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हमारे जेन-जी ज्यादा परिपक्व, ज्यादा इंटेलिजेंट, उनके साथ विमर्श जरूरी

जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने देश-दुनिया पर की बात

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। जूना पीठाधीश्वर एवं आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने कहा कि हमारा जेन-जी अन्य देशों की तुलना में ज्यादा परिपक्व और इंटेलिजेंट हैं। वे उद्देलित जरूर हैं, लेकिन वे भटके हुए नहीं हंै, भ्रमित नहीं हैं और शंकित भी नहीं हैं। उनसे विमर्श की जरूरत है और यह होना ही चाहिए।

अवधेशानंदजी शनिवार को इंदौर रोड स्थित होटल अंजुश्री में मीडियाकर्मियों से चर्चा कर रहे थे। उनसे भारत में जेन-जी के उद्देलन पर सवाल पूछा गया था। पेश है उनसे बातचीत के संपादित अंश।

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Q. जेन-जी का उद्देलन कैसे शांत किया जा सकता है?
A. इस देश को हमेशा यूथ ने ही बदला है। नाचिकेता, शुचकेतु, राम-कृष्ण, चंद्रगुप्त-चाणक्य सब युवा थे। हमारा जेन-जी संभ्रांत हैं। बांगलादेश में जेन जी दिखा तो हमने क्या हालत देखें ? नेपाल में वे भटके तो क्या हुआ ? हमारे जेन जी परिपक्व हैं। दूरदर्शी हैं। उनके पास बड़ा एक्सपोजर है। उनके पास एआई है। गैजेटस हैं। बहुत संभ्रांत तरीके से वे सोचते हैं। उनकी बातें सुनी जानी चाहिए। उनसे विमर्श करना चाहिए। उनको नकारना बिल्कुल नहीं चाहिए। अगर जेन जी उद्देलित होगा तो विकास मे गति आएगी।

Q. जेन-जी को जोडऩे के लिए जूना अखाड़ा -समन्वय परिवार कुछ करेगा ?
A. हमारा जेन जी रचनात्मक गतिविधियों में लगा है। वे भजन क्लबिंग कर रहे हैं। वे अपनी तरह से सोच रहे हैं। वह भारत का भविष्य है। वह एक अच्छा भारत बनाना चाहते हैं। यह उनका युग है। यह देश उनका है और वह हमारे भविष्य है। ऐसे में हमें बस यह देखना चाहिए कि वह कैसा भारत चाहते हैं।

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Q. यूपीआई टैक्स को लेकर भारत के व्यापारी परेशान है ? अधिकतर लोग कहते हैं कि भारत सरकार अमेरिका के दबाव में है?
A.भारत किसी के दबाव में नहीं है। पहली बात तो हमारे यूपीआई ने गेम चेंज कर दिया है। ऐसा सिस्टम ना तो अमेरिका में है, ना सिंगापुर में। यूपीआई अभेद है। उसने आम आदमी का जीवन आसान किया है। उसने कम्फर्टबेल किया है। करप्रणाली सरकार का इश्यू है। उसे ही फैसला लेने देना चाहिए।

Q. विकास के बीच धर्मस्थल आ रहे हैं, आचार्य मंडल इसे कैसे ठीक कर सकते हैं?
A. देखिए यह तो सरकार और प्रशासन को तय करना चाहिए कि वे कैसा विकास करना चाहते हैं। काशी कॉरिडोर जब बन रहा था तो हमारे दो आश्रम आ रहे थे। हमने उन्हे विकास के लिए सरकार को सौंप दिया। हमने उनसे कहा करिए। काशी कॉरिडोर, अयोध्या, महाकाल महालोक यह सब बने ही ना। विकास की बातें तो सरकार से ही करना चाहिए। यशस्वी प्रधानमंत्री का सपना देश को विकसित और स्वच्छ बनाने का है। यह अच्छा सपना है।

Q.अखाड़ों में विवाद हो रहा है, सिंहस्थ कैसे होगा?
A. अखाड़ों में विवाद नई बात नहीं है। जब संख्या बढ़ती है तो विवाद होते हैं, पर सब सुलझ जाते हैं। उज्जैन में हम सब मिलकर सिंहस्थ करेंगे।

Q. शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर देश में काफी नाराजगी दिखाई दे रही है, इसमें और क्या करना चाहिए ? राहुल गांधी क्या इस दिशा में ठीक प्रयास कर रहे हैं?
A.भारत की न्यू एजुकेशन पॉलिसी ( एनईपी) की पूरे शिक्षा जगत में तारीफ हुई है। शिक्षा ऐसा गलियारा है, जहां निरंतर उत्थान, उन्नयन के अवसर हैं। यहां नवाचार के प्रयास होने चाहिए। नव तकनीक निकाली जानी चाहिए। भारत इसमें बहुत आगे है। हमारे पास वेद हैं, पुराण हैं। शिक्षा में सुधार की आवश्यकता है और यह बनी रहनी चाहिए। हेल्थ हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। हमारे आश्रमों में हेल्थ सुविधा है। इस पर और अच्छे प्रयास की जरूरत है। चिकित्सा और शिक्षा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इस सबसे ज्यादा जरूरी है नैतिकता, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और संस्कार की।

Q. राहुल गांधी क्या सही में अलख जगा पा रहे हैं?
A.सारे राजनैतिक दल लोक कल्याण के लिए समर्पित है। उनका मकसद भारत का लोक कल्याण है। जिनके एजेंडे में लोक मांगल्य है, वह सफल हैं।

पांचवें सिंहस्थ में करेंगे शिरकत
इससे पहले स्वामी जी ने उज्जैन की तारीफ की और अवंतिका नगरी को अमर, अजर और मोक्षदा बताया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ 2028 के लिए यह नगरी बेहद उत्सुक है। शासन -प्रशासन और प्रजा के साथ वह भी उज्जैन आने के लिए उत्साहित हैं। वह 1980 से उज्जैन सिंहस्थ में आ रहे हैं। उनका यह पांचवां सिंहस्थ होगा। हमारे गुरुदेव ने समन्वय परिवार बनाया। भारत माता मंदिर बनाया। हम उनका 14वां जन्मदिन मनाने के लिए उज्जैन में एकत्र हुए थे। स्वामी जी ने शनिवार की शाम श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन भी किए।

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