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पार्टनर का भरोसा जीतना चाहते हैं? अपनाएं ये 6 तरीके

किसी भी मजबूत और खूबसूरत रिश्ते की सबसे बुनियादी नींव ‘भरोसा’ होती है। लेकिन जब एक बार इस नींव में दरार आ जाए, तो हंसते-खेलते और खुशहाल रिश्ते में भी संदेह (शक) का कड़वा जहर घुलने लगता है। कई बार एक छोटी सी गलतफहमी या अतीत (पास्ट) में हुई कोई भूल अच्छे-भले रिश्ते को बिखराव की कगार पर लाकर खड़ा कर देती है। यदि आपके पार्टनर के मन में भी आपको लेकर असुरक्षा या शक की भावना घर कर गई है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का मानना है कि खोए हुए विश्वास को दोबारा हासिल करना एक लंबी प्रक्रिया जरूर है, लेकिन सही कोशिशों से बिगड़ी बात को पूरी तरह सुधारा जा सकता है।

 

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आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स द्वारा सुझाए गए वो 6 प्रभावी कदम, जो आपके पार्टनर का दिल और अटूट विश्वास फिर से जीतने में आपकी मदद कर सकते हैं:

1. ईमानदारी से गलती स्वीकारें, बहानों का सहारा न लें

अगर आपसे वाकई कोई चूक या गलती हुई है, तो उसे छिपाने, तोड़-मरोड़ कर पेश करने या उसके पीछे कुतर्क देने के बजाय पूरी ईमानदारी से स्वीकार करें।

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  • एक्सपर्ट राय: जब आप अपनी गलती पर अड़ जाते हैं या खुद को जबरन सही साबित करने की कोशिश करते हैं, तो सामने वाले का संदेह और गहरा हो जाता है। अपने पार्टनर से बिना किसी शर्त के दिल से माफी मांगें। उन्हें यह अहसास होना चाहिए कि आपको अपनी गलती पर सचमुच पछतावा है और आप उनके दर्द को महसूस कर रहे हैं। आपकी यही सच्चाई उनके जख्मों पर मरहम लगाएगी।

2. पारदर्शिता अपनाएं: छिपाने की आदत को कहें अलविदा

रिश्ते में जब अविश्वास का दौर हो, तो सबसे महत्वपूर्ण कदम है ‘ट्रांसपेरेंसी’ यानी पूर्ण खुलापन। इस स्थिति में आपकी छोटी से छोटी गुप्त बात भी पार्टनर को बहुत बड़ी साजिश लग सकती है।

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  • क्या करें: अब से उनसे कोई भी बात न छिपाएं। अपना फोन उनके सामने इस्तेमाल करने में संकोच न करें, और अपने पूरे दिन के शेड्यूल, दोस्तों व ऑफिस के काम के बारे में खुद आगे बढ़कर उन्हें जानकारी दें। जब आपकी तरफ से सब कुछ साफ रहेगा, तो उनके मन में चल रही जासूसी और डर अपने आप शांत हो जाएंगे।

3. तीखे सवालों पर गुस्सा होने के बजाय शांत रहें

पार्टनर का शक दूर करने के लिए आपको असीमित धैर्य की आवश्यकता होगी। जब कोई व्यक्ति अंदर से डरा या टूटा हुआ होता है, तो वह तसल्ली पाने के लिए एक ही सवाल बार-बार पूछ सकता है।

  • व्यवहार में बदलाव: ऐसे मौकों पर “तुम हर समय मुझ पर नजर क्यों रखते हो?” या “क्या तुम्हें मुझ पर रत्ती भर भरोसा नहीं है?” कहकर चिढ़ने या गुस्सा करने के बजाय, बेहद शांत रहकर उनके हर सवाल का सीधा और साफ जवाब दें। जब वे देखेंगे कि आप उनके कड़वे सवालों से भाग नहीं रहे हैं, तो उनका डर धीरे-धीरे कम होने लगेगा।

4. कथनी और करनी में समानता रखें (वादे निभाएं)

भरोसा केवल बड़ी-बड़ी बातें करने, कसमें खाने या कविताओं से वापस नहीं आता; इसके लिए आपके एक्शन्स (व्यवहार) मायने रखते हैं।

  • अमल करें: अगर आपने उनसे वादा किया है कि आप काम खत्म होते ही सीधे घर लौटेंगे या अपनी किसी पुरानी आदत को दोबारा नहीं दोहराएंगे, तो अपने शब्दों पर पूरी तरह पक्के रहें। अविश्वास के दौर में पार्टनर आपकी बातों से ज्यादा आपके डेली रूटीन और व्यवहार को नोटिस करता है। जब वे देखेंगे कि आप जो कहते हैं, वही करते हैं, तो उनका खोया विश्वास लौटने लगेगा।

5. छोटे-बड़े फैसलों में दें खास अहमियत

अपने पार्टनर को यह महसूस कराना बेहद जरूरी है कि वे आज भी आपके जीवन के सबसे अभिन्न और खास हिस्से हैं।

  • सहभागिता बढ़ाएं: घर के बजट, निवेश, वीकेंड के प्लान से लेकर करियर से जुड़े किसी भी छोटे-बड़े फैसले में उनकी राय और मशवरा जरूर लें। जब आप उन्हें इस तरह प्राथमिकता देंगे, तो उनके मन की इनसिक्योरिटी (असुरक्षा की भावना) धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी और उन्हें लगेगा कि आप उनके साथ मिलकर अपना भविष्य देख रहे हैं।

6. धैर्य रखें, जख्म भरने के लिए समय दें

विश्वास को दोबारा कायम करना कोई ‘टू-मिनट नूडल्स’ नहीं है जो तुरंत तैयार हो जाए। किसी भी गहरे भावनात्मक जख्म को पूरी तरह भरने में महीनों या कभी-कभी साल भर का समय भी लग जाता है।

  • दबाव न बनाएं: यदि आपका पार्टनर पुरानी नकारात्मक बातों को याद करके कभी अचानक भावुक, उदास या नाराज हो जाता है, तो उन पर तुरंत सामान्य (नॉर्मल) होने का दबाव न बनाएं। उनकी भावनाओं का सम्मान करें और उन्हें इस मानसिक स्थिति से उबरने के लिए पर्याप्त समय दें।

जब खुद से न संभले बात, तो लें कपल काउंसलिंग की मदद

अगर आप दोनों अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर चुके हैं, फिर भी आपसी दूरियां और कड़वाहट कम होने का नाम नहीं ले रही है, तो किसी प्रोफेशनल कपल काउंसलर या थेरेपिस्ट की मदद लेने में हिचकिचाएं नहीं। कई बार एक निष्पक्ष और न्यूट्रल तीसरा व्यक्ति आप दोनों की समस्याओं को वैज्ञानिक और व्यावहारिक ढंग से समझकर सही मार्गदर्शन कर सकता है। काउंसलिंग के जरिए उन संवेदनशील मुद्दों पर भी शांति से बात की जा सकती है, जिन पर घर में चर्चा शुरू होते ही झगड़ा बढ़ जाता है।

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