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किसी का जीवन बचाना है तो रक्तदान जरूर कीजिए जीवन की डोर टूटने पर धन नहीं रक्त काम आता है

विश्व रक्तदाता:  दिवस रक्तदाताओं ने मार्मिक अपील

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। यदि आपको किसी का जीवन बचाना है तो एक बार रक्तदान जरूर करें। इससे बड़ा कोई दान नहीं हैं। रक्तदाता कहते हैं कि आपके पास देने को धन नहीं है, रक्त तो है। इसका दान कीजिए। किसी का जीवन बचा कर आपको न सिर्फ खुशी बल्कि सुकून भी मिलेगा। आज विश्व रक्तदाता दिवस है। अपने शहर में कई रक्तदानी हैं, जिन्होंने इस दान को अपना धर्म और कर्म माना है। कई लोगों ने इनसे प्रेरित होकर रक्तदान किया है।

अब तक आठ हजार लोगों से करवा चुके हैं रक्तदान

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यतीश जाट इन्होंने अपने जीवन में न जाने कितने लोगों को रक्त के लिए परेशान देखा, रोते हुए देखा, उनकी आंखों से निकले आंसुओं ने प्रेरित किया। २०१२ में रक्तदान करने का संकल्प लिया। गिनती नहीं है स्वयं ने कितनी बार दिया। रक्तदान के लिए रक्त वाहिनी गु्रप बनाया। इस गु्रप के माध्यम से अब तक आठ हजार लोगों से रक्तदान कराया। इसमें शिविर भी शामिल है। पिछले माह डब्ल्यूबीसी देने इंदौर भी गए। यतीश का कहना है कि यहां प्लेटलेट्स तैयार करने की एक अस्पताल को छोडक़र कोई व्यवस्था नहीं है। चरक अस्पताल में यूनिट की स्थापना जरूरी है।

अब तक 64 बार कर चुके हैं रक्तदान, सिलसिला जारी

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आशीष मल्होत्रा अपने पिता स्व. रमेश मल्होत्रा की प्रेरणा से अब तक 64 बार रक्तदान कर चुके हैं। वे बताते हैं कि आरडी गार्डी में भर्ती गर्भवती को दो बेबी होने वाले थे। जान जोखिम में थी। रात दो बजे फोन आया, मूसलधार बारिश हो रही थी। वे अपने एक साथी के साथ अस्पताल पहुंचे, देखा परिवार के लोग रो रहे थे। हमें देखते ही उनके चेहरे पर चमक आ गई, बोले, अब बहू बच जाएगी। हमने रक्तदान किया और कराया भी। उस गर्भवती की नार्मल डिलीवरी हुई।

घायल को अस्पताल ले गए, 30 बार रक्तदान
अंकुर पारख पिछले बारह साल से रक्तदान कर रहे हैं। अब तक 30 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि एक बार सडक़ हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। मित्रों के साथ उन्हें अस्पताल ले गए। डॉक्टर ने कहा-एक घायल का खून काफी बह चुका है। हमने जांच कराई और उसी समय रक्तदान किया। उसकी जान बच गई। लोगों से यही अनुरोध है कि जीवन की डोर टूटने लगती है तो पैसा नहीं रक्त ही काम आता है। इसलिए रक्तदान जरूर करें।

1973 में पहली बार किया रक्तदान

प्रकाश चित्तौड़ा अब तक 33 बार रक्तदान कर चुके हैं।1973 में पहली बार दिया, उसके बाद सिलसिला शुरू हो गया। हुआ यूं कि एक मित्र रिश्तेदार एक्सीडेंट में घायल हो गए। खून की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। हमारा ग्रुप मिल गया। उसी समय रक्तदान किया।1989 तक रक्तदान किया। अब लोगों को पे्ररित करते हैं। जरूरतमंदों के लिए तत्काल व्यवस्था करवाते हैं। चित्तौड़ा का कहना है कि प्रत्येक स्वस्थ्य व्यक्ति को रक्तदान जरूर करना चाहिए। रक्तदान करने से शरीर स्वस्थ रहता है।

रक्तदान करने दिल्ली गए
कपिल जैन 22 बार रक्तदान कर चुके हैं। वे बताते हैं कि हम 2012 में मित्रों के साथ रात 3 बजे के करीब सिविल अस्पताल के बाहर चाय पीने गए। एक बुजुर्ग आए और बोले- मेरी बहू मर जाएगी, डॉक्टर ने खून चढ़ाने के लिए कहा है। इतना कहते हुए वे रोने लगे। हम लोग अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर से बात की और रक्तदान किया। उसके बाद से अब तक रक्तदान करते आ रहे हैं। पिछले माह एक दोस्त को जरूरत थी, रक्तदान करने दिल्ली गए।

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