पहला दूध उत्पादक राज्य बनाने के लिए डेयरी विशेषज्ञ कर रहे चिंतन

विक्रम विश्वविद्यालय में दो दिनी डेयरी विकास की संभावनाएं और चुनौतियों विषय पर वेस्ट जोन की संगोष्ठी
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन।मध्यप्रदेश को भारत का पहला दूध उत्पादक राज्य बनाने के लिए डेयरी क्षेत्र के विशेषज्ञ विक्रम विश्वविद्यालय के स्वर्णजयंती सभागृह में चिंतन कर रहे हैं।। इंडियन डेयरी एसोसिएशन वेस्ट जोन और विक्रम विश्वविद्यालय के संयोजन में हो रही डेयरी विकास की संभावनाएं और चुनौतियां संगोष्ठी में आए एक्सपर्ट से अक्षर विश्व ने बात की और उनसे मध्यप्रदेश में डेयरी विकास के मुद्दों पर चर्चा की।
इंडियन डेयरी एसोसिएशन वेस्टजोन के अध्यक्ष जेबी प्रजापति के मुताबिक मध्यप्रदेश में डेयरी उद्योग की प्रबल संभावना है। मध्यप्रदेश देश का तीसरा दूध उत्पादक राज्य है। भारत में जहां प्रति व्यक्ति दूध की खपत ४७१ ग्राम है तो मध्यप्रदेश में यह ६७३ ग्राम है। दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाने और ग्राहकों को उच्च क्वालिटी के डेयरी प्रोडक्ट उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने एनडीडीबी के साथ अनुबंध किया है। इसके तहत प्रदेश के छह दुग्ध संघ का संचालन अब एनडीडीबी कर रहा है। उसका फोकस विश्व स्तर के डेयरी प्रोडक्ट तैयार करने पर है। अच्छी क्वालिटी और ज्यादा दूध उत्पादन की जानकारी देने के लिए दो दिनी संगोष्ठी आयोजित की गई है। इसमें एक्सपर्ट, पशुओं की उन्नत नस्ल, सरकार की प्रोत्साहन नीतियों, डेयरी उद्योग में प्रयुक्त होने वाले नए और आधुनिक उपकरणों की जानकारी दूध उत्पादकों के साथ साझा करेंगे।
डेयरी प्रोडक्ट के सेवन पर भ्रम: प्रजापति ने बताया कि डेयरी प्रोडक्ट के सेवन से सेहत खराब होने का भ्र्रम इन दिनों फैलाया जा रहा है। वीगन और सोया प्रोडक्ट को बढ़ावा देने वाले यह भ्रम फैला रहे हैं। वास्तविकता यह है कि डेयरी प्रोडक्ट सेहत के लिए फायदेमंद हैं। यह ना तो मोटापा बढ़ाते हैं, ना डायबिटीज और ना ही हाइपर टेंशन। चेन्नई के वैज्ञानिक डॉक्टर वी मोहन अपने प्रयोगों से डेयरी प्रोडक्ट के फायदे साबित कर चुके हैं। शनिवार को तीन विशेषज्ञ डेयरी प्रोडक्ट के फायदे और फैलाए जा रहे भ्रम पर अपनी बात रखेंगे।
मध्यप्रदेश में 35 फीसदी दूध की प्रोसेसिंग हो पा रही है। यहां मिडिलमैन फायदा उठा रहे हैं। हमारी फाइट ग्राहक को क्वालिटी प्रोडक्ट देने की है। इसके लिए हमें बेहतरीन क्वालिटी के मिल्क की जरूरत है। उज्जैन और मध्यप्रदेश दूध उत्पादन की खान है। भारत में दूध उत्पादन में तीसरी पोजिशन रखने वाले मध्यप्रदेश में प्रसंस्करण की काफी संभावना है। दो दिन हम इस पर ही विचार करेंगे।
डॉ. जेवी पारख, डेयरी फूड स्पेशलिस्ट
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
15 साल पहले इंदौर, उज्जैन मुंबई के मिल्क फीड मार्केट थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। यहां प्रोडक्शन कम हो रहा है। इसकी वजह डेयरी क्षेत्र का असंगठित होना है। दो दिवसीय सेमिनार में हम फार्मर को एजुकेट करेंगे, उन्हें मिल्क प्रोडक्शन बढ़ाने के तरीके बताएंगे।
माधव पटगांवकर सचिव, आईडीए
मालवा अंचल के 250 उत्पादकों को बुलाया गया है। उन्हें दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, अच्छी नस्ल के एनीमल रखने, अच्छी क्वालिटी का दूध उत्पादन करने के तरीके एक्सपर्ट बताएंगे।
श्रीनंदन शर्मा एमडी पेराडिज्म कंसल्टेंट।
मध्यप्रदेश में एनडीडीबी के सामने दो चुनौती है। पहला दुग्ध उत्पादकों को समय पर पेमेंट और दूसरा प्राइवेट प्लेयर। पहले पेमेंट 13 दिन में होता था, इसे घटाकर अब पांच दिन कर दिया है। प्राइवेट प्लेयर को बाहर करने के लिए पांच साल में प्रदेश के 26 हजार गांवों तक दूध कलेक्शन करने का लक्ष्य रखा गया है। धर्मराज खत्री सीईओ उज्जैन दुग्ध संघ
25 साल बाद मध्यप्रदेश में डेयरी कॉलेज खुल रहा है। मध्यप्रदेश सरकार डेयरी विकास पर बड़ा काम कर रही है। 2600 करोड़ का प्रोविजन सरकार ने किया है। अभी मध्यप्रदेश में डेयरी प्लांट का संचालन बाहर के लोग कर रहे हैं। कॉलेज खुलने से उज्जैन में मैनपावर तैयार होगा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने दुग्ध संघ परिसर में कॉलेज खोलने की मंजूरी दी। यह बड़ी उपलब्धि है।
डॉ. सुधीर उप्रित डीन डेयरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉलेज रायपुर










