परेशानी में पोस्ट ऑफिस-लोग आते रहे, जाते रहे, एक ही जवाब तीन दिन बाद आइए

तीन दिन तक लिंक फेल रहेगी, कामकाज नहीं होगा
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दोपहर बाद कोई नजर नहीं आया, इक्का-दुक्का कर्मचारी ही थे
अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। देवासगेट का मुख्य डाकघर, आप जाएंगे तो जवाब मिलेगा लिंक फेल है। सोमवार को कुछ ऐसा ही हुआ। लोग अपना काम लेकर गए तो जवाब दिया गया कि तीन दिन तक लिंक फेल रहेगी, चौथे दिन आइए। यदि ऐसा है तो डाकघर के जवाबदारों को बाहर बोर्ड पर सूचना देना चाहिए, सोशल मीडिया कब काम आएगा। जो लोग अपना काम छोड़ कर आए थे, वे कितने परेशान हुए इसकी जानकारी अधिकारियों को भी नहीं होगा।
अक्षर विश्व को सूचना मिली कि देवासगेट डाकघर में काम नहीं हो रहे हैं। लोगों को टका सा जवाब देकर रवाना किया जा रहा है। सच्चाई जानने के लिए टीम ने दौरा किया। ग्राहक बन कर पूछा कि हमें स्पीड पोस्ट करना है क्या करना पड़ेगा? चश्मे वाले सज्जन ने जवाब दिया उधर खिड़की पर होता है, लेकिन आज नहीं होगा। क्यों क्या बात है? जवाब मिला, लिंक फेल है तीन दिन बाद आइए। इसके पहले कि जिज्ञासा शांत की जाती, उन्होंने मुंह घुमा लिया।
अन्य विंडो पर जाकर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई उपलब्ध नहीं हुआ। अलबत्ता विंडो के पीछे दो तीन लोग खड़े थे जो चर्चा में मशगूल थे। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं कि कौन आ रहा है कौन जा रहा है। काफी देर तक इंतजार किया गया, लेकिन विंडो पर कोई नहीं आया। इधर आलम यह था कि बहुत से लोग अपनी समस्या और काम लेकर डाकघर के भीतर आ रहे थे। वे भी निराश होकर गए।
परेशानी कलेक्टर को बताएं, कार्रवाई होगी
यदि आप देवासगेट जाएंगे और डाकघर ढूंढेंगे तो मिलेगा ही नहीं। कारण यह है कि बस वालों ने डाकघर के गेट को घेर रखा है। गेट के सामने ही अंचल में जाने वाली बसें आकर खड़ी जाती हैं। यदि आपको किसी ने पता बता दिया तो आप भीतर प्रवेश नहीं कर सकते। यदि आप वाहन से हैं तो बहुत दिक्कत आएगी। यहां स्थिति यह है कि कई बार डाकघर में आने वाले लोगों ने बस चालकों और परिचालकों से बस हटाने को कहा, लेकिन वे बस हटाने के बजाय लड़ने पर उतारु हो गए। यानी इस इलाके में बस वालों की शुद्ध रूप से दादागिरी है। वे किसी की नहीं सुनते। डाकघर के जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि वे बस वालों को यहां से हटाएं। यदि वे दादागिरी करते हैं तो अपनी बात कलेक्टर को बताएं। यकीनन वे कार्रवाई करेंगे।
आपको तो जवाब मिला, हमें तो…
दूध तलाई इलाके में रहने वाले गगन कुमार से बातचीत की गई। वे बहुत भन्नाए हुए थे। बोले, आपको तो बता भी दिया है कि लिंक फेल है हमको को बताने वाला ही कोई नहीं था। किससे पूछें। गगन भी स्पीड पोस्ट करने के लिए आए थे। उनका कहना था कि यदि किसी को बताने में दिक्कत है तो बाहर इतने सारे बोर्ड लगा रखे हैं, एक बोर्ड और लगवा देते। हमें आपसे पता चल रहा है कि लिंक फेल है।
योजनाओं की जानकारी देने वाला
सुमित्रा बाई और पुष्पा गौतम का कहना था कि उन्हें बचत के लिए योजनाओं की जानकारी चाहिए थी। यहां कोई बताने वाला नहीं था। हर्षित व्यास ने बताया कि वे भी स्पीड पोस्ट करना चाहते थे। एक कर्मचारी ने बताया कि लिंक फेल चल रही है। पता नहीं, कब खुलेगी। हर्षित ने बताया कि वे दो चक्कर लगा चुके हैं। यदि लिंक नहीं खुल रही है तो अधिकारी ध्यान दें। किसी भी विंडो पर एक व्यक्ति को बैठाएं ताकि वह जानकारी दे सकें।
किससे पूछें, कोई हो तो सही
डाकघर की व्यवस्था, जनता की परेशानी, बदबू और प्रवेश द्वार पर दिक्कत। इस संबंध में किससे बात की जाए, कोई हो तो सही। अधिकारी के कक्ष में भी कोई नहीं था। किससे बात की जाए। जिनसे बात की गई उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। खैर, जनता को उम्मीद है कि डाकघर के अधिकारी अव्यवस्थाओं पर ध्यान देंगे। उम्मीद है कि डाकघर के प्रवेश द्वार पर जो बसें खड़ी होती है उन्हें हटाया जाएगा। जो नालियां सड़ांध मार रही है उन्हें साफ कराया जाएगा।
डाकघर की हालत देख कर तो यही लगता है इसे देखने वाला शायद कोई नहीं है। आप जैसे ही प्रवेश करेंगे तो बदबू का भभका आएगा। मुख्य गेट से अंदर के गेट वाले रास्ते के दोनों तरफ नालियां हैं। यहां गंदगी सड़ रही है। इतनी बदबू आती है कि आपको रास्ता पार करना मुश्किल हो जाता है। यदि आप कुछ देर के लिए खड़े हो गए तो हालत खराब हो जाएगी। ऐसा लगता है कि बरसों से इन नालियों की सफाई नहीं हुई है। लोगों का कहना था कि डाकघर के जिम्मेदार अधिकारी भी यहां से गुजरते हैं, क्या उन्हें बदबू नहीं आती? यदि आती है तो सफाई क्यों नहीं कराते?









