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UPI पर चार्ज को लेकर बड़ा अपडेट, जानिए MDR का पैसा किसे मिलेगा

UPI पर चार्ज लगने की खबर के बाद डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर UPI पर चार्ज किस तरह के ट्रांजैक्शन पर लगेगा, इसका भुगतान कौन करेगा और इससे मिलने वाली रकम आखिर किसके पास जाएगी? UPI आज भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका बन चुका है। चाय की दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक, लोग कुछ ही सेकंड में QR कोड स्कैन करके भुगतान कर देते हैं। ऐसे में MDR यानी Merchant Discount Rate को लेकर सामने आई जानकारी ने कारोबारियों और आम लोगों का ध्यान खींचा है।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि MDR कोई सरकारी टैक्स या सेस नहीं है। इससे मिलने वाली रकम सरकारी खजाने में नहीं जाएगी, बल्कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़ी संस्थाओं के बीच तय व्यवस्था के अनुसार वितरित होगी।

MDR क्या होता है?

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MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया में मर्चेंट से लिया जाता है। जब कोई ग्राहक डिजिटल माध्यम से भुगतान करता है, तो उस पेमेंट को प्रोसेस करने के पीछे कई संस्थाएं काम करती हैं। इस पूरी व्यवस्था में बैंक, पेमेंट नेटवर्क, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और दूसरी तकनीकी संस्थाएं शामिल हो सकती हैं। MDR से मिलने वाला पैसा इसी पेमेंट इकोसिस्टम में काम करने वाली संस्थाओं के बीच तय व्यवस्था के मुताबिक बांटा जाता है। इसलिए MDR को सीधे सरकार की ओर से लगाया गया टैक्स समझना सही नहीं है।

क्या MDR का पैसा सरकार को मिलेगा?

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वित्त मंत्री के बयान के मुताबिक MDR से मिलने वाली रकम सरकारी खजाने में नहीं जाएगी। यह पैसा UPI और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं के बीच जाएगा। यानी MDR को सरकार के लिए नया टैक्स या सेस बताना अलग बात है, जबकि पेमेंट सिस्टम में लगने वाले शुल्क की संरचना अलग होती है। हालांकि, किसी भी शुल्क के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए यह देखना जरूरी होता है कि उसे किस पक्ष से लिया जा रहा है और उसकी अंतिम लागत व्यापारी या ग्राहक पर किस तरह पड़ती है।

UPI पेमेंट के पीछे इतना बड़ा सिस्टम कैसे काम करता है?

जब आप किसी दुकान पर UPI QR कोड स्कैन करते हैं, तो सिर्फ मोबाइल से पैसे भेजना ही पूरी प्रक्रिया नहीं होती। आपके बैंक खाते से भुगतान शुरू होने के बाद बैंकिंग और पेमेंट नेटवर्क के कई सिस्टम मिलकर ट्रांजैक्शन को पूरा करते हैं। रकम को सही खाते तक पहुंचाना, पेमेंट की पुष्टि करना और पूरे नेटवर्क को सुरक्षित रखना इस व्यवस्था का हिस्सा है। इसके अलावा लगातार बढ़ रहे डिजिटल ट्रांजैक्शन के साथ साइबर सिक्योरिटी और पेमेंट सिस्टम की विश्वसनीयता भी महत्वपूर्ण हो गई है।

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क्या आम लोगों से UPI चार्ज लिया जाएगा?

UPI को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम इसी बात पर रहता है कि क्या हर बार पैसे भेजने पर ग्राहक के खाते से अतिरिक्त रकम काटी जाएगी। यहां MDR और ग्राहक से सीधे लिए जाने वाले शुल्क में अंतर समझना जरूरी है। MDR मर्चेंट-साइड पेमेंट शुल्क से जुड़ा है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI ट्रांजैक्शन पर ग्राहक के खाते से अपने आप कोई अलग शुल्क काट लिया जाएगा। इसलिए किसी भी भुगतान सेवा में शुल्क लागू है या नहीं, यह उस ट्रांजैक्शन के प्रकार और संबंधित सेवा की शर्तों पर निर्भर करता है।

अगर इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझें तो MDR किसी सामान्य सरकारी टैक्स की तरह नहीं है। यह डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने वाली व्यवस्था में शामिल शुल्क है। वित्त मंत्री की सफाई का मुख्य बिंदु यही है कि MDR से मिलने वाला पैसा सरकारी खजाने में जमा होने वाला टैक्स नहीं है। यह पेमेंट सिस्टम में शामिल संबंधित संस्थाओं के बीच जाता है।

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