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सीवरेज प्रोजेक्ट निगम के गले की हड्डी बना

न समय-सीमा का ध्यान और ना ही गुणवत्ता से काम

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अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। अमृत मिशन 1.0 मिशन के तहत शिप्रा को साफ रखने और शहर को खुले नाले-नालियों से मुक्त के लिए निगम ने 6 नवंबर 2017 को शहर में भूमिगत सीवरेज पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू कराया था। इस काम को दो वर्ष में पूर्ण करना था, लेकिन सात साह होने को आए काम अधूरा तो है, इसमें गुणवत्ता का ध्यान रखा ही नहीं जा रहा है।

अमृत मिशन 1.0 मिशन में तय किया गया था कि ठेका कंपनी नवंबर-2019 तक कंपनी शहर में 413 किमी लंबी पाइपलाइन का नेटवर्क बिछाएगी और सुरासा में ट्रीटमेंट प्लांट बनाएगी। 80 माह गुजर गए लेकिन कंपनी ने अब तक 296 किलोमीटर में ही पाइप लाइन बिछाई है। ट्रीटमेंट प्लांट का काम भी अधूरा है। शहर के अनेक क्षेत्रों पाइप लाइन बिछाने के बाद भी प्रोजेक्ट का उद्देश्य इसलिए भी पूरा नहीं हो रहा है कि लाईनों को आपस में जोड़ा ही नहीं जा सका है। प्रोजेक्ट अधूरा होने के कारण सीवरेज के चैंबर को घरों से जोडऩे का काम शुरू ही नहीं हुआ है।

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इस शर्त का पालन नहीं

पाइप लाइन बिछाने का ठेका देते वक्त एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई थी। इसमें पाइप लाइन बिछाने के बाद सड़कों का निर्माण/मरम्मत सड़क की पूर्व की स्थिति के अनुसार करना होगी। इस शर्त का तो जैसे पालन नहीं हो रहा है। ठेका कंपनी काम में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रख रही है। सड़कों के निर्माण और मरम्मत का दिखावा किया जा रहा है।

कई कारणों का सहारा

प्रोजेक्ट में विलंब के लिए कई कारणों का सहारा लिया गया। प्रोजेक्ट में देरी के लिए नगर निगम के अधिकारियों,ठेका कंपनी ने सर्वे समय पर नहीं होने, पाइपलाइन डिजाइन की मंजूरी देरी मिलने, जनहित याचिका,कोविड और चुनावों को आधार बनाकर काम की अवधि में लगतार वृद्धि की जाती रही। लापरवाही का आरोप लगने और काम के लिए दबाव सामने आने पर नगर निगम ने केवल पेनल्टी लगाई। किसी भी अफसर ने ठेका निलंबित करने की हिम्मत नहीं दिखाई।

जल्द बैठक कर हल खोजेंगे

महापौर मुकेश टटवाल का कहना है कि यह सही है कि कतिपय कारण बताकर प्रोजेक्ट में देरी की जा रही है। नगर निगम स्तर पर उचित तरीके से सुपरविजन नहीं होने के साथ ठेका कंपनी की लापरवाही से प्रोजेक्ट में अनावश्यक देरी हो रही है। इस संबंध में उच्च स्तर पर चर्चा के बाद जल्द ही अधिकारियों की बैठक कर प्रोजेक्ट की दिक्कतों का निराकरण किया जाएगा। इधर नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक इस मसले में प्रतिक्रिया के लिए उपलब्ध नहीं हुए।

नोटिस-पेनल्टी के बीच झूल रहा प्रोजेक्ट

सीवरेज प्रोजेक्ट कार्य 7 बार समय अवधि पूरा होने के बाद भी पूरा नहीं हो पा रहा है। प्रोजेक्ट टाटा कंपनी और नगर निगम के बीच झूल रहा है। वहीं कंसल्टेंट एजेंसी द्वारा साइट क्लियर नहीं होने का हवाला देकर काम रोक दिया था। बता दें कि 1 फरवरी 2024 को कलेक्टर द्वार कंपनी को निर्देशित किया था कि एक किलोमीटर सीवरेज लाइन मेनहोल, आईसी सहित विशेष 43 किलोमीटर सीवरेज नेटवर्क के कार्य को करते हुए 30 जून तक पूरा करना था। इसके बाद भी काम अधूरा है।

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