12 लाख रुपए के श्रीगणेश, सद्भाव में अनमोल

अक्षरविश्व एक्सक्लूसिव: मैसूर में लकड़ी की कारीगरी से बनी महंगी मूर्तियां आकर्षण

मैसूर से सुधीर नागर| आप ये सुनकर चौंकिए नहीं कि हिंदुओं के आराध्य गणेश जी की लकड़ी की मूर्ति 12 लाख रुपए की है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये मूर्तियां सांप्रदायिक सद्भाव के रूप में भी अनमोल है, क्योंकि धर्म विशेष के लोग इन मूर्तियों को अपने बड़े शो रूम में शान के साथ रखते हैं।
अगर आप मैसूर के जगनमोहन पैलेस या विलास पैलेस को देखने आएं, या वृंदावन गार्डन घूमने जाएं तो कई दुकानें ऐसी मिलेंगी, जहां भगवान गणेश और कृष्ण भगवान की 5 से 8 फीट ऊंची मूर्तियां हैं, जो हिंदुओं को अपनी ओर सम्मोहित करती हैं, किंतु उनकी कीमत सुनकर चौंका देती है। शीशम की लकड़ी पर नक्काशी से बनाई गई इन मूर्तियों की कीमत 15 हजार से लेकर 15 लाख रुपए तक है। वृंदावन गार्डन रोड पर एक फैक्ट्री शॉप में 12 लाख 50 हजार रुपए की गणेश जी की करीब 6 फीट ऊंची मूर्ति है। शॉप संचालक धर्म विशेष के हैं और वे इन मूर्तियों को बड़े करीने से रखते हैं।
ललितामहल में 100 रुपए में चाय या कॉफी
मैसूर का ललितामहल उज्जैन नगर निगम के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। ललितामहल को 1921 में मैसूर के तत्कालीन महाराजा कृष्णराज वोडेयार चतुर्थ ने तत्कालीन भारत के वाइसरॉय को मैसूर यात्रा के दौरान ठहराने के लिए बनाया था। यह लंदन के सेंट पॉल कैथेड्रल की तर्ज पर बना हुआ है।
वर्तमान में यह भारत पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) का होटल है। यहां प्रवेश करने वालों को 100 रुपए का टिकट लेना पड़ता है, जिसमें एक चाय या कॉफी, बिस्किट के साथ मुफ्त पिलाई जाती है। लोग यहां महल में फोटोग्राफी करते हैं, क्योंकि कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। अमिताभ बच्चन की फिल्म मर्द की शूटिंग इसी महल में हुई थी। उज्जैन नगर निगम भी ग्रांड होटल को ललितामहल की तर्ज पर विकसित कर सकता है। प्रवेश के लिए टिकट लागू कर आय के स्रोत बनाए जा सकते हैं।
हस्तशिल्प में बेजोड़ मैसूर
मैसूर में हस्तशिल्प बहुत लोकप्रिय हैं, खास तौर पर जड़ाऊ काम।
मैसूर के रोज़वुड हस्तशिल्प सुंदर और आकर्षक हैं।
भगवान गणेश की मैसूर लकड़ी की जड़ाई कलाकृति राजसी दिखती है।
इसमें इस्तेमाल की गई शीशम की लकड़ी बहुत अनूठी है।
राज्य पुरस्कार विजेता मास्टर शिल्पकार एन कुमार द्वारा भी गणेश जी की मूर्तियां तैयार की गई हैं।









