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कलेक्टर न आते तो बच जाते मंदिर के पुरोहित महाकाल मंदिर और रामघाट जाने का नियम है

गेट नंबर चार पर रोज आते हैं इन लोगों भी पकड़ना जरूरी है

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मंदिर में बरसों से चल रहा है राशि लेकर दर्शन कराने का धंधा

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। कलेक्टर ने महाकाल मंदिर में पैसे लेकर दर्शन कराने वालों क्या दबोचा, चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। इस गोरखधंधे का भंडाफोड़ प्रशासक को करना था, वे एडीएम के बाद आए। सोशल मीडिया के मार्फत पूरे देश में खबर फैल गई कि महाकाल मंदिर में सोमनाथ जैसी व्यवस्था नहीं है।

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मथुरा जैसे हालात नहीं हैं। यहां हर तरीके से दर्शन हो जाते हैं। अब जरूरत इस बात की है कि महाकाल में दर्शन कराने का जो धंधा चल रहा है उसके पूरे गिरोह का भंडाफोड़ हो। मंदिर के अंदर और बाहर दोनों तरफ बाड़बंदी जरूरी है। अब तक न जाने कितने लोग दर्शन के नाम पर लखपति बन चुके हैं। ऐसी महाकाल में ही चर्चा है। अब तो चर्चा यह भी है कि किसी में हिम्मत है तो गेट नंबर चार पर होने वाले सुबह आठ से नौ के बीच के गदर को उजागर करके बताए। नियमित दर्शन करने वालों को पता है कि महाकाल मंदिर में क्या हो रहा है। प्रशासक सक्रिय होते हैं तब खिलाड़ी रुक जाते हैं और उसके बाद फिर वही खेल शुरू हो जाता है। प्रशासक ने वेश बदल कर निरीक्षण किया तब ढाई सौ ज्यादा भक्त भस्मार्ती में नहीं आए। यहीं से समझ लेना चाहिए कि कुछ तो गड़बड़ है।

कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने जब से यहां चार्ज लिया है तब से एक नियम बना हुआ है। वे प्रतिदिन सुबह रामघाट जाते हैं। वहां मां शिप्रा के जल को ललाट पर लगा कर प्रणाम करते हैं और प्रार्थना करते हैं। इसी क्रम में वे महाकाल मंदिर आते हैं। यहां आकर गर्भगृह की चौखट को स्पर्श कर बाबा से आशीर्वाद लेते हैं। वे मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष हैं, चाहें तो गर्भ गृह में प्रवेश कर अभिषेक कर सकते हैं, पूजन कर सकते हैं। लेकिन नियम का पालन करते हैं। दर्शन के बाद ही उनकी दैनंदिनी शुरू होती है।

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दर्शन करने आए थे, ये भी और वो भी

कलेक्टर दर्शन के लिए महाकाल मंदिर पहुंचे। दर्शन करने के बाद उन्होंने नंदी हॉल में जब भीड़ देखी तब कौतूहलवश पूछ लिया। बस यहीं से परत-दर परत दर्शन कराने की व्यवस्था उजागर होती गई। कलेक्टर मंदिर समिति के अध्यक्ष हैं उन्होंने पूरे मामले को तुरंत समझा और एडीएम, एसडीएम को बुला लिया। बाद में सूचना मिलने के बाद मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ भी पहुंचे। बहरहाल, अब तक कलेक्टर के सामने महाकाल मंदिर में पैसे लेकर दर्शन कराने के मामले पहुंचते थे।

वे जांच कराते थे। गुरुवार को तो उन्होंने साक्षात ही देख लिया। पता चल गया कि दर्शन कौन-कौन करवा रहे हैं। मंदिर समिति के कर्मचारी, क्रिस्टल कंपनी के कर्मचारी और एजेंट सामने आ चुके हैं। अब तो पूजन कराने वाले भी बेनकाब हो गए। यह सिलसिला यहीं नहीं रुकता है। मीडिया लगातार आवाज उठाता रहा है।

बताता रहा है कि मंदिर में दर्शन कराने वालों का गिरोह काम कर रहा है। बावजूद इसके कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। गेट नंबर चार के बारे में पिछले कई दिनों से चर्चाओं का दौर चल रहा है। कुछ दर्शनार्थियों ने तो यहां तक दावा कर दिया कि सुबह आठ से नौ के बीच दादागिरी होती है। इन लोगों को आज तक नहीं रोका गया। यदि यहां एक सप्ताह तक नियमित जांच की जाए तो पूरा खेल उजागर हो जाएगा।

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