ईंधन बचत का यह कैसा संदेश…? बस से पहुंचे अधिकारी, पीछे पहुंचा 25 वाहनों का काफिला

कलेक्टर सहित अधिकारी बस से गए, लौटे अपने सरकारी वाहनों से, शिविर स्थल पर लोगों ने देखी वाहनों की कतार
अक्षरविश्व न्यूज आगर-मालवा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सरकारी कामकाज में मितव्ययता और ईंधन बचत को बढ़ावा देने की अपील के बीच आगर-मालवा में आयोजित जन विश्वास शिविर में अलग तस्वीर सामने आई। शुक्रवार को ग्राम पंचायत भ्याना में आयोजित शिविर में कलेक्टर सहित कई अधिकारी बस से पहुंचे, लेकिन उनके सरकारी वाहन भी पीछे-पीछे शिविर स्थल तक पहुंच गए। शिविर स्थल पर करीब 25 सरकारी एवं अन्य वाहन खड़े दिखाई दिए।
बस के पीछे पहुंचा अधिकारियों का काफिला: ग्राम भ्याना में आयोजित जनविश्वास शिविर के लिए कलेक्टर सहित कई अधिकारी बस से रवाना हुए। बस के पहुंचने के कुछ ही समय बाद अधिकारियों के वाहन भी शिविर स्थल पर पहुंच गए। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में अधिकारियों के वाहन खड़े नजर आए। शिविर समाप्त होने के बाद कई अधिकारी इन्हीं वाहनों से वापस रवाना हुए, जबकि अधिकारियों को लेकर गई बस खाली लौट गई।
ईंधन बचत पर उठे सवाल
मामले को लेकर ईंधन बचत और सरकारी संसाधनों के उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि यदि अधिकारियों के आने-जाने के लिए बस का उपयोग किया गया था, तो उनके अलग-अलग वाहन शिविर स्थल तक क्यों लाए गए? इससे ईंधन बचत के उद्देश्य के बजाय अतिरिक्त ईंधन खपत होने की स्थिति बनती है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
गौरतलब है कि नलखेड़ा विकासखंड में आयोजित जन विश्वास शिविर के बाद भाकिसं के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता में अधिकारियों के बस से जाने और अलग-अलग वाहनों से लौटने को लेकर ईंधन बचत के दावे पर सवाल उठाए थे। जनसंपर्क विभाग द्वारा अधिकारियों के बस से जाने के फोटो जारी कर मितव्ययता का संदेश दिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
अधिकारियों ने बताया निरीक्षण के लिए जरूरी थे वाहन
एसडीएम आगर कमल मंडलोई ने बताया कि शिविर शुरू होने से पहले संबंधित क्षेत्र के स्कूल, आंगनवाड़ी सहित अन्य स्थानों का निरीक्षण भी करना होता है। इसके चलते अधिकारियों को अपने वाहनों से आना-जाना पड़ा। वहीं वरिष्ठ अधिकारियों को शिविर समाप्त होने के बाद गणेश विसर्जन स्थल का निरीक्षण करना था, इसलिए उनके वाहन भी साथ लाए गए थे।









