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कब है बसंत पंचमी? जानें महत्व व शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी का त्योहार हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। ये दिन साल के उन कुछ दिनों में से एक माना जाता है, जिसमें शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे भी किए जा सकते हैं। माना जाता है कि इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है। जो लोग अन्य मुहूर्त पर शुभ कार्य नहीं कर पाते हैं, वे बसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त में कर लेते हैं। लेकिन इस साल विद्या, स्वर और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित इस त्योहार पर शादी, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे शुभ काम नहीं हो पाएंगे। आइए जानें इसकी क्या वजह है

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बसंत पंचमी की तारीख

 

इस साल बसंत पंचमी 23 जनवरी दिन शुक्रवार को है। पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी को मध्यरात्रि 02 बजकर 28 मिनट से 24 जनवरी को मध्यरात्रि 01 बजकर 46 मिनट तक है। उदयातिथि के अनुसार, पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा।

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बसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त

बसंत पंचमी को पूरे दिन अबूझ मुहूर्त होता है। यानी इस दिन आप कोई शुभ कार्य बिना पंचांग देखे किसी भी समय कर सकते हैं। अबूझ मुहूर्त को स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है। बसंत पंचमी के अलावा अबूझ मुहूर्त महाशिवरात्रि, फुलेरा दूज, अक्षय तृतीया पर भी होता है।

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क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी

बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना जाता है। इसी तिथि के दिन से इस ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। जब शीत ऋतु का समापन होता है। उसके बाद बसंत ऋतु का आगमन होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने मां सरस्वती को प्रकट किया था। शांत सृष्टि को देखकर भगवान ब्रह्मा खुश नहीं थे, इसलिए उन्होंने सरस्वती को प्रकट किया। जिन्हें कला और संगीत की देवी माना जाता है। इस कारण बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की पूजा की जाती है।

बसंच पंचमी का महत्व

हिंदू धर्म में बसंत पंचमी की तिथि का बहुत ही खास महत्व है। ये तिथि विद्यार्थियों के लिए बहुत शुभ मानी जाती है। इस दिन सारे बच्चे एकसाथ मिलकर ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा- अर्चना की जाती है। सरस्वती पूजा के दिन पीले वस्त्र पहने जाते हैं और मां सरस्वती को भी पीला वस्त्र और पीले रंग की मिठाई अर्पित की जाती है। सरस्वती पूजा का दिन विद्यारंभ के लिए भी शुभ माना जाता है।

बसंत पंचमी योग

इस बार बसंत पंचमी पर रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। रवि योग को सभी दोषों का नाश करने वाला माना गया है, जिससे पूजा और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग में किया गया कार्य सफल और स्थायी होता है, वहीं अमृत सिद्धि योग जीवन में स्थिरता और उन्नति का संकेत देता है। इसके साथ ही मालव्य और शश राजयोग का निर्माण सुख-सुविधाओं और करियर में प्रगति के योग बना रहा है।

बसंत पंचमी का दिन शिक्षा और ज्ञान से जुड़े कार्यों के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। छोटे बच्चों का अक्षर अभ्यास शुरू कराना, विद्यार्थियों का अध्ययन आरंभ कराना और विद्या दान करना विशेष फलदायी होता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनना, पीले पकवानों का भोग लगाना और मां सरस्वती की पूजा करना शुभ माना गया है।

इस साल नहीं होंगे मांगलिक कार्य

अबूझ मुहूर्त के बावजूद इस बार बसंत पंचमी पर मांगलिक कार्य नहीं होंगे, क्योंकि शुक्र अस्त चल रहे हैं। मांगलिक कार्यों को करने के लिए शुक्र और गुरु ग्रह का शुभ स्थिति में होना जरूरी है। शुक्र को भौतिक सुख, सुविधाओं, प्रेम आदि का कारक माना जाता है। पंचांग के अनुसार, शुक्र ग्रह 11 दिसंबर 2025 को सुबह 6 बजकर 35 मिनट पर अस्त हुआ था। तब से शुक्र ग्रह 53 दिनों तक अस्त रहेगा। शुक्र ग्रह का उदय 1 फरवरी 2026 को शाम 06 बजकर 27 मिनट पर होगा। उसके बाद से ही शुभ कार्य होंगे। इसी वजह से जनवरी में विवाह के शुभ मुहूर्त नहीं हैं।

बसंत पंचमी पर शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : तड़के 05:26 बजे से सुबह 06:20 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक

निशिता मुहूर्त : देर रात 12:06 ए एम से लेकर 01:00 ए एम तक

राहुकाल : दिन में 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक

यमगण्ड : दोपहर 03:13 बजे से लेकर शाम 04:33 बजे तक

सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी के दिन विद्या, ज्ञान, कला और स्वर की देवी मां सरस्वती की पूजा करते हैं। इस बार सरस्वती पूजा का मुहूर्त सुबह 07:13 बजे से लेकर दोपहर 12:33 बजे तक है।

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