गंभीर डेम में चैनल कटिंग की तैयारी इंदौर के यशवंत सागर से उम्मीद बंधी

गंभीर डेम को नर्मदा से जोडऩे के लिए अफसरों को भेजे पत्र
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। गंभीर डेम का पानी खाली होने के बाद पीएचई ने चैनल कटिंग द्वारा आसपास के पानी को बीच में लाने की तैयारी शुरू कर दी है, क्योंकि डेम में 190 एमसीएफटी पानी ही बचा है। हालांकि इंदौर के यशवंत सागर डेम में पानी भरने से उम्मीद बंधी है कि गंभीर डेम भी भर जाएगा, लेकिन अच्छी बारिश होने पर ही यह निर्भर है। इस बीच पीएचई ने डेम को नर्मदा से जोडऩे के लिए अफसरों को पत्र भेज दिए हैं।
गंभीर डेम में अब करीब 20 दिनों की सप्लाई का पानी बचा है। पिछले दिनों हुई बारिश के कारण डेम से खपत रुकी है, लेकिन पेयजल को लेकर चिंता बनी हुई है। इसके लिए चैनल कटिंग द्वारा डेड स्टोरेज का पानी उपयोग में लिया जाएगा। चैनल कटिंग कर डेम में जगह-जगह पानी को एकत्रित कर फिल्टर कर सप्लाई किया जाएगा।
हालांकि इंदौर के यशवंत सागर में 11 एमसीएफटी से अधिक पानी भरने से उम्मीद बनी हुई है कि एक बार वह पूरी तरह भराया तो गंभीर डेम का लेवल भी बढ़ सकता है। यशवंत सागर का लेवल 11.95 एमसीएफटी है। यह 19 एमसीएफटी भर जाने के बाद गंभीर में पानी छोड़ा जा सकेगा। जलकार्य समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा ने बताया कि चैनल कटिंग से पानी एकत्रित करने के लिए टेंडर भी हो चुके हैं। जल्दी ही काम शुरू हो जाएगा। शहरवासियों को पानी की तकलीफ नहीं होने देंगे।
इधर, नर्मदा से डेम जोडऩे की तैयारी
गंभीर डेम को लालपुल के पास नर्मदा नदी से जोडऩे के लिए पीएचई ने कलेक्टर रौशनकुमार सिंह और नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक को पत्र लिखे हैं। पत्र में कहा गया है कि दो साल पहले शुरू की गई योजना का काफी काम हो चुका है और लाइन को लालपुल के पास जोड़ा जाना बाकी है। जल संसाधन विभाग से इसकी अनुमति नहीं मिल रही। यह अनुमति मिलने पर नर्मदा नदी को गंभीर डेम से जोड़ दिया जाएगा, जिससे जलसंकट की स्थिति में पाइपलाइन द्वारा नर्मदा का पानी सीधे डेम तक पहुंचाया जा सकेगा। जल कार्य समिति प्रभारी शर्मा ने पत्र लिखे जाने की पुष्टि की है।
61 दिन में 16 इंच वर्षा 20 की दरकार, पिछले साल से थोड़ा पीछे
आधिकारिक रूप से वर्षा काल 122 दिन यानी 1 जून से ३० सितंबर तक रहता है। आधा समय यानी 31 जुलाई तक 61 दिन गुजर चुके हैं। इस दौरान उज्जैन शहर मेें 400.2 (करीब 16 इंच) और जिले में 357.2 मिमी (करीब साढ़े 14 इंच) औसत वर्षा हो चुकी है। जबकि पिछले साल जिले में 31 जुलाई तक 435.6 मिमी (साढ़े 17 इंच) बारिश हो चुकी थी।
मौसम विभाग का मानना है कि वर्षाकाल में पिछले पांच से अधिक सालों से औसत से अधिक वर्षा हो रही है। अभी भारी बारिश तो हुई ही नहीं है। शेष दिनों में जिले में औसत से अधिक बारिश होने की पूरी संभावना है। वेधशाला प्रभारी डॉ. गुप्त का कहना है कि जिले में पूरे वर्षाकाल में औसत 900 मिमी (36 इंच) बारिश होती है। इस सीजन में भी औसत से अधिक बारिश होने की पूरी उम्मीद है।
आगे क्या… मौसम विभाग के अनुसार अगले 2-3 दिन हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा। इसके बाद अगले दो हफ्ते मानसून सामान्य से रहने के आसार हैं।