हरसिद्धि मंदिर में 9 युवाओं की नियुक्ति सवालों के घेरे में

कब तक काम करेंगे नियुक्ति पत्र में नहीं लिखा नियोक्ता ने
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कर्मचारियों की इस नियुक्ति से हरसिद्धि मंदिर समिति अचरज में
अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। हरसिद्धि मंदिर में सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने पूरे प्रबंध किए हैं। पुलिस विभाग द्वारा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर नियुक्त किए गए नौ लोगों का मामला सुर्खियों में है। मंदिर प्रशासक के निर्णय का विरोध शुरू हो गया है। नियुक्तियों की खास बात यह है कि समय सीमा भी नहीं बताई गई है।
गौरतलब है कि प्रशासन ने शहर के प्रमुख मंदिरों की व्यवस्था के लिए प्रशासक नियुक्त किए गए हैं। इन अधिकारियों का काम यह है कि वे मंदिर की संपूर्ण व्यवस्था के साथ बजट और चढ़ोत्री का भी ध्यान रखेंगे। मंदिर में होने वाले उत्सव और धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था में मंदिर प्रबंध समिति को सहयोग देंगे। प्रशासन ने राधेश्याम पाटीदार, अपर तहसीलदार को हरसिद्धि मंदिर का प्रशासक नियुक्त किया है। इन साहब ने समिति को विश्वास में लिए बिना ही नौ लोगों को नियुक्ति दे दी। इनमें एक ड््रायवर भी शामिल है।
कोई मनमानी नहीं की- पाटीदार
हरसिद्धि में की गई नौ लोगों की नियुक्ति के मामले में अपर तहसीदार राधेश्याम पाटीदार ने अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि जरूरत के हिसाब से कर्मचारी रखे गए हैं। ये कोई स्थायी नहीं हैं। स्थायी नहीं हैं तो समयावधि का उल्लेख क्यों नहीं किया गया? उनका कहना है कि यह कोई जरूरी नहीं है। एजेंसी के कर्मचारी रखने से मंदिर समिति को ज्यादा राशि खर्च करना पड़ रही थी। हमने कम बजट में ज्यादा कर्मचारी रखे हैं।
वेतन 5 और 9 हजार
मंदिर में जो कर्मचारी रखे गए हैं उनका वेतन पांच से लेकर आठ हजार तक निर्धारित किया गया है। इन कर्मचारियों में वे लोग भी शामिल हैं जो पूर्व में यहां नि:शुल्क काम कर रहे थे। सूत्रों का कहना है कि इनमें से एक की विदाई भी हो चुकी है।
पाटीदार ने तो यह भी बताया
पाटीदार ने बताया कि मंदिर में लगने वाली दीपमालिका को लेकर किसी ने आवाज नहीं उठाई। कितनी दीपमालिका लगी और कितनी राशि आई इस पर भी सवाल खड़े होते हैं। मंदिर के सामने लगी दुकानों का किराया कई महीनों से बाकी था। सवाल यह है कि इसकी समय पर वसूली क्यों नहीं हुई। हमने प्रत्येक दुकानदार से वसूली की।
कर्मचारियों को नियुक्त क्यों किया: चौबे
मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष शिवनारायण चौबे का कहना है कि यह सरासर मनमानी है। जब प्रशासन ने सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है सफाई कर्मचारी दिए हैं तो नई नियुक्तियों की जरूरत क्या है। यह मंदिर समिति के बजट से खिलवाड़ है। अपने अधिकार का दुरुपयोग है। बड़ी बात यह है कि जिन लोगों को नियुक्त किया गया है उसमें समय सीमा का उल्लेख नहीं किया गया है। जिला कलेक्टर को इस पूरे मामले की जांच कराना चाहिए।









