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महाकाल लोक के दायरे आ रहे 257 मकानों पर चली प्रशासन की जेसीबी, भारी भरकम पुलिस बल तैनात

एक दिन पहले ही क्षेत्र में करा दी थी मुनादी

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सुबह होते ही पुलिस बल इलाके में पहुंचा

लोग स्वेच्छा से अपना सामान हटाने में लगे थे

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प्रशासन ने ज्यादा मशक्कत नहीं की

  •  4    पोकलेन
  •  6    जेसीबी
  • 18  अधिकारी
  • 170 पुलिसकर्मी
  • 250 कर्मचारी
  • 257 मकान

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। महाकाल लोक के दायरे में आ रहे 257 मकानों पर प्रशासन ने योजना बना कर जेसीबी चलाई। कोई विरोध नहीं हुआ। मुआवजा लेकर मकानों में रहने वालों ने स्वैच्छा से सामान हटा कर मकान खाली कर दिए। अपने वाहनों से सामान ले जाया गया। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन दलबल के साथ तैयार था, लेकिन ऐसी नौबत नहीं आई। एक दिन पहले ही इलाके में फ्लैग मार्च निकाल कर पुलिस प्रशासन ने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई की पूरे शहर में चर्चा रही। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि रिपोर्ट क्रमानुसार भोपाल भी भेजी गई। वरिष्ठ अधिकारी अपने मातहतों से पल-पल की जानकारी लेते रहे।

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गौरतलब है कि महाकाल लोक के विस्तार के लिए प्रशासन ने योजना बनाई है। वर्तमान में बनाई गई पार्किंग भीड़ के लिहाज से छोटी पड़ रही है। यहां आने वाले वाहनों को खड़ा करने की जगह नहीं मिलती। नतीजन, शहर में जाम लगता है। जिन्हें यहां पार्किंग में जगह नहीं मिलते वे सैलानी अपने वाहन लेकर शहर में भ्रमण करते रहते हैं। इसलिए इस पार्किंग का विस्तार अपरिहार्य है। इसके अलावा यात्रियों के लिए सुविधा घर और अन्य सौंदर्यीकरण के लिए जगह कम पड़ रही थी।

सुबह आंख खुली तो देखी जेसीबी

बहुत से लोगों की आदत है वे देरी से उठते हैं। जब वे अलसाए हुए आंखे मलते हुए उठे तो सामने जेसीबी और पोकलेन देख कर चौंक गए। मुंह से एक ही वाक्य निकला, लो आ गए अपने आशियाने को तोडऩे वाले। प्रशासन की मुनादी का असर हुआ और मकान खाली होने लगे। लोगों ने मैजिक, रिक्शा और अन्य साधनों से सामान अपने निर्धारित स्थान पर भिजवाया।

मंदिर समिति ने दिया मुआवजा

तकिया मस्जिद के आसपास कॉलोनी कब बसी, प्रशासन के पास इसकी कोई जानकारी नहीं है। लेकिन यह भी सच है कि कॉलोनी पुरानी नहीं है। जब महाकाल लोक की योजना ने मूर्त रूप लिया तब यहां बनाई गई निजामुद्दीन कॉलोनी भी जद मेें आई। प्रशासन मकान खाली कराने के लिए नोटिस जारी किए और न्यायालय का सहारा भी लिया। रहवासियों की याचिका खारिज हुई। इसके बाद अवार्ड पारित हुआ। मंदिर समिति ने 66 करोड़ में से 36 करोड़ रुपए वितरित कर चुकी है। मामला कुल २५७ मकानों का है। यहां यह भी बता दें कि क्षेत्र में अभी बहुत से ऐसे मकान बने हुए हैं जिनके नगर निगम से नक्शे पास नहीं हुए हैं। इस प्रकार की चर्चा कार्रवाई के दौरान जारी रही। लोगों का कहना था कि प्रशासन इस ओर भी ध्यान दे।

इलाके में जाम की नौबत


जब मकान खाली हो गए तब नगर निगम की जेसीबी और पोकलने ने अपना काम शुरू किया। धड़ाधड़ मकान टूटने लगे। आसपास की कॉलोनियों के लोग प्रशासन की इस कार्रवाई को देखने के लिए उमड़ पड़े। वाहनों की रेलमपेल की वजह से क्षेत्र मे जाम लग गया। पुलिस को इसमें भी उलझना पड़ा।

फ्लैग मार्च से हलचल रही इलाके में

पुलिस ने शुक्रवार को योजना बनाई और इलाके में फ्लैग मार्च निकाला। इसमें पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी शामिल थे। फ्लैग मार्च से इलाके में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल रहा। लोगों में जिज्ञासा थी कि इतना पुलिस बल इस इलाके में क्यों आया? जब अनाउंसमेंट वाली गाड़ी आई तब जिज्ञासा शांत हुई। बताते हैं कि शाम के बाद से कई लोगों ने अपना सामान उठाने और मकान खाली करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

झलकियां

पुलिस ने ड्रोन से निगरानी शुरू की। कोई पक्षी ड्रोन से टकराया। ड्रोन रुद्रसागर में समा गया। कर्मचारी उसे ढूंढते रहे।

अपने मकान को टूटता देख 17 वर्षीय सोफिया नामक किशोरी बेहोश हो गई।

जेसीबी क्रमांक एमपी 13 डीए 2836 पर नौसीखिया ड्राइवर बैठा। जेसीबी उससे नहीं चली, बल्कि फंस गई।

कोई विरोध नहीं हुआ तो कई पुलिस वालों ने आराम से पोहे का आनंद लिया।

करीब पचास मकान शुक्रवार को ही खाली हो गए थे।

एक बच्चा बोला, अम्मी मेरा बस्ता अंदर ही रह गया। अम्मी दौड़ी और बस्ता ले आई।

कई तमाशबीनों ने प्रशासन की कार्रवाई का वीडियो बनाया।

एक वीडियो बनाने वाले का मोबाइल पुलिस वाले की घूमा। उसने घूरा तो वह सीधा हो गया। बोला, नहीं, नहीं आपका नहीं बनाया।

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