उज्जैन-इंदौर मेट्रो की डीपीआर तैयार, 10 हजार करोड़ का खर्च

डीएमआरसी ने भोपाल में दिया पे्रजेंटेशन, हालांकि सिंहस्थ के पहले प्रोजेक्ट पूरा होने मेें संशय

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। उज्जैन से इंदौर की मेट्रो के लिए डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) सरकार के पास आ गई है। करीब 45 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। डीपीआर की स्टॅडी पहले सीएम डॉ. मोहन यादव करेंगे इसके बाद उसे मंजूरी के लिए कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा।
हालांकि मेट्रो से जुड़े अफसर का कहना है कि इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में कम से कम 3 साल लगेंगे। ऐसे में यह सिंहस्थ से पहले शुरू नहीं हो सकता। पिछले दिनों दिल्ली मेट्रो ने उज्जैन और इंदौर शहरों की फिजिबिलिटी स्टडी रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें इसे मेट्रो के लिए अच्छा बताया था। इसके बाद डीपीआर तैयार की गई। इस प्रोजेक्ट में करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
11 स्टेशन का प्रस्ताव पौन घंटे का सफर
इंदौर-उज्जैन के बीच सडक़ मार्ग की दूरी करीब 55 किमी है। इसके आसपास से ही मेट्रो गुजर सकती है। यह रोड पहले से ही सिक्स लेन किया जा रहा है। वहीं, यहां पर ज्यादा भू-अर्जन भी नहीं करना पड़ेगा। डीपीआर में बताया गया है कि का लगभग 45 किमी लंबे ट्रैक में 11 स्टेशन बनेंगे। 4.5 किमी का ट्रैक उज्जैन शहर में अंडर ग्राउंड रखने का प्रस्ताव है। मेट्रो इंदौर के लवकुश नगर से शुरू होकर उज्जैन रेलवे स्टेशन पर समाप्त होगी। इसके बीच भौंरासला, बारोली, धरमपुरी, तराना, सांवेर, पंथपिपलई, निनोरा, त्रिवेणी घाट, नानाखेड़ा, उज्जैन आईएसबीटी, उज्जैन रेलवे स्टेशन पर मेट्रो स्टेशन बनेंगे। उज्जैन में मेट्रो को कहां से अंडरग्राउंड किया जाना है, इस पर निर्णय होना है।
मात्र 50 मिनट में इंदौर से पहुंचेगी उज्जैन
मेट्रो चलने से इंदौर-उज्जैन के बीच सफर में समय कम लगेगा और महाकाल मंदिर तक पहुंचने में दर्शनार्थियों को आसानी होगी। उज्जैन पहुंचने का समय लगभग आधा रह जाएगा। अभी बस से करीब 2 घंटे तो कार से करीब डेढ़ घंटा लगता है। दोपहिया से लगभग दो घंटे लगते हैं। मेट्रो 45 से 50 मिनट में लवकुश चौराहा से उज्जैन पहुंचेगी। इंदौर और उज्जैन का करीब 75 प्रतिशत ट्रैफिक सडक़ मार्ग से ही आना-जाना करता है। हजारों लोग इंदौर-उज्जैन में अप-डाउन करते हैं। इससे सडक़ पर ट्रैफिक का दबाव बना रहता है। कई बार हादसे भी हो चुके हैं।
डिपो के लिए सांवेर के पास मांगी जमीन: इंदौर में पहले से मेट्रो का संचालन हो रहा है, इसलिए दूसरे डिपो की जरूरत नहीं होगी। इंदौर के लवकुश चौराहे से उज्जैन तक मेट्रो पहुंचेगी। उज्जैन में डिपो के लिए जमीन तलाश की गई। कुल 49.7 एकड़ सरकारी जमीन उज्जैन के आसपास नहीं मिली। इस वजह से सांवेर के पास रेवती में जमीन मांगी गई।
एलिवेटेड, अंडरग्राउंड रहेगी मेट्रो
मेट्रो कॉर्पोरेशन सूत्रों के अनुसार इंदौर-उज्जैन रोड पर मेट्रो को एलिवेटेड रखा जाएगा। इसके लिए सडक़ के बीच स्थित डिवाइडर पर मेट्रो के पिलर खड़े किए जाएंगे। वहीं, नानाखेड़ा से उज्जैन रेलवे स्टेशन तक मेट्रो अंडरग्राउंड रहेगी। हालांकि, कितने किमी का कितना हिस्सा एलिवेटेड रहेगा और कितना अंडरग्राउंड रहेगा, यह डीपीआर में अभी स्पष्ट नहीं है।
बजट जुटाना आसान नहीं, सिंहस्थ से जुड़े कामों पर फोकस ज्यादा: मेट्रो के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का बजट जुटाना राज्य सरकार के लिए आसान नहीं है। वहीं यह प्रोजेक्ट सिंहस्थ के पहले पूरा नहीं होगा, ऐसे में इस पर रुपए खर्च करना भी समझदारी नहीं है। सरकार के पास पहले सिंहस्थ से जुड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने की प्राथमिकता रहेगी। यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट पर अभी काम शुरू होने की पूरा नहीं होने की उम्मीद कम है।









