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वन मेले में बिक रहा सेंट्रल जेल के कैदियों का ‘हुनर’

बंदियों ने अपने हाथों से बनाए आर्ट पीस, पीपल के पत्ते पर पेंटिग, योगा दरी, खादी की चादर और कपड़े

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विशाल जूनवाल उज्जैन। पहली बार शहर में दशहरा मैदान पर लगे वन मेले में यूं तो कई अलग-अलग शहरों की कई खूबसूरत चीजें बिकने के लिए आई हैं लेकिन एक स्टॉल ऐसा भी है जिस पर कैदियों का हुनर बिक रहा है। यहां पहुंचने वाले शहरवासी भी इसकी प्रशंसा किए बिना नहीं रह पा रहे। कैदियों के इस हुनर को लोगों को जबर्दस्त प्रतिसाद भी मिल रहा है।

दरअसल यह स्टॉल हैं भैरवगढ़ स्थित केंद्रीय जेल का। यहां पर जेल के अंदर रहते हुए उनके द्वार बनाए गए कॉटन सूट के कपड़े, मिट्टी और क्ले को मिलाकर बनाए गए आर्ट पीस, पीपल की पत्तियों को सूखाकर बनाए चित्र, एलईडी बल्ब, मसाले, योगा दरी, खादी के चादर सहित अन्य वस्तुए बेची जा रही हैं जिसे मेले में आने वाले शहरवासियों का भी अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। स्टॉल संभालने की जिम्मेदारी टेक्निकल इंस्ट्रक्टर सौरभ शर्मा, वार्डन नेहा डागा और उनके सहयोगी अजेंद्र यादव व रामकुमार उईके के हाथों में है जो जेल अधीक्षक मनोज साहू और सहायक जेल सुरेश गोयल के निर्देशन में काम संभाले हैं। सौरभ एवं नेहा ने बताया कि पिछले तीन दिनों में लोगों का जबर्दस्त रिस्पांस मिला है और अच्छी खरीदारी की है। उम्मीद आखिरी दिन भी जबर्दस्त प्रतिसाद मिलेगा।

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पीपल के पत्ते पर उकेरते हैं चेहरा

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सौरभ शर्मा ने बताया कि बंदियों द्वारा पीपल के पत्ते पर तस्वीर भी बनाई जाती है। इसके लिए जेल परिसर मेें लगे पीपल के पेड़ से गिरने वाली पत्तियों का ही इस्तेमाल किया जाता है। पत्तियों को पेड़ों से तोड़ा नहीं जाता। इसके बाद इसे सूखाकर नेट फॉर्मेशन में लाया जाता है। इसके बाद बंदी इस पर अपना हुनर दिखाते हैं। इसके अलावा ऑर्डर पर भी पोट्रेट तैयार किए जाते हैं। एक पत्ते पर तस्वीर बनाने के लिए 350 रुपए लिए जाते हैं। इसके बाद अपना फोटो भेजना होता है और फिर बनाकर इसे जेल परिसर स्थित आउटलेट से प्राप्त किया जा सकता है।

एक साल की गारंटी पर एलईडी 
जेल में बंदियों द्वारा एलईडी बल्ब भी तैयार किए जाते हैं। 9 वॉट का बल्ब 70रुपए, 12 का 145 और 15 वॉट का बल्ब 155 रुपए में बेचा जाता है। जिस पर एक साल की वारंटी भी होती है। यदि एक साल के अंदर यह खराब होता है तो इसे चेंज किया जाता है। बल्ब पर सीजेयू यानी सेंट्रल जेल उज्जैन भी लिखा होता है। इस प्रोडक्ट को निर्विकार नाम दिया गया है।

मसालों का भी बोलबाला
कैदियों द्वारा हाथों से मसाले भी तैयार किए जाते हैं। इनकी विशेषता यह है कि इन्हें हाथों से ही पीसा जाता है, मशीन का उपयोग नहीं किया जाता। ऐसा इसलिए क्योंकि मशीन में पीसने पर वह स्वाद खो देता है। विशेष रूप से हल्दी, लाल मिर्च, धनिया, गरम मसाले तैयार किए जाते हैं। क्वालिटी चैक की बात करें तो पाक कला में पारंगत बंदी इसे चैक करते हैं जिसके बाद इसे बेचने के लिए भेजा जाता है।

40 बंदियों की टीम
टेक्निकल इंस्ट्रक्टर सौरभ शर्मा ने बताया कि जेल में 40 बंदियों की टीम है जो इन चीजों को बनाती है। इसके अलावा 40 लोगों को रिजर्व में हमेशा तैयार रहते हैं। यदि किसी बंदी की तबीयत खराब हो और वह काम ना कर पाए तो रिजर्व टीम से बंदी उसकी जगह लेता है। इसके अलावा यदि कभी बड़ा ऑर्डर आता है तो पूरी टीम उसे पूरा करने में जुट जाती है।

प्रोडक्ट और उनकी कीमतें
३ बाय ६ की पंजा दरी जिसकी कीमत 1 हजार रुपए है, जबकि 4 बाय 6 की दरी की कीमत 1200 रुपए है। इसे बनाने में 10 से 12 दिन का समय लगता है। एक दरी को दो टीम मेंबर मिलकर बनाते हैं। इसके अलावा खादी की योगा दरी की कीमत 400 रुपए है। वहीं खादी की चादर 250रुपए में उपलब्ध है। इसके अलावा कार पेंटर, फर्नीचर बनाने का काम भी जेल में ही किया जाता है।

जेल परिसर में आउटलेट
वार्डन नेहा डागा ने बताया कि जेल वार्ड में इन चीजों के लिए आउटलेट भी खोला गया है। जिसे खुले हुए 10 साल से ज्यादा वक्त हो चुका है। यहां भी आम शहरवासी इन चीजों को खरीद सकते हैं और बनवाने के लिए ऑर्डर भी दे सकते हैं। आउटलेट सुबह 10 बजे खुलता है और शाम 7 बजे बंद होता है।

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