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उज्जैन में भी 7 बच्चों की आंखें डेमेज कर चुकी है कार्बाइड गन

सोशल मीडिया पर रही थी सुर्खियों मे

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पूरे प्रदेश में बैन लगा, आम्र्स एक्ट में दर्ज होगा मुकदमा

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। प्रदेश भर में करीब 300 से अधिक बच्चों की आंखों को नुकसान पहुंचा चुकी कार्बाइड गन उज्जैन में भी 7 बच्चों की आंखों को डेमेज कर चुकी हैं।
कार्बाइड गन एक खतरनाक जुगाड़ बंदूक है जो प्लास्टिक पाइप की बनी होती है और बाइक साइलेंसर के समान दिखती है। दीपावली से पहले शहर के कुछ चौराहों खासकर आगर रोड खिलचीपुर नाका पर 100 से 200 रुपए में खूब बिकी थी। सोशल मीडिया और रिल्स पर इस बंदूक के बढ़ते चलन के बाद बच्चों में इसका क्रेज बढ़ा। शहर के निजी अस्पतालों में कार्बाइड गन से आंखे खराब होने के 7 गंभीर मामले तो एक ही नेत्र चिकित्सक डॉ. पराग शर्मा के पास पहुंचे हैं। इसके अलावा अगर पूरे जिले की बात की जाए तो हो सकता है आंकड़े चौकाने वाले निकले।

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कार्निया बदलना ही विकल्प
कार्निया खराब होने पर रिपेयर नहीं होता। इसे बदलना ही विकल्प होता है। इसके लिए कार्निया हासिल करना होता है। अमूमन यह बड़ी मुश्किल से होता है। आमतौर पर जागरूक लोग कार्निया दान करने में रुचि रखते हैं। देहदान के दौरान भी कार्निया मिल जाता है। ब्रेन डेड कंडीशन में भी लोग कार्निया दान करते हैं।

आंखों के लिए खतरनाक क्यों

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  1. प्लास्टिक के पाइप को जुगाड़ से जोड़कर गैस लाइटर अटेच कर कार्बाइड गन बनाई जाती है। इसमें पानी में भीगा कैल्सियम कार्बाइड डाल कर हिलाते हैं जिससे गैस बनती है बाद में गैस लाइटर से चिंगारी पैदा करते। इससे गैस में विस्फोट होता है। इसी दौरान अगर गैस अधिक बन जाए तो विस्फोट के वक्त प्लास्टिक पाइप फूट कर हाथ, चेहरा, आंख को झुलसा सकता है। दीपावली के दो दिन पहले पीपलीनाका इलाके में एक बच्चा ऐसे ही हादसे का शिकार होकर आंखों को नुकसान पहुंचा चुका है।

2.गन से विस्फोट होने पर कैल्सियम कार्बाइड गैस निकलती है जो आंखों के कार्निया को झुलसा देती है। डेमेज कार्निया का इलाज नहीं है। उसे दूसरे के नेत्रदान के बाद बदला जा सकता है। इससे आंखों की ज्योति चली जाती है

घर में गन है तो नष्ट कर दो, पुलिस ने पकड़ी तो जमानत भी नही मिलेगी: कार्बाइड गन पर मध्यप्रदेश सरकार ने पाबंदी लगा दी है। इसे बनाने, बेचने और खरीदने वालों पर आम्र्स एक्ट में मुकदमा दर्ज होगा। इसे घातक विस्फोटक यंत्र घोषित कर दिया है। सीएम डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद शुक्रवार को मुख्य सचिव अनुराग जैन ने पाबंदी के निर्देश जारी किए हैं। निर्देश के मुताबिक कार्बाइड गन को अब प्रतिबंधित घातक विस्फोटक यंत्र माना जाएगा। बेचने-खरीदने वालों के खिलाफ आम्र्स एक्ट 1959, विस्फोटक अधिनियम 1884 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 के तहत केस दर्ज होगा। अब इसे रखना गैर जमानती अपराध होगा और पुलिस तुरंत गिरफ्तारी कर सकती है।

शहर में ये दर्ज हुए केस

अंबर कॉलोनी निवासी 12 साल के ऋषभ जायसवाल- एक आंख प्रभावित।

समर्थ अजमेरा आगर रोड, आंख नहीं खुल रही।

गब्बर पटेल – धुआं आंखों में लगा, दो दिन से आंखें नहीं खुल रही

कैल्शियम कार्बाइड से जलने के सात मामले आए थे। शुरुआत में आए चार केस में स्थिति काफी खराब थी, इसलिए इंदौर रेफर किया था। बाद के तीन केस देखे हैं। इनमें कार्निया को काफी नुकसान हुआ है। करीब 50 से 60 फीसदी झुलसने से दृष्टि बाधित हुई है। चूंकि कैल्शियम कार्बाइड के मामले पहली बार सामने आए हैं, ऐसे में नेत्र विशेषज्ञों की संस्था ऐसे मामलों में उपचार के बारे में नए सिरे से विचार करेगी।
डॉ. पराग शर्मा
नेत्र रोग विशेषज्ञ

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