PM Modi–CM Yadav Appeal Effect: उज्जैन सिंहस्थ निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, ₹6750 का सफर ₹250 में
उज्जैन में सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, जिससे ₹6750 का सफर मात्र ₹250 में पूरा हुआ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद उज्जैन जिला प्रशासन ने पेट्रोल-डीजल की बचत को लेकर पहल शुरू कर दी है। इसके तहत बुधवार से सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारी अलग-अलग वाहनों की बजाय एक ही गाड़ी में सफर कर रहे हैं।
बुधवार सुबह संभागायुक्त और सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्र, यूडीए सीईओ संदीप सोनी, तहसीलदार आलोक चोरे, जल संसाधन विभाग के ईई मयंक सिंह, योगेश बिरला, अवनेंद्र सिंह और ट्रैफिक डीएसपी दिलीप सिंह परिहार सहित करीब 15 अधिकारी एक साथ अर्बेनिया वाहन में सवार होकर 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र के निरीक्षण पर पहुंचे।
एक सप्ताह से रोज किया जा रहा निरीक्षण
सिंहस्थ कार्यों का पिछले एक सप्ताह से अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। अब तक प्रतिदिन कमिश्नर, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, एसडीओ सहित पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी अलग-अलग लगभग 15 वाहनों के काफिले के साथ मौके पर पहुंचते थे। इस दौरान अधिकारी करीब 16 किलोमीटर का सफर तय करते थे।
अब समझिए कैसे हुई खर्च में कटौती
15 अधिकारी रोज सिंहस्थ क्षेत्र में लगभग 16 किलोमीटर का निरीक्षण दौरा करते हैं। इससे पहले वे अपने-अपने बंगले से घाट तक भी 5 से 7 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। अधिकांश अधिकारी इनोवा कारों का उपयोग करते हैं, जिनका औसत लगभग 10 किलोमीटर प्रति लीटर माना जाता है। निरीक्षण के दौरान वाहनों में एसी भी लगातार चालू रहता है, जिससे एक वाहन पर करीब 4 लीटर पेट्रोल या डीजल की खपत होती है। इस हिसाब से प्रति कार लगभग 450 रूपये खर्च मानते हुए कुल रोजाना करीब 6,750 रूपये का ईंधन खर्च होता था।
वहीं, अब अधिकारियों ने बुधवार से ट्रैवलर बस से सफर शुरू किया है। पहले दिन इस बस से 12 किलोमीटर का दौरा किया गया, जिसमें लगभग ढाई लीटर डीजल की खपत हुई, जिसकी लागत 250 रूपये से भी कम रही। हालांकि यह ट्रैवलर बस 4,100 रूपये प्रतिदिन के किराए पर ली गई है।
टीम भावना भी मजबूत होगी
मेला अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है। पहले अलग-अलग विभागों के अधिकारी अपनी-अपनी गाड़ियों से निरीक्षण के लिए पहुंचते थे, जिससे ईंधन की खपत और सरकारी धन का अनावश्यक व्यय बढ़ता था। अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे, जिससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि टीम भावना भी मजबूत होगी।
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि पहले वाहनों के काफिले के कारण ट्रैफिक पर भी दबाव पड़ता था। अब एक ही बस में सभी अधिकारियों के साथ यात्रा करने से ईंधन की बचत के साथ-साथ जाम जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी। उन्होंने इस पहल को एक सकारात्मक और अनुकरणीय कदम बताया।









