सर्वपितृ अमावस्या पर करें इन सिद्ध मंत्रों का जाप

सर्वपितृ अमावस्या, जिसे मातृ पक्ष अमावस्या या पितृ अमावस्या भी कहा जाता है। यह दिन पितरों की आत्मा की शांति और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए समर्पित होता है। सनातन धर्म में मान्यता है कि इस दिन किए गए पिंडदान, तर्पण, और श्राद्ध कर्म से पितर की आत्मा को मोक्ष मिलता है। परिवार में सुख, समृद्धि, और खुशहाली बनी रहती है। 16 दिनों तक चलने वाले इस पितृ पक्ष में जो आखिरी दिन होता है उसे सर्वपितृ अमावस्या कहते हैं। इस साल यह दिन 21 सितंबर को पड़ रहा है। यहां कुछ ऐसे मंत्र दिए गए हैं जिनका जाप आप सर्वपितृ अमावस्या के दिन कर सकते हैं।
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1. पितृ गायत्री मंत्र
ॐ आद्य-भूताय विद्महे,
सर्व-पितृ देवाय धीमहि,
तन्नो पितृ प्रचोदयात्।
2. पितृ शांति मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
पितृभ्यो नमो नमः।
पितृ शांतिर्भवतु।
3. पितृ स्तुति मंत्र
ॐ नमो भगवते नमः।
पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
4. भगवान विष्णु का मंत्र
चूंकि भगवान विष्णु को पितरों का अधिपति माना जाता है, उनके मंत्र का जाप भी बहुत फलदायी होता है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
मंत्र जाप की विधि
– सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
– किसी पवित्र नदी के किनारे या घर पर ही जल में काला तिल मिलाकर पितरों को तर्पण करें।
– तर्पण के बाद, रुद्राक्ष की माला से ऊपर दिए गए मंत्रों में से किसी एक का 108 बार जाप करें।
– जाप के बाद, किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें।









