सोशल मीडिया पर छाया विधायक पुत्र का दर्शनकांड प्रशासन और राजनेताओं पर यूजर्स निकाल रहे भड़ास

उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में सावन के दूसरे सोमवार को जबरन घुसकर दर्शन करने वाले इंदौर की तीन नंबर विधानसभा के विधायक गोलू शुक्ला और उनके पुत्र रुद्राक्ष की हरकत पर सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। फेसबुक इंस्टाग्राम पेज पर लोग जमकर भड़ास निकाल रहे हैं। इसमें राजनेताओं के साथ प्रशासन को भी निशाना बनाया जा रहा है।
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आइए पढ़ते हैं अक्षरविश्व के इंस्टाग्राम पेज पर आए चुनिंदा कमेंट्स को
आम आदमी सिर्फ धक्का खाए कलेक्टर के राज में और बाकी पैसे वाले आसान लगा कर बैठे मंदिर के गर्भगृह में। कोई फर्क नहीं पड़ता इनको, एक मंदिर में दो चेहरे देखने को मिलते हैं प्रशासन के। इनके आगे कोई कुछ नहीं बोल सकता । बाबा महाकाल इनको सद्बुद्धि दे ।
-आशीष मीणा
पैसों और पावर का नाम सुना है। बस ये दोनों हैं उसके पास तो उसको किसी जांच से भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
-संदीप सिंह
महाकाल मंदिर अब सिर्फ वीआईपी लोगों के लिए है। जैसे पहले के समय में राजा-महाराजा और जमींदार लोगों को ही अंदर जाकर पूजा करने की अनुमति होती थी। ये इंदौर नहीं उज्जैन है लाला समझ जा नहीं तो भस्म हो जाएगा सब कुछ।
– सार गंगवाल
मोदी जी को सभी मन्दिरों में वीआईपी दर्शन बंद करवा देना चाहिए । भगवान के मंदिर में सभी आम नागरिक हैं तो फिर वीआईपी दर्शन क्यों । भगवान के दरबार में सभी एक जैसे ही है
-देव दुबे
जो लोग मंदिर के गर्भगृह में जाकर शिवलिंग छूने की लालसा रखते हैं ंंं,उनको यही बोलूंगा कि पहले घर के मां-बाप को पूज लो फिर गर्भगृह की नौटंकी करना। सब को अंदर जाना है। भीड़ को कर दो अंदर और सारी व्यवस्था भंग कर दो। मंदिर आज इतना क्यों चल रहा है भीड़ को भी देखना पड़ता है सारे अंदर घुस गए तो क्या मतलब मंदिर की देख रेख करने का।
-अंकुश हरीश कुमार भाटी
आमजनता के लिए भी गर्भगृह में प्रवेश शुरू कर देना चाहिए। सबको पूजा का लाभ देना चाहिए। सरकार खुद नियम बनाती है, फिर खुद ही नियम का पालन नहीं करती। ऐसे तो इंसान दादागीरी करके घुस जाएगा।
-परिधि अग्रवाल
महादेव ने कभी नहीं कहा है कि मेरे दर्शन वीआईपी को अलग मिलेंगे और आम जनता को अलग नियम से। दर्शन की एक समान व्यवस्था होना चाहिए, या तो सबको गर्भगृह में दर्शन मिले, या किसी को नहीं।
-विवेक सिन्हा
इसमें क्या जांच होगी? पकड़ कर जेल में डालो, अभी कोई बेचारा गरीब थोड़ी लाइन में इधर उधर हो जाए तो उसको पीटकर पीटकर केस बना देते हैं।
– अमित कुमार
आम आदमी को विरोध करना चाहिए। जब मुख्यमंत्री नियम मानते हंै तो बाकी के लिए बदमाशी क्यों
-गौरव
सब पैसे और पावर का चक्कर है बाबू। गरीब लोगों को तो कीड़ा-मकोड़ा समझा जाता है, पैसे वाले आराम से बैठकर पूजा कर सकते हैं मतलब भगवान सिर्फ पैसे वालों के हैं, बाकी किसी के नहीं।
– चैनसिंह ठाकुर
भक्त और भगवान के बीच हैसियत के बेरिकेड्स
कल एक रील में यह दृश्य देख विचार आया महाकाल मंदिर को किस तरह की प्रयोग शाला बना रखा है। देश के किस ज्योतिर्लिंग में इतने बैेरिकेड्स लगे हैं, कोई एक नाम बताइए। सबसे पहला बैरिकेड उन लोगों के लिए जो बिना किसी जान-पहचान के सीधे मन में आस्था लेकर बिना टिकट दर्शन करते हैं। उनको सबसे दूर से भोलेनाथ के दर्शन करवाए जाते हैं । फिर है दूसरा बैरिकेड जहां 250 रुपए टिकट लेकर, सामान्य प्रोटोकॉल वाले दर्शनार्थियों को दर्शन कराए जाते हैं।
फिर आया नंदी महाराज के जस्ट पीछे वाला बैरिकेड, इसमें आते थोड़े बहुत रसूख, जुगाड़ वाले भक्त, जो नंदी जी के पीछे बैठ कर दर्शन , ध्यान करते हैं । फिर आता है नंदी हाल प्रोटोकॉल विशिष्ट दर्शनार्थी , बड़े अधिकारी या उनके परिवार जन, न्यायिक प्रोटोकॉल दर्शनार्थी यहां रहते हैं ।
फिर सबसे अंत में आता जलद्वार प्रोटोकॉल ,जहां एकदम दहलीज से आप भगवान के दर्शन कर सकते, आखिर इतने विभाजन वर्गीकरण की जरूरत क्यों हैं। जब तमाम ये झुनझुने प्रशासन बंद कर देगा तो कोई बेमतलब दर्शन के लिए दबाव बनाएगा भी नहीं, भोलेनाथ सबके हैं , इनको बैरिकेड्स में मत बांटिए।
-सौदान सिंह कराड़ा









