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किसान बोले- पौधों की ग्रोथ रुकी, पीलापन आया

अफसर बोले- घबराएं नहीं, वैज्ञानिक तरीके अपनाएं

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मानसून के एकाएक गायब होने से खरीफ की फसल पर मंडराने लगे संकट के बादल, किसान चिंतित

धुआंधार तरीके से बरसात करने वाले मानसून के एकाएक गायब होने से खरीफ की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। किसान बारिश की लंबी खेंच से चिंतित है, हालंाकि कृषि विभाग के अफसर लंबे ड्राई स्पेल की स्थिति तो मानते हैं लेकिन वे फसलों में नुकसान की स्थिति फिलहाल नहीं देख रहे हैं।

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सुमित सोलंकी उज्जैन। उज्जैन में खरीफ फसल में मुख्यत: सोयाबीन, मक्का, उड़द,, मूंग और मूंगफली की बोवनी की जाती है। आषाढ़ की शुरुआत में मानसून ने जिले में अच्छी एंट्री ली थी और जमकर बरसा भी था लेकिन पिछले 10 दिन से बारिश गायब है। मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। तेज धूप और सूखी हवाओं के कारण खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे फसलों की बढ़वार प्रभावित होने लगी है। हालांकि कृषि विभाग के अफसरों का कहना है कि किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में वैज्ञानिक तरीके अपनाकर फसलों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

कृषि विभाग के उपसंचालक यू. एस. तोमर ने बताया कि जिन क्षेत्रों में अभी तक पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है, वहां किसान खेतों में डोरा (हल्का गुड़ाई ) चलाएं। इससे मिट्टी की ऊपरी सतह टूटेगी, हवा और ऑक्सीजन जड़ों तक पहुंचेगी और नमी लंबे समय तक संरक्षित रहेगी। पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होगा और फसलों की बढ़वार में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि जिन खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है और जहां सोयाबीन या अन्य फसलों में पानी की कमी साफ दिखाई दे रही है, वहां फव्वारा (स्प्रिंकलर) पद्धति से हल्की सिंचाई की जा सकती है, ताकि पौधों को आवश्यक नमी मिल सके और उनकी वृद्धि प्रभावित न हो।

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दोबारा बोवनी से बचें सलाह जरूर लें
तोमर ने किसानों से अपील की है कि वर्तमान परिस्थितियों में बिना विशेषज्ञ की सलाह के दोबारा बुवाई या अनावश्यक कृषि कार्य करने से बचें। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले एक से दो दिनों के भीतर वर्षा होने की संभावना है। यदि पूर्वानुमान के अनुसार बारिश होती है तो खेतों में पर्याप्त नमी लौट आएगी और फसलों की बढ़वार को नई गति मिलेगी।

फसलों में दिख रहा पीलापन
इधर, खेतों में फसलों की स्थिति देखकर किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। कहीं- कहीं फसल पीली पड़ रही है।

जिले में अभी तक केवल 11.29 इंच बारिश

बारिश में लंबी खेंच ने आमआदमी के चेहरे पर भी परेशानी ला दी है। जिले में अब तक ११.२९ (२८६.८ मिमी) इंच बारिश हुई है, जो औसत बारिश ३६ (९०० एमएम )इंच से २४.४४ इंच कम है। यदि तहसीलवार वर्षा की बात करें तो तराना तहीलस में सबसे ज्यादा 14.74 इंच (३७४ मिमी)वर्षा दर्ज की गई है। माकड़ौन तहसील में अब तक केवल 5.40 इंच (139 मिमी) पानी गिरा है।

परंपरागत खेती छोड़, बागवानी शुरू की

उज्जैन। घटती कमाई से चिंतित एक किसान ने परंपरागत खेती को छोड़कर बागवानी शुरू की है। वह भाटखेड़ी के किसान भेरूसिंह ठाकुर कहते है कि परंपरागत खेती मौसम पर निर्भर है। कभी मानसून अच्छा बरसता है तो कभी धोखा दे जाता है। इस स्थिति को देखते हुए बागवानी को अपनाया है और पपीते की तरफ रुख किया है। यह खेती उन्हें आर्थिक तौर पर मजबूत बना रही है। उनका मानना है कि बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को फसलों में विविधीकरण अपनाना चाहिए, ताकि किसी एक फसल पर निर्भरता कम हो और जोखिम भी घटे।

किसान बोले

फसल सूखने की कगार में, पीलापन आया

फसलों को तत्काल बारिश की आवश्यकता है। कई स्थानों पर सोयाबीन की फसलों में पीलापन दिखाई देने लगा है। अगले सात से आठ दिनों तक भी बारिश नहीं हुई तो 50 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है।
सौदानलाल, ढाबला हर्दू

बारिश नहीं हुई तो नुकसान हो सकता है

फसलों में पानी की कमी साफ महसूस होने लगी है। दोपहर की तेज धूप पड़ते ही खड़ी फसल मुरझाई हुई दिखाई देती है। यदि इस सप्ताह बारिश नहीं हुई तो फसलों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और उत्पादन पर भी सीधा असर पड़ेगा।
राहुल जायसवाल, ढाबला हर्दू

फसलों की ग्रोथ रुक गई है

कम वर्षा से फसलों की हालत खराब हो रही है। सोयाबीन और तुअर जैसी फसलों की ग्रोथ रुक सी गई है। फसलों में पीलापन नजर आने लगा है । फसलों के साथ पशुओं के आहार यानी चारा पर भी कम बारिश का असर दिख रहा है। बुवाई के समय तो सामान्य से अच्छी बारिश हो गई थी परंतु उसके बाद बारिश ने मानो ब्रेक ले लिया है अभी हालत यह है कि कुओं ओर तालाबों में भी पानी एकत्रित नहीं हुआ है। – मुकेश गोयल, मसवाडिय़ा खालसा

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