मकर संक्रांति 2026 कब है? जानें

मकर संक्रांति का त्योहार पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. मकर संक्रांति का त्योहार हजारों वर्षों से हमारी सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक रहा है. यह त्योहार नए साल की शुरुआत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. मकर संक्रांति नए साल की शुरुआत है, जो सर्दियों के अंत और गर्मियों के आगमन का प्रतीक है.
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मकर संक्रांति वह पवित्र दिन है जब सूर्य देव धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. जिस दिन सूर्य राशि चक्र में प्रवेश करता है, उसे संक्रांति के रूप में जाना जाता है, लेकिन सभी संक्रांतियों में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. लेकिन 2026 में मकर संक्रांति की तारीख को लेकर काफी भ्रम है. तो आइए जानते हैं कि 2026 में मकर संक्रांति कब मनाई जाएगी.

मकर संक्रांति 2026 कब है
इस बार मकर संक्रांति बुधवार, 14 जनवरी को है, लेकिन सूर्य दोपहर 3 बजकर 6 मिनट पर मकर राशि में गोचर करेगा. ऐसे में शुभ मुहूर्त रात 8 बजकर 42 मिनट पर होगा. महापुण्य काल मुहूर्त सुबह 8 बजकर 40 मिनट से शुरू होकर सुबह 9 बजे तक चलेगा. वहीं मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का समय सुबह 9 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा.
इस बार मकर संक्रांति का दिन एकादशी के साथ पड़ रहा है. 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ-साथ शत्तिला एकादशी का पर्व भी मनाया जाएगा. इस प्रकार आपको सूर्य देव के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त होगा. ऐसे में यदि संक्रांति एकादशी के दिन पड़ती है, तो आपको इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए, लेकिन आप दान करके पुण्य कमा सकते हैं.
महा पुण्य काल
महा पुण्य काल को गंगा स्नान और धार्मिक कार्यों के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी को ये समय सबसे शुभ हैं:
सुबह का समय: 07:15 बजे से 09:00 बजे तक
दोपहर का समय: 02:48 बजे से 03:42 बजे तक
कुछ पंचांगों के अनुसार 03:13 बजे से 05:00 बजे तक
मकर संक्रांति पर स्नान का शुभ समय
मकर संक्रांति 2026 पर पवित्र स्नान के लिए सबसे अच्छा समय सुबह 09:03 बजे से 10:48 बजे तक माना गया है।
सूर्योदय लगभग 07:00 बजे से 07:15 बजे के बीच होगा। इसके बाद किया गया स्नान धार्मिक रूप से बहुत फलदायी माना जाता है।
इस तरह, मकर संक्रांति 2026 पूरे देश में 14 जनवरी को ही श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाई जाएगी।
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण में लौटने का प्रतीक है, जिसे देवताओं का दिन कहा जाता है. शास्त्रों में उत्तरायण को आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य का समय माना गया है. महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने उत्तरायण की प्रतीक्षा में अपना शरीर त्याग दिया था, इसलिए इसे मोक्ष का समय माना जाता है. मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान और जप का विशेष महत्व है. इस दिन गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र जल में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और अविनाशी पुण्य प्राप्त होता है.
मकर संक्रांति से शुभ गतिविधियां शुरू होंगी
जब ग्रहों का राजा सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है, तो खरमास शुरू हो जाता है और इसके साथ ही शुभ और शुभ गतिविधियों पर रोक लग जाती है. लेकिन जब सूर्य मकर राशि में गोचर करता है, तो खरमास समाप्त हो जाता है और विवाह, ग्रहों का प्रवेश, दाढ़ी बनाना, सगाई आदि जैसी शुभ और शुभ गतिविधियां फिर से शुरू हो जाती हैं.










