पेरेंट्स आज से ही फॉलो करें 5 आदतें, फर्क दिखेगा साफ

बच्चे को बनाना है शार्प और फोकस्ड?

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे का ब्रेन डेवलपमेंट बेहतर हो, ताकि वह ना सिर्फ पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करे, बल्कि जिंदगी के हर मोड़ पर कॉन्फिडेंट, फोकस्ड और समझदार बनें। बच्चों का दिमाग जितना तेज और शार्प होगा, उतनी ही जल्दी वे चीजें समझ पाएंगे, फैसले ले पाएंगे और खुद को बेहतर ढंग से एक्सप्रेस कर पाएंगे। इसी क्रम में आज हम आपको पांच ऐसी आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बच्चों के ब्रेन के बेहतर डेवलपमेंट के लिए माता-पिता को शुरुआत से ही अपनानी चाहिए। आइए डालते हैं एक नजर।
8 से 10 घंटे की हो स्लीप
बच्चों के ब्रेन को शांत और हेल्दी रखने के लिए सबसे जरूरी है अच्छी नींद। 0 से 7 साल की उम्र के बच्चों को हर दिन कम से कम 8 से 10 घंटे की नींद लेनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि बच्चा रात 9 बजे तक सो जाए और सुबह 7 बजे तक उठे। लेट सोना और लेट उठना बच्चे के मानसिक विकास के लिए सही नहीं माना जाता।
घर का माहौल हो बेहतर
बच्चों के ब्रेन डेवलपमेंट के लिए दूसरा सबसे अहम फैक्टर है घर का शांत और पॉजिटिव माहौल।घर में मम्मी-पापा और बच्चे एक साथ समय बिताएं। चाहे वो साथ में फैमिली टाइम हो, मस्ती भरा कोई सिली डांस हो, पिलो फाइट हो या पकड़मपकड़ाई जैसा कोई खेल। वह कुछ भी हो सकता है।
फ्री प्ले टाइम
बच्चों के दिमाग के बेहतर विकास के लिए इस लिस्ट में तीसरी चीज है फ्री प्ले टाइम। श्वेता कहती हैं कि रोज शाम को बच्चा कम से कम 1 घंटा ग्राउंड पर खुले में दौड़े, खेले, भागे। यह उसके लिए बहुत जरूरी है। यह उसकी नर्वस सिस्टम के लिए बहुत अच्छा है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें।
न्यूट्रिशन रखें ठीक
पैरेंट्स न्यूट्रिशन का ध्यान रखें। बच्चों के लिए घर का बना ताजा और संतुलित खाना ही सबसे बेहतर होता है। उन्हें बाहर का कोई भी प्रोसेस्ड या पैकेज्ड फूड बच्चों के लिए अलाउड नहीं होना चाहिए, उन्हें सिर्फ और सिर्फ घर का ही खाना दें।
रूटीन न करें गड़बड़
बच्चे का रूटीन पूरी तरह सेट होना चाहिए। यानी हर दिन एक तय समय पर सोना और तय समय पर उठना जरूरी है। अगर बच्चा एक दिन 12 बजे सोता है, दूसरे दिन 1 बजे और फिर तीसरे दिन 2 बजे, तो यह बदलाव उसके दिमाग पर नकारात्मक असर डालता है। ऐसा रूटीन बच्चे के ब्रेन के लिए किसी शॉक लग सकता है इसलिए इस बात का ध्यान रखें।
पैरेंट्स इस बात का रखें ध्यान
अगर आप ऊपर बताई गई पांचों जरूरी चीजों को नजरअंदाज कर रहे हैं, तो इसका सीधा असर बच्चे के व्यवहार पर पड़ेगा। ऐसा बच्चा अक्सर चिड़चिड़ा हो सकता है और जरूरत से ज़्यादा टैंट्रम भी दिखा सकता है। इसलिए पैरेंट्स को चाहिए कि इन बातों को हल्के में न लें और मानसिक विकास के लिए यह जरूरी है।









