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पिता के ध्यान न देने पर मां के लिए बच्चों को पालना हो जाता है मुश्किल, 3 बड़ी वजह

अगर आप बतौर पिता अपने बच्चे के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं, तो यह समझना बेहद जरूरी है कि ऐसी स्थिति में आपकी पार्टनर के लिए बच्चों की परवरिश काफी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। पिता की कम भागीदारी के कारण मां को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। आखिर वे कौन-सी परेशानियां हैं, जिन्हें मां झेलती हैं और इस बारे में एक्सपर्ट ने विस्तार से बताया है।

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कहते हैं कि पेरेंटिंग एक टीमवर्क है, जिसमें माता-पिता दोनों की सक्रिय भागीदारी से ही बच्चों की बेहतर परवरिश हो पाती है। अगर इस टीम में से कोई एक कमजोर पड़ जाए, तो बच्चों और वो भी खासतौर पर टीनएजर्स को संभालना मुश्किल हो जाता है। वहीं, जब पिता की भूमिका या मौजूदगी कम हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में बच्चों की बदतमीजी बढऩे लगती है। वे मनमानी करने लगते हैं, जिद पर उतर आते हैं और लिमिट क्रॉस करने लगते हैं।

 

इसका सीधा असर मां पर पड़ता है और उनके लिए बच्चों की परवरिश और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। लेकिन ऐसा क्यों होता है इसके पीछे पेरेंटिंग कोच और एनएलपी प्रैक्टिशनर ने तीन बड़ी वजहें बताई हैं। आइए जानते हैं इन कारणों को विस्तार से।

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पिता अपनी भूमकिा नहीं निभाते
पेरेंटिंग कोच का कहना है कि जब पिता बच्चे की परवरिश में सक्रिय भूमिका नहीं निभाते, तो 16 से 18 साल के बच्चों की बदतमीजी मां के लिए बर्दाश्त से बाहर हो जाती है।

क्योंकि मां को केयरटेकर और कंट्रोलर, दोनों भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं- सबसे पहली वजह यही होती है कि जब पिता भावनात्मक या व्यावहारिक रूप से मौजूद नहीं होते, तो मां को केयरटेकर और कंट्रोलर, दोनों भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। इस दोहरे दबाव में मां की अथॉरिटी धीरे-धीरे कमजोर पडऩे लगती है और बच्चा लिमिट पुश करने लगता है।

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मां पर चिल्लाता है और पिता के सामने अलग बिहेव करता है
बच्चा अब्जॉर्ब करता है कि मां ज्यादा फील करती है, जल्दी गिल्ट में आ जाती है। डर के कारण पीछे हट जाती है इसीलएि बच्चा मां पर चिल्लाता है और वही बच्चा पिता के सामने अलग-अलग बिहेव करता है, तो इस तरह बिहेवयिर सिलेक्टिव हो जाता है।

बच्चों का फ्रस्टेशन आता है बाहर
टीनएज लड़के और लड़कियों दोनों के लिए पिता का मतलब होता है बाउंड्री, स्ट्रक्चर और सेफ्टी। जब पिता की यह भूमिका मौजूद नहीं होती, तो बच्चों का फ्रस्ट्रेशन मां पर निकलता है, क्योंकि मां आसानी से एक्सेसिबल होती हैं।

बार-बार चुनौती
पिता के सपोर्ट के बिना मां अक्सर हाइपर अलर्ट हो जाती हैं, हर बात को लेकर ओवरथिंक करने लगती हैं और फियर-बेस्ड पेरेंटिंग करने लगती हैं। ऐसी स्थिति में टीनएजर एक अनस्टेबल पैरेंट को बार-बार चुनौती देने लगता है। ऐसे में समस्या बढ़ जाती है।

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