मुख्यमंत्री के आदेश के बाद मनमानी पर रोक के लिए प्रशासन की कार्रवाई, किताब-कॉपी विक्रेताओं की जांच

प्रारंभिक पड़ताल में आठ स्कूल्स की तीन बुक सेलर से सांठ-गांठ उजागर, स्कूल में जांच करने पहुंचे डीईओ
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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:स्कूल्स द्वारा पाठ्यपुस्तक-कॉपियां तय दुकाने से लेने के लिए अभिभावकों बाध्य करने के साथ मनमानी के मामले में सीएम के आदेश के बाद जिला प्रशासन द्वारा जांच-पड़ताल की गई। प्रशासन की प्रारंभिक जांच में शहर के आठ स्कूल्स की बुक सेलर से सांठ-गांठ उजागर हुई है।
मुख्यमंत्री के निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ दिए गए आदेश के बाद अब जिला प्रशासन ने अभिभावकों की शिकायत पर तीन दुकानों पर कार्यवाही की है। प्रारंभिक जांच में आरके बंसल, केंद्रीय विद्यालय, निर्मला कान्वेंट, सेंट पाल, स्टेनफोर्ड, विद्या भवन, वर्जिन मेरी, सेंट मेरी स्कूल प्रबंधन सहित अन्य स्कूलों की किताबों की बिक्री पर मनमानी सामने आई है। स्कूल्स से सांठ-गांठ कर सेलर द्वारा महंगे दामों में किताबे बेची जा रही थी।
इस मामले में अधिकारी कह रहे हंै कि पूरी जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए एक आदेश जारी किया था। इसमें अब प्रायवेट स्कूल किसी निर्धारित दुकान से ही किताबें, यूनिफार्म और अन्य शिक्षण सामग्री खरीदने का दबाव अभिभावक पर नहीं बना सकते हंै।
यदि ऐसी कोई शिकायत मिली तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह को कई स्कूल प्रबंधन की मनमानी की शिकायत मिली थी। शिकायत के बाद कलेक्टर ने एक टीम बनाकर एसडीएम एलएन गर्ग सहित अन्य अधिकारियों को जांच करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद बुधवार शाम को प्रशासन के दल ने तीन बुक सेलर एमपी पब्लिशर, पराग पब्लिशर और ज्ञानगंगा पब्लिशर पर जांच की।
अभिभावकों से की चर्चा
एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी आनंद शर्मा व टीम ने शहर में एमपी पब्लिशर, पराग पब्लिशर और ज्ञान गंगा पब्लिशर के यहां जांच की। अभिभावकों को कॉपी पर 20 प्रतिशत डिस्काउंट दे रहे है, लेकिन किताबों पर कोई डिस्काउंट नहीं मिल पा रहा है। प्राथमिक जांच में स्कूल से सांठ-गांठ होने की शंका है कई स्कूलों के नाम है अब स्कूलों की जांच की जाएगी। इसके बाद मामले में खुलासा करेंगे। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे।
अधिकारियों ने दुकानों पर किताबें खरीदने के लिए मौजूद अभिभावकों से चर्चा की। इसमें स्कूल और सेलर की साठ-गांठ, मिलीभगत सामने आई है। अभिभावकों ने बताया कि प्रायवेट स्कूल में बच्चा पढ़ रहा है, स्कूल की तरफ से बुक लिस्ट थमा दी जाती है और उनके पूछने पर कहा जाता है कि किसी निश्चित पब्लिशर के यहां आपको यह सारी शिक्षण सामग्री उपलब्ध हो जाएगी। यहां आओ तो डिस्काउंट सिर्फ कॉपियों पर दिया जा रहा है, बुक्स के रेट में कोई डिस्काउंट नहीं है।
शिकायत के लिए फोन नंबर जारी
किताब-कापियों के संबंध में जारी प्रतिबंधात्मक आदेश आदेश का उल्लंघन होने संबंधी शिकायत कमांड कंट्रोल रूम के दूरभाष 0734/ 2520711 पर कर सकेंगे। यह आदेश उज्जैन जिले की राजस्व क्षेत्र में 3 अप्रैल से लागू रहेगा।
डीईओ ने की स्कूल में विद्यार्थियों से बात
अभिभावकों की शिकायत, तीन दुकानों पर जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) आनंद शर्मा, गुरुवार सुबह कुछ स्कूल में विद्यार्थियों से बात करने पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच और चर्चा में कुछ जगह प्रतीत हुआ कि किताबों-कापियों के लिए दुकानें फिक्स है।
प्रतिबंधात्मक आदेश जारी
स्कूल संचालकों द्वारा विद्यार्थियों व अभिभावकों को पुस्तकें और यूनिफार्म संबंधित स्कूल/संस्था या दुकान विशेष से क्रय किए जाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
परीक्षा परिणाम से पहले पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जायेगा
अधिकृत एजेंसी के अतिरिक्त अन्य प्रकाशकों/मुद्रकों द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पुस्तकों का विद्यालय में अध्यापन पर प्रतिबंध रहेगा।
अनिवार्य पुस्तकों की सूची स्कूल की वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने के साथ स्कूल परिसर में सार्वजनिक स्थान पर चस्पा करना होगी।
स्कूल संचालक/प्राचार्य विद्यार्थी एवं उनके अभिभावकों को सूचीबद्ध पुस्तकें, परिणाम अथवा उसके पूर्व क्रय किये जाने हेतु बाध्य नहीं करेगें।
एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक निगम आदि के द्वारा प्रकाशित एवं मुद्रित पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य प्रकाशकों/मुद्रकों द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पुस्तकों को विद्यालय में अध्यापन के लिए प्रतिबंधित करेंगे।
अतिरिक्त अन्य विषयों जैसे नैतिक शिक्षा, सामान्य ज्ञान, कम्प्यूटर आदि की प्रकाशकों/मुद्रकों द्वारा प्रकाशित पुस्तकें क्रय करने के लिए बाध्य नहीं किया जायेगा।
निजी प्रकाशक/मुद्रक/विक्रेता स्कूल परिसर के भीतर प्रचार-प्रसार के लिए प्रवेश नही करेंगे।
स्कूल संचालक/विक्रेता द्वारा पुस्तकों के सेट की कीमत बढ़ाने के लिए अनावश्यक सामग्री जो निर्धारित पाठ्यक्रम से संबंधित नहीं है, का समावेश सेट में नहीं किया जाएगा।
कोई भी विक्रेता किसी भी कक्षा के पूरे सेट को क्रय करने की बाध्यता नहीं रखेगा।
नोट बुक (कॉपी) पर ग्रेड, किस्म, साईज, मूल्य, पेज की संख्या आदि की जानकारी स्पष्ट रूप से उल्लेखित होना चाहिए।
प्रतिबंधात्मक आदेश का इसका उल्लघंन करने वाले व्यक्ति, संस्था, आयोजक के विरूद्ध भारतीय दंड प्रक्रिया की धारा 188 के अंतर्गत कार्यवाही की जाएगी। विद्यालय द्वारा उक्त आदेशों की अवहेलना किये जाने पर शाला के प्राचार्य/संचालक के साथ ही शाला प्रबंधक/बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के समस्त सदस्य भी दोषी होंगे।










