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16 आरोपियों पर केस और 12 की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस नहीं बता पाई कितने रुपए का हुआ घोटाला

मामला : महाकाल मंदिर में दर्शनों के नाम पर लोगों से रुपए ठगने का

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जांच अधिकारी से लेकर सीएसपी तक कर रहे जांच

अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। कलेक्टर नीरजसिंह ने नंदी हॉल में दर्शनों के लिए अनाधिकृत रूप से पंडे, पुजारियों को रुपए देकर पहुंचे लोगों को पकड़ा। जांच कराई तो पता चला मंदिर में एक-दो कर्मचारी नहीं बल्कि पूरा रैकेट काम कर रहा है जो लोगों से रुपए लेकर दर्शनों की सुविधा प्रदान करता है।

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मंदिर के सहायक प्रशासक की तरफ से महाकाल थाने में दो एफआईआर दर्ज कराई गई। पहली एफआईआर के आरोपी पुजारी, सेवादार को गिरफ्तार किया। दूसरी एफआईआर में पहले दो लोगों को आरोपी बनाया फिर 4 को, बाद में आरोपियों की संख्या बढ़ गई। खास बात यह कि पुलिस द्वारा अब तक 16 कर्मचारियों पर केस दर्ज कर 12 की गिरफ्तारी हुई है लेकिन आज तक पुलिस यह नहीं बता पाई कि किस प्रकार रैकेट काम कर रहा था और कितनी राशि की रिकवरी हुई है। पुलिस ने उमेश पंड्या और करण राठौर को भी गिरफ्तार कर लिया।

ऐसे बढ़ते चले गए आरोपियों के नाम

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सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल की रिपोर्ट पर महाकाल थाना पुलिस ने सबसे पहले नंदी हॉल प्रभारी राकेश श्रीवास्तव, सफाई निरीक्षक विनोद चौकसे के खिलाफ धोखाधड़ी व अमानत में खयानत की एफआईआर दर्ज हुई। मामले में दोनों आरोपियों से पूछताछ व रिमांड के बाद पुलिस ने मंदिर समिति के 4 कर्मचारी आईटी शाखा प्रभारी राजकुमार सिंह, जिला प्रोटोकॉल प्रभारी अभिषेक भार्गव, सभा मंडप प्रभारी राजेन्द्र सिंह सिसौदिया, भस्म आरती प्रभारी रितेश शर्मा के साथ ही क्रिस्टल कंपनी के सुपरवाइजर ओमप्रकाश माली व जीतेंद्र पंवार के खिलाफ केस दर्ज किया। इनमें रितेश शर्मा फरार हुआ जो खुद सरेंडर हुआ।

पुलिस इतनी चुप क्यों है?

रितेश शर्मा के थाने में पेश होने और रिमांड पर पूछताछ के बाद पुलिस ने इसी मामले में पांच लोगों भस्म आरती प्रभारी उमेश पांडे, क्रिस्टल कंपनी के सुपरवाइजर करण राजपूत, मीडियाकर्मी विजेंद्र यादव, पंकज शर्मा को आरोपी बनाया। इस प्रकार अब तक पुलिस कुल 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर चुकी है।

11 की गिरफ्तारी हो गई लेकिन मामले के जांच अधिकारी जीतेंद्र झाला, थाना प्रभारी नरेंद्र सिंह परिहार, सीएसपी ओमप्रकाश मिश्रा अब तक यह नहीं बता पाए कि किस आरोपी का रैकेट में क्या रोल था। किस प्रकार दर्शनों के नाम पर रैकेट काम करता था। अब तक गिरफ्तार हुए आरोपियों से पुलिस ने कितने रुपए जब्त किए, उनकी प्रापर्टी कितनी है। रैकेट कब से सक्रिय था और अब तक कितने रुपयों का गबन किया गया है।

इनका कहना

मामले की जांच जारी है। आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ के बाद लोगों की संख्या बढ़ रही है। गिरफ्तार हुए आरोपी नई कहानी बता रहे हैं। सभी से पूछताछ के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। – प्रदीप शर्मा, पुलिस अधीक्षक

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