हालात बता रहे हैं यहां यह हादसा तो होना ही था…

महाकाल मंदिर के सामने हुई दुर्घटना के बाद अक्षर विश्व टीम ने मौके पर पहुंचकर देखे हालात
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मुकेश पांचाल की रिपोर्ट उज्जैन। पदमभूषण पं. सूर्यनारायण व्यास के सामने और पं. आनंद शंकर व्यास के मकान के पास हादसा हुआ। महाराजवाड़ा स्कूल की बरसों पूर्व बनी उस दीवार के ऊपर दीवार बना दी गई थी। बीच में मिट्टी थी। यानी हादसा तो होना ही था। महाराजवाड़ा हैरिटेज निर्माण एजेंसी के इंजीनियर और उनकी टीम ने बीच के हिस्से को नजरअंदाज कर दिया। यही हादसे की पहली वजह बना।
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जहां हादसा हुआ उसी के सामने श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिलाया जाता है। यानी यहां भीड़ रहती है। हादसा स्थल के नीचे नगर निगम ने दुकानें कैसे लगने दीं। हादसे के समय यदि वहां कोई नहीं होता तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता। जाहिर है कि नगर निगम के उस अमले ने ध्यान नहीं दिया जो बीस तीस रुपए की रसीद काट कर अपने अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। मौके पर मौजूद डॉ. रमेश शर्मा, डॉ. चंद्रेश उपाध्याय और वीरेश राणा का कहना था कि इस घटना के लिए निर्माण एजेंसी और नगर निगम जिम्मेदार है।
कलेक्टर जांच कराएंगे एसडीएम से
यह हादसा क्यों हुआ? कैसे हुआ? कैसे बचा जा सकता था। मौके पर कौन-कौन थे? हताहत परिवार कहां था? इत्यादि। एसडीएम की जांच के यह बिंदु प्रमुख हैं। लोगों का कहना है कि नगर निगम और निर्माण एजेंसी सवालों के घेरे में है। अब समय बताएगा कि एसडीएम की जांच में दोषी कौन पाया जाएगा।
जहां हादसा हुआ वहीं की दुकान खस्ताहाल
पाठकों यह बता दें जिस दीवार ने दो लोगों की जान ली और चार को घायल कर दिया उसी के पास में एक दुकान है। इस दुकान की हालत खस्ता है। यह कभी भी गिर सकती है। गनीमत यह रही कि हादसे के समय यह दुकान सलामत रही। यदि यह भी गिर जाती तो दी-तीन लोगो की और जान ले सकती थी। यह दुकान भी हमारे अधिकारियों को नजर नहीं आई।

पूरा महाकाल लोक और मंदिर परिसर अतिक्रण की चपेट में
महाकाल लोक बनने से पहले अपने शहर के हालत बुरे नहीं थे। शहर में ही अतिक्रण हो रहा था। लोक बनने के बाद तो आसपास का इलाका धन उगलने लगा। देखते ही देखते चारों तरफ दुकानें सज गईं। चौबीस खंभा माता मंदिर से हरसिद्धि मंदिर तक दो सौ से ज्यादा दुकानें लग गई हैं। इधर बड़े गणेश से लेकर बाहर हरसिद्धि की मार्ग के दोनों ओर करीब दो सौ दुकानें लगी हैं। हरसिद्धि के सामने सत्तर दुकानें हैं जिसमें टेेबल वाले थी शामिल हैं।
रुद्रसागर के दोनों ओर करीब सवा सौ दुकानें हैं। शेर चौराहा के चारों तरफ सौ से ज्यादा दुकानें हैं। महाराजवाड़ा के सामने पचास से ज्यादा दुकानों पर पूजा सामग्री और अन्य सामान बेचा जा रहा है। इधर महाकाल लोक जयसिंहपुरा मार्ग के दोनों तरफ सौ से ज्यादा दुकानें लग गई हैंं। महाकाल चौक, गुदरीबाजार से लेकर महाकाल चौक के उतार यानी तोपखाना जाने वाले मार्ग पर चौतरफा अतिक्रमण है।कलेक्टर जांच कराएं तो माफिया बेनकाब हो जाएगा
हादसे के बाद शहर में एक ही चर्चा रही कि महाकाल लोक के आसपास लगी यह अवैध दुकानें किसके इशारे और किसके संरक्षण में लगाई गई हैं। अक्षर विश्व की टीम ने हादसे के दू्रसरे पूरे इलाके का दौरा किया और सच्चाई जानी। अतिक्रण करने वालों से पूछा गया कि रुद्रसागर के पक्के बने उस फुटपाथ पर जो लोगों के पैदल चलने के लिए है, वहां दुकान कैसे लगा ली? एक महिला ने बताया कि तीस रुपए की रसीद कटती है। वह बोली, हमें पास वाले भय्या ने जगह दी है।
उस पूरी बात बताती उसके पहले ही एक युवक आ गया और बोला हमने तो जगह रोकी है। मौके पर मौजूद हेमंत कुमार का कहना था कि दुकानें लगी नहीं, लगवाई गई हैं। यह लाखों का खेल है भाई साहब आप नहीं समझेंगे। उसने आगे कहा, भाई साहब, नगर निगम को बेनकाब करना है तो कलेक्टर साहब खुद जांच कराएं। जांच टीम में उनके अपने लोग रहें तब पता चल जाएगा कि यहां अतिक्रमण माफिया किस तक काम कर रहा है। समझ में नहीं आता नगर निगम के आयुक्त इस माफिया को बेनकाब क्यों नहीं करते।
यहां भी हो सकता है हादसाा
बड़े गणेश की गली में अतिक्रण की भरमार है। जानकारों का कहना है कि महाराजवाड़ा स्कूल के पिछवाड़े की तरफ दीवार है, यहां भी कभी हादसा हो सकता है। यह जगह व्यापार के लिए सुरक्षित नहीं है। इस मार्ग को केवल आने-जाने के लिए ही रखा जाए।
दुकानें देना ही हैं तो कायदे से दें
समाजसेवी अनिल शर्मा, हेमंत अग्निहोत्री का कहना है कि महाकाल मंदिर समिति ने फूल, माला और प्रसास बेचने वालों को दुकानें देकर दुकान नंबर अलॉट किए हैं। इसी प्रकार शहर के बेरोजगारों को अतिक्रमण माफिया से मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन अपनी शर्त पर दुकानों का आवंटन करे। हरसि्िद्ध मंदिर के सामने भी दुकानें आवंटित की गई हैं। यदि कायदे से दुकानें दी जाएंगी तो शहर भी अतिक्रण की समस्या से मुक्त हो जाएगा। अभी स्थिति यह है कि दुकान मालिक श्यामलाल है और दुकान चलाने वाला कालूराम है। कलेक्टर को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
नगर निगम का अमला जागा
शुक्रवार को सुबह से नगर निगम का अमला बड़े गणेश मंदिर के सामने आ गया था। एनाउंस किया जा रहा था कि दुकानें हटा लें। टेबलें हटा लें। यह दस्ता शेर चौक होता हुआ हरसिद्धि मंदिर के सामने पहुंचा। बारिश तेज हो रही थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु फूल, माला और प्रसाद खरीद रहे थे। दस्ते ने टेबलें हटवा दीं। ठेले वाले इधर-उधर भागने लगे। इंदौर से आए श्रद्घालु मिलिंद ठाकुर और पवन कुमार ने कहा कि यदि यह दुकानदार यदि अवैध रूप से दुकान लगा कर बैठे हैं तो पहले ही हटा देते। हादसे के बाद यह दिखावा क्यों।









