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‘One Nation One Election’ बिल के पक्ष में 269, विरोध में पड़े 198 वोट

केंद्र सरकार के कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘एक देश-एक चुनाव’ 129वां संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश कर दिया, जिसका विपक्ष ने भारी विरोध किया। कानून मंत्री ने विधेयक पर व्यापक चर्चा के लिए इसे जेपीसी में भेजने की मांग की।

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एक देश, एक चुनाव बिल विधेयक को स्वीकार करने के लिए सदन में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वोटिंग हुई। इसमें पक्ष में 269 तो विरोध में 198 वोट पड़े हैं। विपक्ष के कुछ सदस्यों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग पर आपत्ति जताई, तो अमित शाह ने पर्ची से वोट डालने की स्पीकर को सलाह दी।

‘एक देश, एक चुनाव’ बिल के बारे में समझें

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इस बिल के जरिए पूरे देश में लोकसभा व राज्य विधानसभा का एक चुनाव कराया जाएगा।

बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने इस बिल का समर्थन किया है।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर में एक साथ चुनाव कराने वाले इस बिल को उच्च स्तरीय समिति को पेश करने वाली सिफारिशों का समर्थन किया था।

इस समिति के अध्यक्ष पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बनाए गए थे।

बिला पास कराना मुश्किल

एक देश, एक चुनाव को पारित कराने लिए सरकार ने दो बिल लोकसभा में लेकर आई है। इसमें एक संविधान संशोधन बिल है। ऐसे में इसको पारित कराने के लिए सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत का होना बहुत जरूरी है।

लोकसभा की 543 सीटों में से एनडीए के पास 292 सीटें हैं। यह दो तिहाई बहुमत से काफी कम है। एनडीए को 362 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

राज्यसभा की 245 सीटों में एनडीए के पास 112 सांसद हैं। उसके पास छह मनोनीत सांसदों का समर्थन हैं, लेकिन उसको जरूरत दो तिहाई बहुमत की है। यानि कि उसके पास 164 सांसदों का समर्थन होना जरूरी है।

बिल के विरोध में आइएनडीआइए के 205 सांसद खड़े हैं। ऐसे में सरकार को इस बिल को पास कराने में बहुत बड़ी चुनौती मिलने वाली है।

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