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एक सप्ताह में भस्मार्ती के दो सौदागर पकड़े, यह काम कोई अकेले का नहीं

महाकाल मंदिर के प्रशासक को अब पता चला कि मंदिर में भस्मार्ती बिक रही

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भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होती, महाकाल पुलिस भी पूछताछ नहीं करती

अक्षरविश्व न्यूजउज्जैन। अपराधी के पकड़ में आने के बाद पुलिस उसका पूरा इतिहास उगलवा लेती है। महाकाल मंदिर में भस्मार्ती के सौदागर पकड़ में तो आ रहे हैं, लेकिन अंदर की कहानी बाहर नहीं आने दी जा रही है। एक सप्ताह में खुद मंदिर प्रशासक ने उन दो किरदारों को बेनकाब किया है जिन्हें सुरक्षा के लिए लगाया गया है। एक कर्मचारी ने १६५०० रुपए लिए, जबकि मंदिर में ठेका लेने वाली कंपनी तीस दिन काम करने के बाद भी एक कर्मचारी को इतना पैसा नहीं देती।

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यानी भस्मार्ती एक ही दिन में महीने भर से ज्यादा की रकम दे रही है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यह काम किसी एक कर्मचारी या सुरक्षाकर्मी अकेला नहीं कर सकता। पूरी कड़ी है जो एक दूसरे जुड़ी हुई है। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति को पूछने का पूरा हक है। वह पता लगा सकती है कि भ्रष्टाचार किसके संरक्षण में पनप रहा है। करोड़ो का ठेका लेने वाली क्रिस्टल कंपनी क्या कर रही है। उसके सुपरवाइजर किस बात की तरख्वाह ले रहे हैं।

अनुमति से ज्यादा लोगों को दर्शन कराए

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मंदिर समिति के प्रशासक ने सीसीटीवी खंगाले तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। सोनू तिलवे नामक कर्मचारी सामने आया। भस्मार्ती में पांच लोगों ने अनुमति ली थी। सोनू ने तेरह लोगों को प्रवेश दिलाया। दर्शन करने वाले कोई फ्री में दर्शन करेंगे नहीं, लिहाजा कदाचरण का केस बना कर उसे निलंबित कर दिया गया। अभी तक यह खुलासा नहीं हुआ है कि इन अतिरिक्त लोगों ने कितनी राशि दी।

बैंगलुरु के परिवार से ली थी बड़ी रकम

क्रिस्टल कंपनी के कर्मचारी लवजीत की हिम्मत देखिए। उसने बेंगलुरु के एक परिवार को भस्मार्ती के दर्शन करवाने के लिए 16500 रुपए ले लिए। इसे भी पकड़ लिया गया। महाकाल पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। महाकाल मंदिर समिति और महाकाल पुलिस ने इतनी जहमत नहीं उठाई कि वह लवजीत से पूछ ले कि इस कांड में कौन-कौन शामिल हैं। भस्मार्ती का यह रैकेट कैसे चल रहा है।

मंदिर ही नहीं बाहर भी है रैकेट

भस्मार्ती में दर्शन कराने वालों का रैकेट सिर्फ मंदिर में ही नहीं है। प्रशासक जाग्रत हुए तो केस सामने आने लगे, अन्यथा यह रैकेट पिछले कई महीनों से सक्रिय है। इतनी सख्ती के बाद जब दो मामले पकड़ में आ गए तो सख्ती के पहले क्या हुआ होगा। सूत्रों का कहना है कि भस्मार्ती के दर्शन कराने वालों का यह रैकेट बाहर भी सक्रिय है। प्रशासक अपने मुखबिरों से तलाश कराए, कई लोग बेनकाब होंगे

हमने आरोपी महाकाल पुलिस को सौंपा है, जांच बैठाई है

भस्मार्ती के पूरे कांड पर चर्चा करने के लिए मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ से बात की गई। उन्होंने बताया कि लवजीत पकड़ में आया था, उसे महाकाल पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस को पूछताछ करना चाहिए। दूसरा आरोपी सोनू तिलवे मंदिर समिति का कर्मचारी है। उसे निलंबित कर दिया गया है, जांच बैठा दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि उसने कितने पैसे लिए।

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