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सनातन पंचायत में युवाओं का पाखंड और चमत्कार पर प्रहार

राष्ट्रीय युवा दिवस पर टॉवर पर लगी पंचायत में उठे ज्वलंत मुद्दे

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सवाल – कोई पर्ची वाला बाबा बना है तो कोई झूठे चमत्कार दिखा रहा

 

जबाव- ये राजनीतिक हथकंडे हैं, असली धर्म तो केवल विचारों की शुद्धता

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। स्वामी विवेकानंद जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस पर शहर मेें युवाओं ने संतों के समक्ष पाखंड और चमत्कार की राजनीति के सवाल उठाए। संत ने भी विवेकपूर्ण जबावों से युवाओं की शंका का समाधान किया। सोमवार शाम को टॉवर चौक पर स्वर्णिम भारत मंच ने सनातन पंचायत लगाई जिसमें मौजूद युवाओं ने संतों से सीधे सवाल किए। पंचायत में धर्म की आड़ में पाखंड, चमत्कार और राजनीति करने वाले कथित धर्माचार्यों पर कई सवाल उठे और सही धर्म का मर्म जानने की जिज्ञासा जाहिर की।

महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद गिरी ध्यानश्री, महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज, आचार्य अखिलेश जी महाराज, स्वामी अनुभवानंद जी (रामकृष्ण मिशन) ने युवाओं के सवालों का जबाव दिए। संतों ने युवाओं से सहमति जताते हुए समाज में फैल रहे पाखंड पर कड़ा प्रहार किया। संतों ने कहा आज कई लोगों ने धर्म को केवल एक आवरण बना लिया है। कोई पर्ची वाला बाबा बन रहा है, तो कोई झूठे चमत्कारों की व्याख्या कर रहा है।

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ये धर्म नहीं, बल्कि राजनीति करने के हथकंडे हैं। वास्तविक धर्म तो केवल विचारों की शुद्धता और उच्चता से ही स्थापित होता है। धर्म का अर्थ केवल धूप-दीप और पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। धर्म एक अत्यंत व्यापक क्षेत्र है, जिसमें राष्ट्र की सामरिक, सुरक्षा और आर्थिक नीतियां समाहित हैं। हमारा वैदिक वांग्मय वह पूर्ण ज्ञान है, जिसके आधार पर भारत बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के पुन: विश्व गुरु की पदवी प्राप्त कर सकता है।

इन ज्वलंत मुद्दों पर भी हुई चर्चा
स्वर्णिम भारत मंच के अध्यक्ष दिनेश श्रीवास्तव ने बताया कि पंचायत में मुख्य रूप से धर्मांतरण, घर वापसी, युवाओं में बढ़ता नशा और लव जिहाद जैसे मुद्दों पर खुली चर्चा हुई।

पंचायत में उठे युवाओं के तीखे सवाल

सनातन पंचायत की सबसे बड़ी विशेषता युवाओं और संतों के बीच हुआ सीधा संवाद रहा। युवाओं ने संतों से कई साहसी प्रश्न पूछे

 क्या हिंदुओं का इस्तेमाल केवल वोट बैंक के लिए किया जा रहा है?

लव जिहाद जैसे गंभीर विषयों पर संत समाज मुखर क्यों नहीं होता?

धार्मिक स्थलों (मंदिर-मस्जिद) के लिए सरकारी तंत्र के नियम अलग-अलग क्यों हैं?

जब युवा भटकता है, तो संत मार्गदर्शन के लिए सड़कों पर क्यों नहीं उतरते?

कार्यक्रम में युवाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। वरिष्ठ चित्रकार स्वर्गीय ओपी भटनागर की स्मृति में प्रतिभाओं को पुरस्कृत भी किया गया।

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