जब आरटीओ ने ही पास की बसें, तो अब रोक क्यों?

कार्रवाई के विरोध में उतरे 2/2 स्लीपर कोच बस ऑपरेटर, 100 से अधिक बसें खड़ी की

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। प्रदेश सरकार द्वारा 2/2 स्लीपर कोच बसों पर अचानक लगाई रोक ने टूरिस्ट बस ऑपरेटरों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इस निर्णय के विरोध में एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाते हुए गुरुवार शाम सामाजिक न्याय परिसर में 100 से अधिक बसें खड़ी कर विरोध दर्ज कराया।
ऑपरेटरों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये सभी बसें उज्जैन आरटीओ द्वारा ही विधिवत जांच के बाद पास की गई थीं। अब बिना कोई समय दिए इन्हें अवैध बताकर बंद कर देना व्यावसायिक और नैतिक रूप से गलत है। टूरिस्ट बस ऑपरेटर एसोसिएशन इंदौर के अध्यक्ष अनिल भावसार ने बताया कि स्लीपर बसों के नियम 2019 से लागू हैं। इसके बाद भी आरटीओ ने अपने एजेंटो के जरिए सभी बसों को ओके कर परमिट जारी किए हैं। जो बसें कुछ महीनों पहले ओके थी अब वे अनफिट कैसे हो सकती हैं। इस मनमाने निर्णय के खिलाफ बस ऑपरेटरों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। साथ ही आम जनता को भी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
श्री भावसार ने बताया कि इंदौर एसो. पूरे प्रदेश को प्रतिनिधित्व करती है। जल्दी ही इस मनमानी के खिलाफ प्रदेशभर में आंदोलन करेंगे। एसोसिएशन पदाधिकारियों का कहना है कि ने जिन बसों को 2019 में 2-2 सीट का फिजिकल चैक कर फिटनेस पास किया उसका रजिस्ट्रेशन किया गया। 6 साल तक बस चलती रही 28 दिसंबर 2025 तक ऐसे सभी बसों का रजिस्ट्रेशन किया गया। अब कुछ बसों में हुई घटना को लेकर एकाएक आरटीओ ने रोक लगाकर कहा कि सभी बसों को 2-1 करना होगा। उज्जैन में कुल 839 ऐसी बसें है जिनको आरटीओ ने ब्लॉक कर दिया। अगर आरटीओ के नियम से बसों को मोडिफाइड करवाया गया तो कम से कम 7 से 10 लाख रुपए खर्चा आएगा। फिलहाल उज्जैन की 100 बसों को खड़ा कर दिया गया। इस दौरान सभी बसों में करीब 1 साल का समय लग जायेगा। प्रदेश में करीब ऐसी 8 हजार बसें हैं।
धार्मिक यात्राएं और विवाह समारोह पर पड़ेगा असर
टूरिस्ट बस ऑपरेटर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि आरटीओ द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के स्लीपर कोच बसों को बंद करने से आगामी धार्मिक यात्राओं और शादियों के सीजन में बारातों के आवागमन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
अचानक हुई इस कार्रवाई से न केवल बस मालिकों का व्यवसाय ठप हो गया है, बल्कि ड्राइवर, क्लीनर, टूर गाइड, एजेंट और धार्मिक यात्राओं से जुड़े छोटे व्यापारियों सहित हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होगा।
अचानक बसें बंद होने से उन यात्रियों के सामने बड़ी समस्या आ गई है जिन्होंने पहले से धार्मिक स्थलों या बारातों के लिए बुकिंग करा रखी थी।
उचित समाधान निकाला जाए
हम प्रशासन से निवेदन करते हैं कि इस समस्या का उचित समाधान निकाला जाए ताकि रोजगार और यात्रियों की सुविधा बनी रहे। जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जातीं, हमारा विरोध जारी रहेगा।
अनिल भावसार, टूरिस्ट बस ऑपरेटर एसोसिएशन इंदौर अध्यक्ष









