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लघुकथा :मुझसे बढ़कर कौन ?
एक रेस्टोरेंट में अम्फान और निसर्ग बैठे आपस में बातें कर रहे थे। अम्फान ने निसर्ग से पूछा- ‘तुमने कितने…
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लघुकथा :मुझसे बढ़कर कौन ?
एक रेस्टोरेंट में अम्फान और निसर्ग बैठे आपस में बातें कर रहे थे। अम्फान ने निसर्ग से पूछा- ‘तुमने कितने…
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देश पे वारा
सरहद के प्रहरी ने अपने, प्राणों को देश पे वारा। चाहे दिन हो चाहे रात, हर पल अपना देश पे…
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देश पे वारा
सरहद के प्रहरी ने अपने, प्राणों को देश पे वारा। चाहे दिन हो चाहे रात, हर पल अपना देश पे…
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गजल… कांच के घर है
हाथों में जिन- जिनके आज पत्थर है सोच ले सौ बार उनके कांच के घर है सांप का काटा तो…
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गजल… कांच के घर है
हाथों में जिन- जिनके आज पत्थर है सोच ले सौ बार उनके कांच के घर है सांप का काटा तो…
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गजल… दुनियादारी से जुदा
कर ना पाये कुछ हम दुनियादारी से जुदा आसां कब था होना दुनिया सारी से जुदा पग पग पर समझौते…
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गजल… दुनियादारी से जुदा
कर ना पाये कुछ हम दुनियादारी से जुदा आसां कब था होना दुनिया सारी से जुदा पग पग पर समझौते…
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लघुकथा :मोल-भाव
‘आम कैसे दिए?’घर के बाहर बैठी आम वाली से मैंने पूछा पूछा। ’60 रुपये किलो।’उसने बताया। 60 रुपये देकर 1…
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लघुकथा :मोल-भाव
‘आम कैसे दिए?’घर के बाहर बैठी आम वाली से मैंने पूछा पूछा। ’60 रुपये किलो।’उसने बताया। 60 रुपये देकर 1…