चक्रतीर्थ पर गीली लकडिय़ों से अंतिम विदाई में बाधा, परिजन बाहर से कर रहे इंतजाम…

अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। शनिवार दोपहर के वक्त एक परिवार के लोग बुजुर्ग की पार्थिव देह को चक्रतीर्थ श्मशान पर लेकर पहुंचे, अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी और कंडे खरीदे उन्हें जमाया, मुखाग्नि दी लेकिन लकडिय़ों ने आग ही नहीं पकड़ी। राल-कपूर लाए लेकिन इनसे भी बात नहीं बनी। फिर अतिरिक्त घी लाना पड़ा आखिरकार जूना सोमवारिया भेजकर लोगों से सूखी लकडिय़ां मंगवाना पड़ी तब कहीं जाकर चिता को मुखाग्नि दी जा सकी।
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चक्रतीर्थ श्मशान पर इन दिनों अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, वजह है गीली लकडिय़ों की सप्लाय। हाल यह हो चुके हैं कि जिन्हें पहले से गीली लकडिय़ों की जानकारी है वे तो अब किसी परिचित के अंतिम संस्कार से पहले ही परिजनों को सूखी लकडिय़ां अपने साथ ही चक्रतीर्थ ले जाने की सलाह देने लगे हंै, सूखी लकडिय़ों की दूसरी जगहों से व्यवस्था करवा रहे हैं।
इसलिए बने ऐसे हालात
चक्रतीर्थ की अधिकांश व्यवस्थाएं नगर निगम द्वारा संचालित की जाती हैं लेकिन लकड़ी-कंडे और अंतिम संस्कार की अन्य सामग्री की व्यवस्था चक्रतीर्थ न्यास करता है। हर साल न्यास 12 से 13 हजार क्विंटल लकडिय़ों का स्टाक करता है। इसके लिए बाकायदा टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती है। सूखत और घुन की वजह से स्टाक की गई लकड़ी का वजन 7 से 8 हजार क्विंटल ही रह जाता है। वर्षाकाल में लकडिय़ों की सप्लाय बंद रहती है। इस अवधि में पहले से रखा स्टाक भी खत्म हो जाता है। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद सप्लाय दोबारा चालू होती है लेकिन शुरुआती महीनों में यहां पहुंचने वाली लकड़ी गीली ही आती है। इस बार पुराना स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है, इसी वजह से ताजा सप्लाय में आने वाली लकडिय़ों का ही ज्यादातर इस्तेमाल किया जा रहा है।
हर रोज औसत 20 क्विंटल की खपत
सामान्य दिनों में चक्रतीर्थ श्मशान भूमि पर 8 से 10 तक अंतिम संस्कार होते हंै।
एक देह का अंतिम संस्कार किए जाने में दो से दो से ढाई क्विंटल लकडिय़ों का इस्तेमाल होता है।
यहां रोज लकडिय़ों की खपत लगभग 20 क्विंटल की है। न्यास द्वारा 700 रुपए प्रति क्विंटल की लागत से लकडिय़ां उपलब्ध कराई जाती है।
लकडिय़ों की सूखत की वजह से न्यास को हर साल काफी नुकसान होता है। इस घाटे की पूर्ति न्यास के सदस्य आपस में राशि मिलाकर करते हैं।
सीएनजी है बेहतर विकल्प
चक्रतीर्थ श्मशान भूमि पर नगर निगम द्वारा पूर्व में इलेक्ट्रिक शवदाह का संचालन किया जाता था जिसे अब पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। यहां सीएनजी संचालित चार मशीनें उपयोगी अवस्था में हैं लेकिन इनका उपयोग करने में कम ही लोग रुचि लेते हैं। परंपराओं से जुड़ाव की वजह से ज्यादातर लोग लकड़ी व कंडों से अंतिम संस्कार को उपयुक्त मानते हैं, जबकि सीएनजी शवदाह गृह पर तो शुल्क भी केवल एक रुपया ही लिया जाता है।
नई लकड़ी जितनी भी आ रही है, अधिकांश गीली है। हमने सप्लायर के जरिए सूखी लकड़ी और सूखे कंडों का इंतजाम करवाया है। एक सप्ताह से भी कम समय में इस समस्या का निदान हो जाएगा।- अशोक प्रजापत, अध्यक्ष, चक्रतीर्थ न्यास
फिलहाल हमारे पास 550 क्विंटल लकडिय़ों का स्टॉक है। लगभग 5 टन सूखे छिलके हंै। बीड़ के पांच नए सांचे लगवाए हंै जिनकी वजह से लकडिय़ों का सही से इस्तेमाल किया जा सके।- हरिसिंह यादव, उपाध्यक्ष, चक्रतीर्थ न्यास










