कलेक्टर की सख्ती के बाद मंदिर प्रशासन दुकानें देने के लिए जागा, 48 लाख रुपए की एक शॉप

प्रसादम् में व्यापारी कारोबार करने को तैयार नहीं, दुकानें शुरू नहीं की तो निरस्त होगा आवंटन
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अक्षरविश्व न्यूज| उज्जैन। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के एक दौरे और सख्ती ने महाकाल मंदिर प्रशासन को हिलने पर मजबूर कर दिया। प्रसादम की जो दुकानें अभी तक ठंडे बस्ती में पड़ी थीं, ताबड़तोड़ उनका टेंडर निकालना पड़ा। एक दुकान की सरकारी कीमत ही 47,93800 रुपए है। अब दुकान लेने वाले को इसके आगे बढ़ना है। जो दुकानदार करीब पचास लाख में दुकान लेगा और करीब दस लाख रुपए सजाने और संवारने में खर्च करेगा तो कमाएगा कितना। यानी जो सामान बेचेगा वह बाजार मूल्य से कितना महंगा रहेगा यह भविष्य के गर्भ में है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नगर आगमन के पूर्व कलेक्टर ने महाकाल मंदिर और महाकाल लोक का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया था। इसी दौरान नीलकंठ पार्किंग के पास बनाई गई प्रसादम की दुकानों के शुरू नहीं होने पर पूछताछ की गई थी। कलेक्टर को बताया गया कि कुल 17 दुकानें हैं। पिछले दिनों निकाले गए टेंडर में 10 दुकानों का आवंटन तो हो चुका है ७ बाकी हैं। मजेदार बात यह है कि यह 10 दुकानें भी शुरू नहीं हो सकी हैं।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिन दुकानों का आवंटन हो चुका है उनके संचालकों से कहा जाए कि वे कारोबार शुरू करें। यदि दुकानें शुरू नहीं होती हैं तो आवंटन निरस्त किया जाए। जिन दुकानों के टेंडर नहीं हुए हैं, उन्हें जारी किया जाए। कलेक्टर की इस सख्ती से महाकाल मंदिर प्रशासन हरकत में आया और स्मार्ट सिटी की ओर से निविदा जारी कर दी गई। व्यापार करने वालों को ई-टेंडर के जरिए आमंत्रित किया गया है।
मंदिर के चारों ओर दुकानों का लोक
महाकाल मंदिर और महालोक के चारों ओर दुकानों का लोक है। यहां खाद्य पदार्थ से लेकर मनिहारी, कपड़े, कंठी माला, मूर्ति, सजावटी सामान, खिलौने, सुहाग सामग्री आदि सभी बेची जा रही है। ऐसी स्थिति में प्रसादम में क्या बिकेगा यह भविष्य बताएगा। दुकानदार कितना कमाएगा, यह दुकान लेने वाला ही जानेगा।
सीसीटीपी कैमरों की नजर में शॉप्स
प्रसादम की 17 दुकानें हैं जिनकी सुरक्षा के लिए 5 कैमरे लगाए गए हैं। आग से बचाव के लिए उपकरण लगाए हैं जो उपयोग में न आने से दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। यहां आने वालों के लिए 5 कुर्सियां बनाई गई हैं। इनमें से एक टूट भी गई है यानी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। बनाने वालों ने तो बनाया, व्यवस्थापकों ने नहीं संभाला।
दुकानें भी आरक्षण आधार पर
जारी की गई निविदा के अनुसार दुकान क्रमांक चार अनुसूचित जाति वर्ग के लिए रखी गई है। इसकी प्रारंभिक बोली 2383100 रुपए है। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए भी एक दुकान आरक्षित की गई है दुकान क्रमांक पांच, इसकी प्रारंभिक बोली 2383100 रहेगी। अनारक्षित वर्ग के लिए जो दुकान दी जाना है उसकी प्रारंभिक बोली 4793800 निर्धारित की गई है। यह दुकान क्रमांक छह है। इसी प्रकार अनारक्षित वर्ग की विधवा को भी एक दुकान देने की योजना है।
इसकी प्रारंभिक बोली 2871700 है। यह दुकान क्रमांक दस है। अनारक्षित वर्ग की अन्य दुकान की बोली 2321200 रखी गई है। इसका दुकान क्रमांक 13 है। इसी प्रकार दुकान क्रमांक 14 की सरकारी बोली 4433700 तय की गई है। यह भी अनारक्षित है। दुकान क्रमांक 16 अनारक्षित है। इसकी बोली 2662900 तय की गई है। निविदा की वैधता अवधि वित्तीय प्रस्ताव खुलने की तिथि से 180 दिन रहेगी।









