विरासत का विकास… संग्रहालय बन इतिहास के नायकों से रूबरू करवाएगा कोठी पैलेस…

पैलेस को संरक्षित कर बना रहे संग्रहालय, 28.07 करोड़ की लागत से 18 माह में पूरा होगा काम
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी में आने वाले पर्यटक मंदिरों के दीदार के साथ जल्द ही इतिहास के पन्नों को भी पलट सकेंगे। करीब 138 साल पुराने कोठी पैलेस को अब वीर भारत संग्रहालय के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है जिसकी मरम्मत का काम इन दिनों तेजी से किया रहा है। यहां वैदिक काल, रामायण से लेकर स्वाधीनता संग्राम में भागीदारी करने वाले वीर नायकों की प्रेरक गाथाओं को विभिन्न माध्यमों से प्रदर्शित किया जाएगा।
वर्तमान में कोठी पैलेस का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। खास बात यह है कि मूल रूप का संरक्षण करते हुए पैलेस का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इसे निर्माण एजेंसी मेसर्स उष्टा इन्फिनिटी कंस्ट्रक्शन कंपनी प्रालि और मेसर्स श्रीनिवासा पॉवर सॉल्यूशन द्वारा उज्जैन स्मार्ट सिटी (यूएससीएल) के माध्यम से 28.07 करोड़ की लागत से 18 महीनों में पूरा करेगी। इसके वास्तुविद कंसल्टेंट मेसर्स धरोहर नईदिल्ली हैं। वीर भारत संग्रहालय में देश के नायकों और महापुरुषों की प्रेरक कथाओं को संदेशों के माध्यम से बताया जाएगा। नायकों के चरित्र को पेंटिंग, उत्कीर्णन और शिल्पांकन के जरिए प्रदर्शित किया जाएगा। सिंहस्थ 2028 में लोग वीर भारत संग्रहालय को देख पाएंगे। इससे देशभर के लोगों को यह संदेश मिलेगा कि हमारा देश आज जिस जगह पर है, उसमें किन विभूतियों ने अपना सर्वस्व कैसे और किस तरह दिया।
ऐसा है कोठी महल
ग्वालियर के तत्कालीन शासक जीवाजी राव सिंधिया के समय इस महल का निर्माण करवाया था। साल 1887-88 में ब्रिटिश रिजेंसी काउंसिल द्वारा इसका निर्माण पूरा किया गया। कोठी महल यूरोपीय और भारतीय स्थापत्य का समन्वित रूप नजर आता है। भारतीय शैली में राजपूत और मराठा प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखते हैं, जबकि यूरोपियन शैली में इसके विशाल सभागारों गुंबद रोम (इटली) के सेंटपॉल चर्च की तरह हैं। दरवाजे, झरोखे एवं खिड़कियां राजपूत शैली के हैं। वहीं बरामदे मराठा शैली के हैं। कोठी पैलेस में छोटे-बड़े मिलाकर कई कमरे हैं।
पहले संचालित होते थे कलेक्ट्रेट व न्यायालय
कोठी पैलेस में समय-समय पर कई बदलाव हुए। एक हिस्से में जिला न्यायालय तो दूसरे हिस्से में संभागायुक्त-कलेक्टर एवं तहसील कार्यालय संचालित होते रहे। न्यायालय, संभागायुक्त और कलेक्ट्रेट को नई बिल्डिंग मिल गई है, अब कोठी पैलेस को वीर भारत संग्रहालय के रूप में बदला जा रहा है।









