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चरक अस्पताल भवन में लगे आग बुझाने के यंत्र ‘बीमार’

झांसी की घटना से सबक लेकर मॉकड्रिल जरूर की, लेकिन अव्यवस्था पर किसी की नजर नहीं

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बॉक्स को लोगों ने बना दिया डस्टबिन, पाइप में लगी जंग

अक्षरविश्व न्यूज| उज्जैन। सिंहस्थ 2016 के पूर्व सरकार ने शहर को करोड़ों रुपए की लागत की 6 मंजिला चरक अस्पताल की बिल्डिंग सौंपी थी। कुछ माह पूर्व तक यहां मातृ एवं शिशु रोग विभाग सहित अस्पताल के कुछ अन्य विभाग संचालित होते थे। अब जिला चिकित्सालय के विभाग और वार्ड भी यहां शिफ्ट कर दिए गए हैं, लेकिन सर्वसुविधा युक्त भवन का अफसरों द्वारा मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं है।

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झांसी के सरकारी मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग वार्ड में लगी आग ने देश भर के अस्पतालों को आग से सुरक्षा को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है। शहर में सरकार चरक अस्पताल से बड़ा बहुमंजिला अस्पताल नहीं है। इसके निर्माण की एजेंसी हाउसिंग बोर्ड द्वारा अस्पताल निर्माण के दौरान संभावित इमरजेंसी घटना दुर्घटना के मद्देनजर सुरक्षा के उपकरण भी लगाए गए थे। जिनकी वर्तमान स्थिति का अक्षर विश्व की टीम ने जायजा लिया। अस्पताल परिसर से लेकर 6 मंजिल तक आग बुझाने के यंत्रों व लाइन की स्थिति यह है कि यदि अस्पताल में विपरीत परिस्थिति उत्पन्न हुई तो उस पर काबू पाना मुश्किल हो जाएगा।

यह हैं यंत्रों की हालत

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चरक अस्पताल परिसर के चारों ओर आग बुझाने के लिए पानी की पाइप लाइन, इमरजेंसी बॉक्स लगाए गए थे। इन पर लाल पेंट कर सूचना भी लिखी गई। वर्तमान में उक्त लाइन बंद पड़ी है। पास में लगे बॉक्स टूटे हैं। हालत यह है कि बॉक्स के आसपास पेड़-पौधे उग आए हैं। अस्पताल के अंदर छत के रास्ते सेंट्रल लाइन डाली गई है। जिसे वार्डों से जोड़ा गया है। प्रत्येक फ्लोर पर लाइन डालकर बॉक्स लगाए गए हैं। इन बॉक्स को तोड़कर लोगों ने डस्टबीन बना डाला है। पाइप पर जंग लगी है। लिकेज होने पर पाइप पर सीमेंट की बोरी बांधी गई है।

मॉकड्रिल तो की, लेकिन यंत्रों की जांच नहीं की

झांसी की घटना से सबक लेकर चरक अस्पताल के अफसरों ने शनिवार को एनआईसीयू में स्टाफ के साथ मॉकड्रिल की। आग लगने पर सुरक्षा और बचाव का सीन क्रिएट किया गया। अफसरों ने कर्मचारियों को समझाइश भी दी, लेकिन पहले से लगे उपकरण की जांच नहीं की। वर्तमान में यह उपकरण किस हालत में हैं। इमरजेंसी में चलेंगे या नहीं इसका टेस्ट करना भूल गए।

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