षिण दिशा की ओर न हो मुख
गणेशजी की मूर्ति स्थापित करते समय उनके मुख की दिशा का भी ध्यान रखा जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, भगवान का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखने से बचना चाहिए। इसे घर और दुकान के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
6. चित्र में मोदक और मूषक का होना
घर में गणेशजी का चित्र लगाते समय इस बात का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है कि उसमें मोदक और उनका वाहन मूषक भी दिखाई दे। धार्मिक मान्यता में मोदक को प्रसन्नता और समृद्धि, जबकि मूषक को विनम्रता और इच्छाओं पर नियंत्रण का प्रतीक माना जाता है।
7. मुख्य द्वार पर गणेशजी के चित्र
कुछ वास्तु मान्यताओं में घर के मुख्य द्वार पर गणेशजी के दो चित्र या मूर्तियां लगाने की बात कही गई है। इन्हें इस तरह रखने की सलाह दी जाती है कि दोनों की पीठ एक-दूसरे से लगी हो। हालांकि, इसे वास्तु संबंधी मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
8. स्वास्तिक बनाने की मान्यता
वास्तु दोष वाले स्थान पर घी मिले सिंदूर से गणेश स्वरूप स्वास्तिक बनाने की परंपरा कुछ घरों में देखी जाती है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक प्रभाव कम करने में मदद मिलती है और वातावरण में सकारात्मकता बनी रहती है।
9. सफेद रंग के गणपति
सुख-शांति और समृद्धि की कामना करने वाले भक्त सफेद रंग के गणेशजी की मूर्ति या चित्र स्थापित करना शुभ मानते हैं। सफेद रंग को शांति, पवित्रता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है।
10. केंद्र और पूर्व दिशा का महत्व
वास्तु शास्त्र में घर के केंद्र यानी ब्रह्म स्थान और पूर्व दिशा को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इन स्थानों पर गणेशजी की मूर्ति या चित्र रखने से घर में शुभता और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। मूर्ति रखते समय रास्ते में बाधा न हो और पूजा स्थल साफ-सुथरा रहे, इसका ध्यान रखना भी जरूरी है।









