Popup Image
Advertisement

गलत दवा देना भारी पड़ा पाटीदार मेडिकोज को

दिल के मरीज को पेट दर्द की दवाई दी

Advertisement

अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह को ऋषि नगर निवासी राजीव सोलंकी ने पाटीदार मेडिकोज के खिलाफ शिकायत की। बताया गया कि उनके पिता 75 वर्षीय गंगाराम सोलंकी दिल के मरीज हैं। पिता की दवाई लेने के लिए वह मेडिकल गया। वहां से दिल के बजाय पेट दर्द की दवाई दे दी गई। कलेक्टर ने शिकायत मिलते ही सीएमएचओ को जांच के निर्देश दिए। जांच टीम बनी। शिकायत सही पाई गई। कलेक्टर के निर्देश पर पाटीदार मेडिकोज को सील करते हुए पंद्रह दिन के लिए लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।

कलेक्टर को दी गई शिकायत में राजीव ने बताया कि उसने पिता का चेकअप कराया। डॉक्टर ने पांच तरह की दवाई लिखी। 28 अक्टूबर को उसने पाटीदार मेडिकोज से दवाई खरीदी और बिल भी ले लिया। गंगाराम दवाई लेते रहे। दरअसल यह दिल की बीमारी की दवा थी ही नहीं। इसका खुलासा उस समय हुआ जब वह दवा खत्म होने पर 27 नवंबर को दोबारा उसी मेडिकोज पर दवाई लेने गया। पता चला कि सिडमस 50 एमजी दवा देना थी, इसके बदले मेनेटॉन दे दी गई जो पेट दर्द में काम आती है। यानी उसके पिता महीने भर तक पेट दर्द की दवा लेते रहे। गनीमत यह रही कि दवा से कोई रिएक्शन नहीं हुआ, लेकिन यह सरासर लापरवाही है।

Advertisement

Advertisement

ड्रग इंस्पेक्टर को जांच के निर्देश दिए

कलेक्टर के निर्देश पर सीएमएचओ ने ड्रग इंस्पेक्टर धर्म सिंह कुशवाह को जांच के आदेश दिए। टीम ने पाटीदार मेडिकोज पहुंच कर जांच की। पता चला कि फार्मासिस्ट रोहित वहां नहीं था। जब पूछताछ की गई तब जानकारी मिली कि वह टीम के पहुंचने के करीब घंटे पहले ही चला गया था।

जाने से पहले वह अन्य कर्मचारियों को बता रहा था कि भोजन करने जा रहा है। टीम ने बिल के आधार जांच की। इसमें पाया गया कि शिकायतकर्ता की शिकायत सही है। राजीव को वह दवा नहीं दी गई जो लिखी थी। जांच पूरी होने के बाद ड्रग इंस्पेक्टर ने सीएमएचओ को बताया। सीएमएचओ ने कलेक्टर को जानकारी दी। कलेक्टर के निर्देश पर मेडिकल को सील कर दिया गया। पंद्रह दिन के लिए लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया।

इस घटना से बड़ा सबक

राजीव सोलंकी द्वारा कलेक्टर को दी गई शिकायत और त्वरित कार्रवाई यह बताती है कि यदि प्रमाण सहित शिकायत की जाए तो कार्रवाई होती है। अमूमन लोग यह धारणा बना लेते हैं कि कलेक्टर के यहां सैकड़ों शिकायतें आती हैं। ऐसे में कार्रवाई होगी या नहीं संशय है। ऐसा नहीं है कार्रवाई होती है।

यह कार्रवाई उन मेडिकल संचालकों के लिए भी सबक है जो डॉक्टर बन कर लोगों को अपने मन से दवाई दे देते हैं। देखा जा रहा है कि आपको यदि कोई तकलीफ है, मेडिकल पर जाइए। बीमारी बताइए, वहां बैठा संचालक या कर्मचारी दावे केे साथ दवाई दे देगा और कहेगा, तीन खुराक में आराम हो जाएगा। लोगों को इससे बचना चाहिए। किसी दिन कोई दवा रिएक्शन कर सकती है।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें