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The Tomorrow War Review

Movie Review: द टुमारो वॉर

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कलाकार: क्रिस प्रैट, यूवॉन स्ट्रॉवस्की, जे के सिमन्स आदि।

निर्देशक: क्रिस मैकके

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ओटीटी: प्राइम वीडियो

रेटिंग: ***1/2

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जुलाई का महीना है। मॉनसून अभी उत्तर भारत पहुंचा नहीं है। मुंबई में अच्छी बारिश है और दिल्ली आग की तरह तप रहा है। कोरोना का डर भी अभी गया नहीं है। ऐसे में घर में ही रहकर अगर इस वीकएंड कोई अच्छी फिल्म देखने का मन करे तो पूरे परिवार के साथ देखने लायक फिल्म है, ‘द टुमारो वॉर’। कोरोना ने पूरी दुनिया में लोगों को परेशान किया है। ना जाने कितने घर तबाह किए हैं। साथ ही इस संक्रमण काल ने लोगों को परिवार का महत्व भी समझाया है। फिल्म ‘द टुमारो वॉर’ हालात से जूझते एक परिवार की ही कहानी है। फिल्म का पोस्टर और इसके प्रचार को देखते हुए लगता है कि ये आज के लोगों के भविष्य में जाकर कोई लड़ाई लड़ने की कहानी है। लेकिन, ये सिर्फ फिल्म का एक पहलू है। फिल्म का असली डीएनए है एक पिता और एक बेटी का रिश्ता, जो मजबूत होता है मौत से मुकाबला करते हुए।

फिल्म ‘द टुमारो वॉर’ डैन फॉरेस्टर की कहानी है। वर्तमान में वह एक स्कूल में टीचर है। एक नौ साल की उसकी बेटी है और एक खूबसूरत सी बीवी है। एक फुटबॉल मैच के दौरान मैदान में भविष्य के कुछ लोग उतरते हैं। पता चलता है कि अब से करीब 30 साल बाद के भविष्य में मानवता पर खतरा है। धरती पर इंसानियत ही खत्म हो जाएगी अगर वर्तमान के लोगों ने भविष्य में जाकर इंसानों को नहीं बचाया तो। जिन लोगों को भविष्य की इस लड़ाई में जाने के लिए चुना जाता है, उनमें डैन फॉरेस्टर भी शामिल है। भविष्य का युद्ध भयानक है और जिनसे मुकाबला है वे जीव और भी भयानक हैं। सब कुछ सांसें रोक देने वाला होता है औऱ इसी बीच डैन का सामना होता है अपनी बेटी से। जिसे वह नौ साल की छोड़कर आया था। वह यहां भविष्य में सेना की कर्नल है। बस फिल्म यहीं से दर्शकों को अपनी पकड़ मे लेना शुरू कर देती है।

मार्वेल सिनेमैटिक यूनीवर्स के लोकप्रिय किरदार स्टार लार्ड के चलते पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना चुके अर्नाल्ड श्वार्जेनगर के दामाद अभिनेता क्रिस प्रैट ने फिल्म ‘द टुमारो वॉर’  को एक तरह से लीड किया है। क्रिस प्रैट का परदे पर होना ही अपने आप में दर्शकों के लिए एक आकर्षण बन जाता है। और, जैसे जैसे उनके साथ जे के सिमन्स, सैम रिचर्डसन, एडविन हॉज आदि जुड़ना शुरू होते हैं, कहानी का ताना बाना भावुक होने लगता है। लेकिन फिल्म ‘द टुमारो वॉर’ का असली टर्निंग प्वाइंट है डैन का भविष्य में अपनी बड़ी हो चुकी बेटी से आमना सामना जिसने अपने पिता का भविष्य देख रखा है। उसने अपने माता और पिता का बिछुड़ना और अपने पिता का मरना भी देख रखा है क्योंकि वह वर्तमान से तीन दशक आगे है। लेकिन, डैन के पास अब भी समय वर्तमान में लौटकर वह सब ठीक कर देने का जिसे उसकी भविष्य में मिली उसकी बेटी जी चुकी है। फिल्म की कहानी का ये प्लॉट बहुत ही मार्मिक है और फिल्म ‘द टुमारो वॉर’ की सबसे बड़ी यूएसपी भी।

अभिनेता क्रिस प्रैट को फिल्म ‘द टुमारो वॉर’ में देखना उनके चाहने वालों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। ये समय संकट का है। विज्ञान और विश्वास दोनों कसौटी पर कसे जा रहे हैं। क्रिस प्रैट का किरदार भी यहां इन्हीं दोनों कसौटियों पर कसा जा रहा है। क्रिस ने दोनों कसौटियां पूरे के पूरे नंबर्स के साथ पास की हैं। एक बेटी के पिता के रूप में क्रिस को देखना भावुक करता है तो अपने पिता से मदद मांगने वाले सीन में भी वह दर्शकों का दिल जीत लेते हैं। आखिर वाला सीन तो वाकई बहुत मर्मस्पर्शी बन पड़ा है जब तीन पीढ़ियां एक साथ एक फ्रेम में होती है।

फिल्म ‘द टुमारो वॉर’ में क्रिस प्रैट के अलावा यूवॉन स्ट्रॉवस्की और जे के सिमन्स भी खास भूमिकाओं में हैं। यूवॉन ने फिल्म में क्रिस प्रैट की बड़ी हो चुकी बेटी का शानदार किरदार निभाया है। यूवॉन का अभिनय यहां बहुत ही स्वाभाविक है, तब भी जब वह अपने पिता से रिश्ते खट्टे होने की बात उजागर करती है और तब भी जब वह मौत के मुहाने पर खड़ी होती है। भविष्य व वर्तमान की इस कहानी में ‘लोकी’ सीरीज सा ट्राइम ट्रैवल तो है पर यहां इसका रोमांच बेहतर कुशल निर्देशन के अलावा इसीलिए भी हैं कि यहां भावनाएं बनाई हुई नहीं हैं। ये एक बहुत ही कुशलता से लिखी गई पटकथा में धीरे धीरे उगती हैं। एहसासों की इस फसल को पानी देने का काम किया है अभिनेता सिमन्स में जो यहां क्रिस प्रैट के पिता के रोल में हैं। क्लाइमेक्स में उनके किरदार का अपने बेटे की जान बचाने के लिए कुर्बानी देने को तैयार होने वाला दृश्य शानदार है। चार्ली के किरदार में सैम रिचर्ड्सन और डोरियन के किरदार में एडविन हॉज ने भी फिल्म को अच्छा सपोर्ट दिया है।

दमदार कहानी और उम्दा अभिनय वाली फिल्म ‘द टुमारो वॉर’ में क्रिस मैकके का निर्देशन भी उम्दा रहा है। केन बारथेलमे के बनाए एलियंस के साथ इंसानी कलाकारों का मिक्स अप ही इस फिल्म के निर्देशन की जान है। दुनिया की तमाम महाशक्तियों के संयुक्त मिशन बेस पर एक ही ऊंचे पोल पर लहराते झंडे भले कुछ सेकंड के लिए ही फिल्म में दिखते हों लेकिन ये निर्देशक के दृष्टिकोण की झलक दिखाने में कामयाब रहते हैं। फिल्म में कहीं कहीं जरूर फिल्म ‘वॉर ऑफ जेड’ के दृश्यों की याद आती है, लेकिन इसके बावजूद फिल्म को इसके विजुअल इफेक्ट्स ने काफी अच्छा सहारा दिया है। फिल्म की कमजोर कड़ियां बस इसका बैकग्राउंड म्यूजिक और संपादन है। फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय अपील देने के लिए इसके बैकग्राउंड म्यूजिक को सिर्फ वेस्टर्न म्यूजिक पर निर्भर नहीं रहना चाहिए था। खासकर रूस में फिल्माए गए दृश्यों में। फिल्म अभी दो घंटे से भी ज्यादा अवधि की है, ओटीटी रिलीज के हिसाब से इसकी अवधि थोड़ी कम की जा सकती है।

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