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जल न केवल जीवन का आधार, बल्कि यह समाज में सद्भावना और एकता का भी प्रतीक है: पांडेय

अभा सद्भावना व्याख्यानमाला के तीसरे दिन पर्यावरणविदों ने रखे अपने विचार

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। जीवन बीमा अपने भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करता होगा, लेकिन यह सुरक्षा किस काम की जब हमारे अस्तित्व और आपसी सद्भावना का आधार अर्थात् जल ही सुरक्षित नहीं रहेगा। आज की युवा पीढ़ी को विरासत में जीवन-बीमा की जगह जल-बीमा देने की आवश्यकता है। जल-बीमा का अर्थ है जल के संरक्षण, संचयन और विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में सशक्त प्रयास करना। जल न केवल जीवन का आधार है, बल्कि यह समाज में सद्भावना और एकता का भी प्रतीक है।

उक्त विचार पर्यावरणविद् पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने भारतीय ज्ञानपीठ (माधव नगर) में कर्मयोगी स्व. कृष्ण मंगलसिंह कुलश्रेष्ठ की प्रेरणा एवं पद्मभूषण डॉ. शिवमंगल ‘सुमन’ की स्मृति में आयोजित अभा सद्भावना व्याख्यानमाला के तृतीय दिवस पर प्रमुख वक्ता के रूप में व्यक्त किए अध्यक्षता माधव विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.हरिश व्यास ने की।

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व्याख्यानमाला के आरंभ में संस्थान की शिक्षिकाओं ने सद्भावना गीतों की प्रस्तुति दी। वरिष्ठ शिक्षाविद दिवाकर नातु, संस्थान प्रमुख युधिष्ठिर कुलश्रेष्ठ, अमृता कुलश्रेष्ठ सहित संस्थान के पदाधिकारियों ने महात्मा गांधी, कवि कुलगुरु डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन और कर्मयोगी स्व. कृष्णमंगल सिंह कुलश्रेष्ठ के प्रति सूतांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया।

इस अवसर पर प्रेमनारायण नागर, एडवोकेट रशीद उद्दीन, शीला व्यास, प्रदीप जैन, सुनील भट्ट, अनिल दास, दिलीप चौधरी, डॉ. विनोद बैरागी, महावीर जैन, संतोष व्यास, सुशीला जैन सहित विभिन्न पत्रकारगण, शिक्षकजन एवं बौद्धिकजन मौजूद थे।

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