नवरात्रि में सप्तमी दो दिन और अष्टमी-नवमी एक साथ क्यों? जानें सही तारीखें

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। लेकिन साल 2026 में तिथियों की गणना के कारण पूजा के दिनों में थोड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कहीं सप्तमी दो दिन पड़ रही है, तो कहीं अष्टमी और नवमी एक ही दिन आ रही हैं। दरअसल, हिंदू पंचांग में तिथियां अंग्रेजी कैलेंडर की तारीखों की तरह आधी रात से शुरू होकर अगले दिन आधी रात तक नहीं चलतीं। इनकी अवधि चंद्रमा की स्थिति के अनुसार तय होती है। इसी वजह से कभी कोई तिथि दो सूर्योदय तक रहती है और कभी दो तिथियां एक ही दिन में पड़ जाती हैं।
सप्तमी दो दिन क्यों पड़ रही है?
पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को शुरू होकर 18 अक्टूबर की सुबह 8 बजकर 28 मिनट तक रहने वाली है। इस कारण सप्तमी दोनों दिन सूर्योदय के समय मौजूद रहेगी। 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। वहीं, 18 अक्टूबर को सुबह 8:28 बजे तक सप्तमी तिथि रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। इसी वजह से इस बार सप्तमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है।
अष्टमी और नवमी की पूजा एक ही दिन क्यों?
इस साल अष्टमी और नवमी की तिथियां भी एक ही तारीख पर पड़ रही हैं। अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8:28 बजे के बाद शुरू होगी और 19 अक्टूबर को सुबह करीब 10:52 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। इस तरह 19 अक्टूबर की सुबह अष्टमी तिथि रहेगी और कुछ समय बाद नवमी शुरू हो जाएगी। इसी वजह से इस दिन महाअष्टमी और महानवमी दोनों की पूजा की जा सकती है। हालांकि, पूजा और व्रत के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना जरूरी है।

कन्या पूजन कब करें?
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन करने की परंपरा है। इस दौरान छोटी बच्चियों को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर भोजन कराया जाता है और दक्षिणा या उपहार दिए जाते हैं। इस साल 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी दोनों तिथियां पड़ने के कारण कई श्रद्धालु इसी दिन कन्या पूजन करने की योजना बना सकते हैं। हालांकि, कन्या पूजन का सही समय आपकी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार तय हो सकता है। इसलिए पूजा से पहले मुहूर्त की जानकारी जरूर लें।
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क्या इस बार नवरात्रि के नौ दिन पूरे नहीं होंगे?
सप्तमी का दो दिन पड़ना और अष्टमी-नवमी का एक ही तारीख पर आना देखकर कुछ लोगों को लग सकता है कि इस बार नवरात्रि के नौ दिन पूरे नहीं होंगे। लेकिन ऐसा नहीं है। हिंदू पंचांग में तिथियों की अवधि और अंग्रेजी कैलेंडर की तारीखों की गणना अलग-अलग होती है। किसी तिथि का दो सूर्योदय तक रहना या एक दिन में दो तिथियों का आना सामान्य पंचांग गणना का हिस्सा है। इससे मां दुर्गा की पूजा का महत्व कम नहीं होता। नवरात्रि में पूजा किस दिन करनी है, यह तय करते समय तिथि, सूर्योदय और स्थानीय पंचांग को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशहरे की तारीखों को लेकर भ्रमित होने के बजाय अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पूजा करना बेहतर रहेगा।









