पूर्व सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष बोले, काम में तेजी जरूरी क्योंकि अब बचे हैं आयोजन में सिर्फ 500 दिन

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारी पर सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष दिवाकर नातू ने चिंता जाहिर की है। नातू ने कहा कि सिंहस्थ के लिए अब केवल 500 दिन का समय है। इस बार श्रद्धालुओं की अनुमानित संख्या को देखते हुए तैयारियों को और तेज करना होगा।
नातू ने बतौर संहस्थ अपने अनुभव साझा किए। नातू ने बताया कि उन्होंने 1980, 1992, 2004 और 2016 में सिंहस्थ को काफी करीब से देखा है। नातू ने बताया कि जल , शौचालय और साफ-सफाई व्यवस्था पर शुरुआत से ही ध्यान देना जरूरी है। आपातकालीन स्थितियों के लिए एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड की समुचित व्यवस्था, सुरक्षा, बिजली और पशु विचरण पर नियंत्रण को प्राथमिकता में रखना होगा। बाहर से आने वाले भक्तों को भटकना न पड़े, इसके लिए पूरे क्षेत्र में पर्याप्त दिशा संकेतक लगाए जाने चाहिए और भीड़ नियंत्रण की ठोस योजना बनाई जानी चाहिए।
यह भी कहा नातू ने
धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ साधु-संतों की सेवा के लिए उचित स्थान का निर्धारण किया जाना चाहिए। सिंहस्थ की तरह इस बार भी व्यवस्थाओं में एनसीसी, एनएसएस और स्काउट गाइड जैसी संस्थाओं के स्वयंसेवकों को सहायक के रूप में शामिल करने पर विचार किया जाना आवश्यक है।
साधु-संतों का अपने क्षेत्र से रामघाट पर क्षिप्रा स्नान करने के लिए जाने का मार्ग भी सुगम होना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन के ही निवासी हैं और वे व्यवस्थाओं पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं, लेकिन समय की कमी को देखते हुए अधिक मेहनत की आवश्यकता है। जानकारी के अनुसार मार्च, अप्रैल और मई माह में स्नान की तिथियां आएंगी। समय की पाबंदी और भूमिगत जल में वृद्धि करना सभी के हाथ में है और यह प्रयास अवश्य किया जाना चाहिए।









