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एक दशक में सबसे कम बारिश इस साल, केवल 22.12 इंच पानी गिरा, औसत से 13.88 इंच कम

दस साल का रिकॉर्ड बताता है 25 सितंबर के बाद 9.45 इंच से ज्यादा बारिश कभी नहीं हुई, ऐसे में जलसंकट गहराने के आसार

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। उज्जैन जिला एक दशक में सबसे कम बारिश की तरफ बढ़ रहा है। शुक्रवार (२५ सितंबर) तक जिले में केवल २२.१२ इंच (५६२ मिमी) बारिश हुई है। यह जिले की औसत बारिश ३६ इंच (९०० मिमी) से १३.८८ इंच(३३८ मिमी) कम है। सितंबर के अंतिम पांच दिनों (२५ से ३० सितंबर)में अब तक अधिकतम बारिश ९.४५ इंच (२४० मिमी) तक हुई है। यह रिकॉर्ड २०२४-२५ में बना था। इस आंकड़े को यदि अधिकतम माने तो इस साल जिले के औसत बारिश तक पहुंचने के आसार कम है। कम बारिश की वजह से शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के अधिकतर तालाब खाली हैं। इस हिसाब से जिले में इस बार जलसंकट तगड़ा हो सकता है। फिलहाल नगरनिगम का एक दिन छोड़कर पानी देने का कोई प्लान नहीं है। वह नर्मदा की पाइपलाइन के भरोसा बैठा है। पंपिंग के जरिये आने वाले इस पानी का बोझ नगरनिगम की माली हालत खराब कर सकता है।

दरअसल, इस बार बारिश की शुरुआत तो धमाकेदार हुई थी और जुलाई की शुरुआत में तगड़ा पानी गिरा था। माना जा रहा था कि बारिश अच्छी होगी लेकिन फिर मानसून ने आंखमिचौली शुरू की और आंकड़ा नीचे की तरफ गिरने लगा। अगस्त करीब-करीब सूखा ही बीता और ऐसा ही हाल सितंबर का भी रहा। कोई सिस्टम एक्टिव नहीं होने से बारिश कमजोर होती चली गई। सरकारी रिकॉर्ड में १५ जून से ३० सिंतबर को मानसून सीजन माना जाता है और इस हिसाब से अब सीजन पूरा होने में केवल चार दिन शेष हैं। मौसम के पूर्वानुमान के मुताबिक अब बारिश की संभावना नगण्य है। इसका असर रबी सीजन के साथ पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। रबी में गेहूं इलाके की प्रमुख फसल है और इसमें ज्यादा पानी लगता है।

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एक दशक में उज्जैन जिले में बारिश की स्थिति

एक दशक के आंकड़े बताते हैं कि सबसे अच्छी बारिश २०१९-२० में हुई थी, तब ६४.७६ इंच पानी गिरा था। यह जिले के औसत से २८.७६ इंच अधिक था। इस साल सिंतबर के अंतिम पांच दिनों में ९.३३ इंच बारिश हुई थी। दशक में दूसरी अच्छी बारिश २०२०-२१ में हुई थी। इस साल ५६.९२ इंच पानी गिरा था। यह जिले के औसत से २०.९२ इंच अधिक था। फिलहाल इस साल १३.८८ इंच कम पानी है।

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फ्रीगंज का जल स्तर बढ़ाने वाले तालाबों में पानी नहीं

फ्रीगंज, नानाखेड़ा, कोठी पैलेस, विक्रमनगर, नागझिरी क्षेत्र में भूजल स्तर बढ़ाने में मददगार चार तालाब भी इस बार करीब-करीब खाली हैं। कमल तालाब (कालिदास अकादमी परिसर), विक्रम तीर्थ मानसरोवर (गीता भवन के पीछे), साइंस कॉलेज तालाब (साइंस कॉलेज परिसर) और श्रम तीर्थ सरोवर (पुलिस लाइन) में भी इस बार पर्याप्त पानी नहीं है। साइंस कॉलेज तालाब में थोड़ा बहुत पानी दिख रहा है लेकिन बाकी रीते हैं।

यह तालाब अंडर ग्राउंड वाटर का लेवल बनाए रखने में बेहद मददगार थे। इस बार इनमें पानी नहीं होने पर भूजल स्तर नीचे गिरने की आशंका रहेगी। खासकर विवि परिसर, नागझिरी, पुलिस लाइन, महानंदानगर-महाश्वेतानगर, ऋषिनगर, सेठीनगर, दशहरा मैदान में जल संकट की स्थिति बन सकती है।

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