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नए साल में चार ग्रहण, दो सूर्य और दो चंद्र

इन खगोलीय घटनाओं को नहीं देख सकेंगे शहरवासी

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। नववर्ष की शुरुआत में सिर्फ एक दिन शेष है और हर व्यक्ति जानना चाहता है कि आने वाला साल कैसा होगा। खगोलीय दृष्टि से नया साल बेहद खास होने वाला है क्योंकि इस दौरान दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण देखने को मिलेंगे। इसमें दो पूर्ण और दो आंशिक चंद्रग्रहण होंगे। सनातन धर्म में ग्रहण का विशेष महत्व है इसलिए ग्रहों और नक्षत्रों में होने वाली इन दुर्लभ खगोलीय घटनाओं को जानने की लोगों में उत्सुकता भी है। हालांकि, इनमें से एक ही चंद्रग्रहण दिखाई देगा लेकिन जब तक चंद्रमा देखने के स्थिति में ऊपर आएगा तब तक उसका मोक्ष हो चुका होगा। ऐसे में इसे भी देखा नहीं जा सकेगा। अन्य तीन ग्रहण भी शहर सहित देशभर में दिखाई नहीं देंगे।

शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि आने वाले साल में चार ग्रहण होंगे। इसमें 17 फरवरी को आंशिक सूर्यग्रहण, 3 मार्च को पूर्ण चंद्रग्रहण, 12-13 अगस्त को पूर्ण सूर्यग्रहण और 28 अगस्त को आंशिक चंद्रग्रहण होगा।

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इस दिन रहेंगे ग्रहण

सूर्यग्रहण

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17 फरवरी को आंशिक सूर्यग्रहण होगा जिसकी शुरुआत दोपहर 3.26 बजे से होगी। मध्य का समय 5.41 और मोक्ष का समय 7.57 बजे होगा।

12-13 अगस्त को पूर्ण सूर्यग्रहण रहेगा। इसका प्रारंभ रात 9.04 बजे से होगा, मध्य रात 11.15 बजे और मोक्ष का समय मध्य रात्रि 1.27 बजे होगा।

चंद्रग्रहण

3 मार्च को पूर्ण चंद्रग्रहण होगा जिसकी शुरुआत दोपहर 3.19 बजे से होगी। मध्य का समय शाम 5.03 बजे और मोक्ष का समय शाम 6.47 बजे रहेगा।

28 अगस्त को आंशिक चंद्रग्रहण होगा जिसकी शुरुआत रात 8.03 बजे होगी। मध्यम रात 9.42 बजे एवं मोक्ष रात 11.22 बजे होगा।

दिखाई देगा, देख नहीं सकेंगे

डॉ. गुप्त ने बताया 3 मार्च को होने वाला पूर्ण चंद्रग्रहण सैद्धांतिक रूप से तो शहर सहित देशभर में देखा जा सकेगा लेकिन इसे हम देख नहीं सकेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि उस दिन शहर में सूर्यास्त 6.31 बजे होगा। इसके बाद पूर्व दिशा में पूर्णिमा का चांद आंशिक ग्रहण लगी स्थिति में उदय होगा। ग्रहण समाप्ति का समय शाम 6.47 है। अत: चंद्र उदय से केवल 16 मिनट ही ग्रहण की स्थिति रहेगी। अत: जब तक चंद्रमा आसमान में देखने की स्थिति तक आएगा तब तक मोक्ष हो चुका होगा इसलिए ग्रहण देखा नहीं जा सकेगा।

क्या कहता हैं धर्म-विज्ञान
भारतीय परंपरा में ग्रहण का खास महत्व माना जाता है। सनातन धर्म में मान्यता है कि ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है इसलिए लोग इस दौरान भोजन पकाने से बचते हैं और पूजा-पाठ नहीं करते हैं। इस दौरान भगवान की आराधना की जाती है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और घर-मंदिरों की शुद्धि की परंपरा निभाई जाती है। वहीं वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है। जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं तब ग्रहण लगता है। इसमें डरने की कोई बात नहीं होती बल्कि यह विज्ञान का एक रोचक दृश्य होता है। साल 2026 में पडऩे वाले ग्रहण धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही नजरियों से लोगों के लिए दिलचस्प रहने वाला है।

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