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श्री महाकालेश्वर मंदिर में विनीत गिरि गादीपति महंत बने रहेंगे

महानिर्वाणी अखाड़े के पंचों ने ठुकराई इस्तीफे की पेशकश

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में 38 साल के विनीत गिरि गादीपति महंत बने रहेंगे। महानिर्वाणी अखाड़े के पंचों ने उनके इस्तीफे की पेशकश को अस्वीकार कर दिया है। गिरि को सिंहस्थ 2028 तक कंटीन्यू रहने के आदेश दिए गए हैं।

छह साल पहले श्री महाकालेश्वर मंंदिर के युवा गादीपति महंत बने विनीत गिरि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनकी रीढ़ के एल-4 और एल-5 में काफी दर्द रहता है। इस वजह से भस्मार्ती करने में उन्हें परेशानी होती है। इसे लेकर वह मानसिक रूप से असहज रहते हैं। उन्हें लगता है कि वे बाबा की सेवा नहीं कर पा रहे हैं। क्षोभ से भरे विनीत गिरि ने महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी के समक्ष त्यागपत्र की पेशकश की थी।

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इसी सिलसिले में दो दिन से हरिद्वार और प्रयागराज में पंच उज्जैन में डेरा डाले थे। शनिवार को अयोध्या में राममंदिर के कार्यक्रम से शामिल होकर सचिव रवींद्र पुरी उज्जैन पहुंचे थे। यहां उन्होंने विनीत गिरि और उनके सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श किया। आखिर में पंच इस नतीजे पर पहुंचे कि विनीत गिरि सिंहस्थ तक कंटीन्यू करें। स्वास्थ्य की चिंता नहीं करें। व्याधि तो किसी को भी हो सकती है, इसका इलाज हो सकता है। सचिव रवींद्र पुरी ने बताया कि सिंहस्थ तक विनीत गिरि ही श्री महाकालेश्वर के गादीपति महंत रहेंगे। आगे कौन होगा, यह बाद में देखा जाएगा।

अफसरों ने की मुलाकात
महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (दूसरी वाली) के अध्यक्ष भी हैं। हरिद्वार के दक्ष प्रजापति मंदिर के महंत रवींद्र पुरी से सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रौशनकुमार सिंह और श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने भी मुलाकात की। पुरी और महानिर्वाणी अखाड़े के पंच बडऩगर रोड पर दंडी स्वामी आश्रम के सामने स्थित मां पीतांबरा बगलामुखी धाम के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में भी शामिल हुए।

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उज्जैन में वैदिक प्रतिष्ठान बनेगा

मां पीतांबरा बगलामुखी धाम के साधक विजयानंद पुरी उज्जैन में वैदिक प्रतिष्ठान खोलने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि धाम में सिंहस्थ के पहले की एक्टिविटी शुरू हो गई है। सिंहस्थ तक धाम में रोज चंडीपाठ होगा। उज्जैन में वैदिक प्रतिष्ठान खोलने की तैयारी भी की जा रही है। इस प्रतिष्ठान में बटुकों को धार्मिक शिक्षा दी जाएगी। मूल रूप से सूरत में आश्रम संचालित करने वाले विजयानंद पुरी श्री महाकालेश्वर मंदिर में 2012 में तत्कालीन महंत प्रकाश पुरी के सहयोगी रह चुके हैं। उन्होंने खलघाट (धार) में भी नर्मदा किनारे आश्रम बना रखा है। यहां वह करीब ७०० मीटर का घाट बनवाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान में सुविधा हो सके।

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