‘सही समय पर उपचार दूर की बात है कोई देखने नहीं आता’
अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। एक ओर जहां प्रदेश सरकार सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य, सफाई, दवाएं, बेड, भोजन सहित हरसंभव सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है। वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में बैठे चिकित्सक-स्टाफ की सोच और कार्यप्रणाली इसके विपरीत चल रही है। चरक अस्पताल में इन दिनों अव्यवस्थाओं का आलम है। यहां पहुंचने वाले सभी प्रकार के मरीज त्वरित उपचार न मिलने, बेड व अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदार अफसरों का मरीजों की समस्याओं पर ध्यान नहीं है। यहां से परेशान होकर मजबूरी में प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेने वाले मरीज अब सोशल मीडिया पर अस्पताल की अव्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
राघवेंद्र बोला-चार घंटे तक पिता को नहीं मिला इलाज
सो शल मीडिया के फेसबुक ग्रुप ‘उज्जैन वाले’ पर राघवेन्द्र ठाकुर ने पोस्ट साझा की है, जिसमें उन्होंने लिखा कि 1 अप्रैल 2025 की 6.30 बजे का वो क्षण मेरी जिंदगी का सबसे डरावना पल था। मेरे पिताजी सडक़ दुर्घटना में घायल हुए, चरक हॉस्पिटल पास होने से हम उन्हें तुरंत वहां ले गए। लेकिन वहां जो हुआ वो मेरे दिल पर एक ऐसा घाव है जो शायद कभी न भरे। इतने समय तक मेरे पिताजी तड़पते रहे, एक डेढ़ घंटे तक कोई भी नहीं आया। साढ़े आठ नौ बजे के करीब बेड मिला तब नर्स ने सिर्फ बोतल और पेनकिलर दिया। डॉक्टर 10.30 बजे तक आए।
चार घंटों तक सही इलाज शुरू नहीं हुआ। फिर प्राइवेट हॉस्पिटल जाना पड़ा, जहां तत्काल उपचार शुरू हुआ। राघवेंद्र आगे लिखते हैं कि सरकारी अस्पतालों में इंसानियत मर चुकी है। ये वही अस्पताल हैं जहां गरीबों को दर्द में तड़पते देखना आम बात हो गई है। आखिरकार हमें मजबूरन प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ा जहां पहुंचते ही डॉक्टर्स ने तुरंत इमरजेंसी ट्रीटमेंट शुरू किया। एक्सरे, स्टिचिंग सब 15 मिनट में हो गया। अब पिताजी स्थिर हैं, लेकिन वो 4 घंटे की यातना कभी नहीं भूल पाऊंगा। मेरी मांगें- सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे सातों दिन आपातकालीन सेवा अनिवार्य हो। कोई ओर पिता, मां, बच्चा ऐसी यातना न झेले। सिस्टम में सुधार हो। हर नागरिक को सम्मानजनक इलाज मिले। मौत और जीवन के बीच की ये लड़ाई अकेले नहीं लडऩी चाहिए। हम सबको मिलकर इस सिस्टम को बदलना होगा।
राघवेन्द्र ठाकुर की पोस्ट पर ग्रुप में सदस्यों ने कुछ इस तरह किए कमेंट्स
सरकारी अस्पताल में सिर्फ तनख्वाह से मतलब होता है।-गणेश शर्मा
कर्मचारियों को सिर्फ सैलरी से मतलब रहता है। दूसरी बात अगर 80 प्रतिशत लाने वाले पात्र नहीं है उससे कम 40 वाले पात्र है जिन्हें एडमिशन मिल रहे तो ऐसे दृश्य तो देखने को मिलेंगे ही।-अंकुश त्रिवेदी
सरकारी संस्थाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार, काम में लापरवाही इन बातों पर कड़ी से कड़ी सजा के प्रावधान होना चाहिए।-सालाश जस्तीन
अधिकारियों को पता है यहां क्या होता है फिर भी कार्रवाई नहीं होती दिखावे के लिए एक दिन इंस्पेक्शन हो जाता है फिर वहीं के वहीं।-बाबूलाल अतनेरिया
शासकीय डॉक्टर की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगानी चाहिए।-राजीव शर्मा
सरकारी अस्पतालों की बुरी व्यवस्था के कारण प्राइवेट अस्पताल फल-फूल रहे हैं ।-जी.एल. परमार
अस्पताल ही नहीं हर सरकारी कामों में ऐसे ही व्यवहार होता है, जबकि तनख्वाह भी अच्छी ओर टाइम छुट्टी हर चीज की सुविधा मिलती है फिर भी जिम्मेदारी से काम नहीं होता।-सुरेश जीनवाल
सरकारी अस्पतालों में केस बिगडऩे का कारण ही यही है, ज्यादा भीड़ आ जाती है तो ये इंदौर रैफर लिख देते हैं। सही समय पर उपचार होना तो दूर की बात है कोई देखने तक नहीं आता।-राहुल महावर
ना सरकार का डर ना प्रशासन का भय आम आदमी से किसी को कोई मतलब नहीं।-देव आंजना
सही कहा किसी से पैसे उधार लेकर प्राइवेट में उपचार करवा लेना चाहिए। सरकारी में नहीं जाना चाहिए, वहां जान का रिस्क है।-सूरज सूर्यवंशी
सरकारी सिस्टम से इसलिए आम नागरिकों का विश्वास टूट रहा है। चिकित्सा हो या शिक्षा मेरा मानना है कि सरकार को इन दो सरकारी संस्थाओं पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। प्राइवेट संस्था अपने कर्मचारियों को कम वेतन देकर भी उनसे अच्छा काम करा सकती हैं तो सरकार क्यों नहीं करा सकती। उसके बजट से ज्यादा उसको वह खर्च करना पड़ता है जिससे वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे पाता है। जिम्मेदारों से मेरा निवेदन है कि आप सरकारी सिस्टम शिक्षा और चिकित्सा दोनों पर विशेष रूप से ध्यान दें तो यह सुधार सकते हैं और लोगों को अच्छी सुविधा मिल सकती हैं।-रतन धाकड
आरएमओ और सिविल सर्जन को देंगे कार्रवाई के निर्देश
सोशल मीडिया पर चरक अस्पताल को लेकर चल रही पोस्ट की जानकारी आपके माध्यम से संज्ञान में आई है। आरएमओ और सिविल सर्जन से इस मामले में जानकारी लेकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। –डॉ. अशोक पटेल, सीएमएचओ