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जाता मानसून किसानों का कर गया नुकसान, सोयाबीन का उत्पादन घटा

पहले ट्रैक्टर-ट्रॉली में आता था पीला सोना, अब ई-रिक्शा में लेकर पहुंच रहे किसान

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किसान बोले- लागत भी नहीं निकल रही

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मानसून के अंतिम दौर की बारिश ने क्षेत्र की मुख्य उपज सोयाबीन पर संकट खड़ा कर दिया। लगातार बारिश से उत्पादन घट गया है और किसानों की लागत तक नहीं निकल रही है। हाल यह है कि मंडी में ट्रैक्टर-ट्रॉली में आने वाली सोयाबीन उपज अब ई-रिक्शा और छोटे लोडिंग वाहन में पहुंच रही है।

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अमूमन इन दिनों में कृषि उपज मंडी में सोयाबीन की बंपर आवक होती है। इसके चलते ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लाइन लग जाती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। शुक्रवार को छुट्टी के बाद खुली मंडी में गिने-चुने किसान ही उपज लेकर पहुंचे। बारिश के चलते सोयाबीन का उत्पादन इतना घटा है कि ट्रैक्टर की जगह उन्हें ई-रिक्शा या छोटे लोडिंग वाहन लेकर आना पड़ा। किसानों का कहना था कि सोयाबीन का दाना छोटा और काला होने से लागत भी नहीं निकल रही है। जो फसल खेत में है वह भी खराब हो रही है।

पांच बीघा खेत में 6 क्विंटल उपज

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पानबिहार से आए किसान ओमप्रकाश सोड़ावत फड़ पर अपनी सोयाबीन की बोरियां नीचे रख रहे थे। चेहरे पर उदासी साफ देखी जा सकती थी। इसके बाद उन्होंने बोरियां खोलना शुरू किया। चर्चा में ओमप्रकाश ने बताया बारिश के कारण ५ बीघा में ६ क्विंटल सोयाबीन हुई है। दाना काला पड़ गया है। पिछले साल बारिश की लंबी खेंच ने फसल बिगाड़ दी थी, इस बार ज्यादा बारिश ने सोयाबीन बर्बाद कर दी। 14 हजार की दवाई का छिडक़ाव किया, १० हजार कटाई के दिए। अब लागत भी नहीं निकल रही। अब भाव जो भी मिलें, बेचना तो है। कुल मिलाकर इस बार जमकर नुकसान हुआ है।

दो बीघा में पांच कट्टी ही निकली

दो बीघा में पांच कट्टी सोयाबीन निकला है जो डेढ़ क्विंटल के आसपास है। दाने पर भी दाग पड़ गए हैं। अब भाव क्या मिलेंगे, यह तो कहना मुश्किल है। कुल मिलाकर बारिश ने सब खराब कर दिया।
रमेश, कृषक, ग्राम बामनिया

तीन बीघा में पांच क्विंटल सोयाबीन निकली है, जबकि सामान्य रूप से 15 क्विंटल की आवक होती है। 6 हजार रुपए क्विंटल का बीज लेकर बोया लेकिन बारिश के कारण उत्पादन घर गया।
देवीलाल, कृषक, बेलाखेड़ा

नुकसान की जानकारी का पता नही
अभी फसल में नुकसान की जानकारी का पता नहीं चला है। फसल कटने के बाद ही सही स्थिति पता चलेगी।
– आरपीएस नायक, डीडीए

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