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साल के पहले दिन भोपाल जाने वाली चार्टर्ड अचानक कैंसिल, यात्री परेशान

कुछ यात्री घर से निकल चुके थे और कुछ चार्टर्ड के ऑफिस पहुंचे

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परमिट का नवीनीकरण नहीं हुआ, जिम्मेदार कौन

अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। बेहतर सुविधाओं का दावा करने वाली चार्टर्ड बस की सर्विस अब यात्रियों के लिए मुसीबत बन गई है। यह बसें कभी भी खराब हो जाती हैं और इनकी सेवाएं कभी भी रद्द कर दी जाती हैं। नए साल के पहले दिन ही चार्टर्ड ने भोपाल जाने वाली अपनी सेवा अचानक रद्द कर दी। इसकी वजह से यात्राी परेशानी झेलते रहे। उन्हें वैकल्पिक सुविधा भी नहीं मिली।

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प्रदेश के प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए चार्टर्ड सर्विस शुरू की गई थी। प्रीमियम श्रेणी की इस सेवा को शुरू करते समय दावा किया गया था कि यात्रियों को बेहतरीन सेवा उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें समय की पाबंदी सबसे महत्वपूर्ण थी। अपने दावे के अनुरूप शुरूआती सालों में चार्टर्ड सेवा ठीक से चली। एक दौर में इसने ट्रेनों की एसी श्रेणी के लिए संकट खड़ा कर दिया। लेकिन अब यह पटरी से उतर गई है।

आए दिन बसें खराब हो जाती हैं और कई मर्तबा इन्हें निरस्त कर दिया जाता है। ऐसा ही कुछ मामला बुधवार को पेश आया जब सुबह दस बजे भोपाल जाने वाली चार्टर्ड को निरस्त कर दिया गया। यात्रियों को इसकी जानकारी सुबह दस बजे दी गई। इस समय बहुत से यात्री बसों के कार्यालय पहुंंच चुके थे या वे घरों से निकल चुके थे।

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ऐसे ही एक यात्री के परिजन इंदिरा नगर निवासी नीरज थोरात ने बताया कि वह अपनी सासू मां, पत्नी और बेटी को छोड़ने के लिए निकल चुके थे। दस बजे उन्हेें चार्टर्ड कार्यालय से सेवा निरस्त होने की जानकारी दी गई। तब तक वे परिवार सहित चामुंडा माता चौराहे तक पहुंच गए थे।

स्टॉफ का कहना था कि तकनीकी खामी के कारण बस नहीं जाएगी। आपकी राशि सात दिन में ऑन लाइन रिफंड कर दिया जाएगा। कस्टमर केयर पर आधे घंटे तक फोन ही नहीं उठाया। प्रभारी जयंत शर्मा ने फोन उठाया लेकिन माकूल जवाब नहीं दिया। इस सबंध में अक्षर विश्व ने भी जयंत से बात करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो सकी।

चार्टर्ड के उज्जैन के ब्रांच इंचार्ज रजीजुद्दीन अंसारी ने बताया कि बसों के परमिट ३१ दिसंबर तक होते हैं। इसके बाद नवीनीकरण कराना अनिवार्य होता है। अवकाश के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसलिए प्रदेश में जो गाड़ी जहां खड़ी थी, वहीं खड़ी रही। परमिट नवीनीकरण के बाद गाड़ियों का संचालन शुरू होगा। सवाल यह है कि इसका जिम्मेदार कौन है? समय पर कंपनी के अधिकारियों ने नवीनीकरण क्यों नहीं कराया।

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