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विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर विशेष : बीमारियों के इलाज में होम्योपैथी की प्रभावशीलता

एक सरल और सुलभ उपचार पद्धति के रूप में होम्योपैथी को अनेक देशों में अपनाया गया है। लगभग 80 देशों में इस पद्धति का प्रयोग किया जाता हैं। होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति की स्वीकार्यता तथा लोकप्रियता को और अधिक बढ़ाने में रिसर्च और प्रोफिशिएंसी की महवपूर्ण भूमिका रहेगी। अनेक पद्धतियों से इलाज करके निराश हुआ व्यक्ति, होम्योपैथी के चमत्कार से लाभान्वित हुआ, ऐसे अनुभव लोग साझा करते हैं।

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आरोग्यं परमं भाग्यं, स्वास्थ्यं सर्वार्थ साधनम: अर्थात अच्छा स्वस्थ सबसे बड़ा सौभाग्य है, ॥शद्यद्बह्यह्लद्बष् 2द्गद्यद्यठ्ठद्गह्यह्य का यह दृष्टिकोण भारत की परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों तथा होम्योपैथी में देखने को मिलता है। लगभग एक दशक पहले शुरू की गयी राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत भृत्य चिकित्सा पद्धतियों के साथ साथ होम्योपैथी की पहुंच और अधिक व्यापक हुई है।

विश्व होम्योपैथी दिवस होम्योपैथी के योगदान और स्वास्थ्य सेवा पर इसके प्रभाव का सम्मान करने का एक अवसर है। हर साल विश्व स्तर पर आयोजित होने वाला यह दिवस होम्योपैथी के संस्थापक डॉ. सैमुअल हैनीमैन की उपलब्धियों का स्मरण करता है और इस वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली के बारे में जागरुकता बढ़ाता है। इस दिन को विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है जो प्राकृतिक रूप से बीमारियों के इलाज में होम्योपैथी की प्रभावशीलता को उजागर करते हैं।

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होम्योपैथी के प्रणेता डॉ. सैमुअल हैनीमैन की जयंती के उपलक्ष्य में हर साल 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। उनके अभिनव सिद्धांतों ने चिकित्सा के लिए एक समग्र और प्राकृतिक दृष्टिकोण की नींव रखी, जिससे दुनिया भर में लाखों लोगों को लाभ मिल रहा है।

होम्योपैथी चिकित्सकों का मत है कि इस पद्धति का उपयोग अक्सर एक व्यापक श्रेणी की बीमारियों के इलाज के लिए दवा के पूरक रूप में किया जाता है। फिर भी कुछ बीमारियों में इसे ज्यादा कारगर माना जाता है। इन बीमारियों में एलर्जी, दमा, वात रोग, चिंता और अवसाद, क्रोनिक फटीग सिंड्रोम, माइग्रेन और सिरदर्द, पाचन विकार, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस), त्वचा की स्थिति (जैसे एक्जिमा और सोरायसिस), मासिक धर्म संबंधी विकार, जैसे मासिक धर्म में ऐंठन और अनियमित अवधि, श्वसन संक्रमण, जैसे सर्दी और फ्लू आदि। लेकिन अपनी विशिष्ट स्थिति के लिए उपचार का सर्वोत्तम तरीका निर्धारित करने के लिए एक योग्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करना जरूरी है। यह दुनिया के कई देशों में प्रचलित है और इसने भारत में भी सर्वाधिक लोकप्रियता हासिल की है।

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भारत में होम्योपैथी के उपयोग का एक लंबा इतिहास रहा है। अनुमान है कि भारत में 15 करोड़ से अधिक लोग होम्योपैथी का उपयोग अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए करते हैं। उदाहरण के लिए, भारत में 300,000 से अधिक पंजीकृत होम्योपैथिक डॉक्टर और 7,000 से अधिक होम्योपैथिक अस्पताल और औषधालय हैं।

हर समय कारगर है होम्योपैथी चिकित्सा

उज्जैन के होम्योपैथी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ मारोठिया बताते हैं कि होम्योपैथी चिकित्सा हर समय कारगर है। सही दवा एवं सही मात्रा में ली गई दवा शरीर की सुरक्षा पद्धति को सक्रिय बनाती है और उन्हें स्वयं ठीक होने में मदद करती है। होम्योपैथी दवाओं का बाजार तेजी से बढ रहा है। होम्योपैथी उपचार अब कंपनियों द्वारा उनकी व्यापक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के तहत दिए जा रहे हैं। चिकित्सा की एक वैकल्पिक प्रणाली होने से आज होम्योपैथी चिकित्सा की एक पूरक प्रणाली है और इसका उपयोग एलोपैथी के साथ भी किया जा सकता है। साथ ही यह बच्चों सहित सभी पुरुषों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए प्राकृतिक और सुरक्षित है। डॉ. मारोठिया के अनुसार होम्योपैथी सुरक्षा और अपने उपयोगिता के प्रभावशाली ट्रैक रिकार्ड के साथ न केवल भविष्य की दवा है, बल्कि निवारक स्वास्थ्यवर्धक के रूप में भी उपयोगी है।

डॉ. सिद्धार्थ मारोठिया
होम्योपैथी चिकित्सा विशेषज्ञ

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